गंगा के रौद्र रूप से कई जिलों में मंडराया बाढ़ का संकट, 2016 का रिकॉर्ड टूटा, चार दिनों से पानी में फंसे लोग

बिहार में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से कई जिलों में बाढ़ का संकट गहरा गया है. 2016 के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए गंगा का पानी अपने उच्चतम स्तर पर है, जिससे निचले इलाकों में चिंता बढ़ गई है.

Bihar Flood Update: बिहार में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से कई जिलों में चिंता बढ़ गई है. गंगा के साथ उसकी सहायक नदियों का पानी भी कई जगह बढ़ रहा है. इसका असर निचले इलाकों में साफ दिखाई दे रहा है. कई गांवों में पानी फैलने लगा है और लोगों को घर से निकलने में परेशानी हो रही है. कुछ जगहों पर स्कूलों में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है.

पटना में पुनपुन नदी का रिंग बांध टूटा

पटना में पुनपुन नदी का रिंग बांध आज टूट गया. बांध टूटने के बाद प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और उसे बचाने का काम शुरू किया. इलाके में पानी फैलने की स्थिति को देखते हुए प्रशासन लगातार हालात पर नजर रख रहा है.

संजय झा बोले- 2016 से भी ज्यादा आया पानी

गंगा के बढ़ते जलस्तर को लेकर संजय झा ने कहा कि गंगा में सबसे ज्यादा बाढ़ का पानी साल 2016 में आया था. इस बार गंगा का पानी 2016 के स्तर से भी ऊपर पहुंच गया है. उनके इस बयान के बाद मौजूदा हालात को लेकर चिंता और बढ़ गई है.

गुरुवार को सीएम सम्राट चौधरी ने भी गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर का जायजा लिया. उन्होंने हालात को देखते हुए अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए, ताकि बाढ़ की स्थिति बनने पर लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो.

जेपी सेतु और राघोपुर ब्रिज से लिया गंगा का जायजा

पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जेपी सेतु और राघोपुर ब्रिज से सारण और वैशाली इलाके में गंगा के बढ़े पानी का जायजा लिया. इस दौरान उन्होंने नदी के जलस्तर और आसपास के हालात को देखा. अधिकारियों को लोगों की सुरक्षा पर खास ध्यान देने और जरूरत पड़ने पर मदद पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं.

प्रशासन की ओर से निचले इलाकों और ज्यादा खतरे वाले स्थानों पर नजर रखने की बात कही गई है.

छपरा के रिविलगंज में बाढ़ से हालात खराब

छपरा में गंगा और सरयू नदी का पानी बढ़ने से कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है. रिविलगंज भी इससे प्रभावित है. यहां कई जगहों पर बाढ़ का पानी फैल गया है.

रिविलगंज के दिलियापुर रहीमपुर पंचायत के जान टोला में लोग पिछले चार दिनों से बाढ़ के पानी के बीच फंसे हुए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि पानी लगातार बढ़ रहा है, लेकिन उन्हें अभी तक उम्मीद के मुताबिक मदद नहीं मिली है. लोगों के सामने घर से बाहर निकलने, जरूरी सामान बचाने और मवेशियों को सुरक्षित रखने की परेशानी बनी हुई है.

मुंगेर में खतरे के निशान के करीब पहुंची गंगा

मुंगेर में गंगा का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है. यहां नदी का पानी 38.86 मीटर तक पहुंच गया है, जबकि खतरे का निशान 39.33 मीटर है. यानी गंगा खतरे के निशान से सिर्फ 47 सेंटीमीटर नीचे बह रही है.

पानी बढ़ने से जिले के कई गांवों में बाढ़ का पानी फैल गया है. कई घरों के आसपास पानी जमा है. ऐसे में लोग अपने परिवार, जरूरी सामान और मवेशियों को लेकर ऊंची और सुरक्षित जगहों पर जाने को मजबूर हैं. ऊंचे स्थानों पर रह रहे ग्रामीणों का कहना है कि पानी बढ़ने के साथ गांव की स्थिति लगातार खराब हो रही है.

मुंगेर के 28 स्कूल दूसरी जगह भेजे गए

बाढ़ का असर अब बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है. मुंगेर के कई स्कूलों में पानी घुसने के कारण पढ़ाई प्रभावित हुई है. इसे देखते हुए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने 28 बाढ़ प्रभावित स्कूलों को सुरक्षित जगहों पर मौजूद दूसरे स्कूलों में शिफ्ट करने का फैसला लिया है.

इन स्कूलों के शिक्षकों को भी संबंधित सुरक्षित स्कूलों में भेजा गया है. शिक्षक वहां योगदान देकर पढ़ाई शुरू करेंगे. यह व्यवस्था फिलहाल 10 सितंबर 2026 तक लागू रहेगी. प्रशासन की कोशिश है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बंद न हो.

करमचट डैम के प्रोटेक्शन बांध की सड़क धंसी

सासाराम के चेनारी स्थित करमचट डैम में भी पानी का दबाव देखने को मिला है. डैम के प्रोटेक्शन बांध पर बनी सड़क का एक हिस्सा पानी के दबाव से धंस गया. इसके बाद जल संसाधन विभाग की टीम अलर्ट हो गई है.

क्षतिग्रस्त सड़क को ठीक करने का काम शुरू कर दिया गया है. विभाग की टीम मौके पर नजर रख रही है, ताकि पानी के दबाव से बांध या आसपास के इलाकों में कोई बड़ी परेशानी न हो.

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कई जिलों में प्रशासन मुस्तैद

गंगा और उसकी सहायक नदियों का पानी बढ़ने से बिहार के कई हिस्सों में बाढ़ की चिंता बढ़ गई है. छपरा और रिविलगंज में लोग पानी से परेशान हैं, जबकि मुंगेर में गंगा खतरे के निशान के काफी करीब पहुंच चुकी है. पटना में पुनपुन नदी का रिंग बांध टूटने और करमचट डैम के पास सड़क धंसने से भी प्रशासन सतर्क है.

फिलहाल प्रशासन और जल संसाधन विभाग की नजर नदियों के जलस्तर पर बनी हुई है. सबसे बड़ी चिंता निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा, पानी में फंसे लोगों तक मदद पहुंचाने और बाढ़ से प्रभावित बच्चों की पढ़ाई जारी रखने की है.

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लेखक के बारे में

By परितोष शाही

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.
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