बिहार में कम बारिश, फिर भी आई भीषण बाढ़; जानिए आखिर कैसे बढ़ा नदियों का जलस्तर

बिहार में इस वर्ष 27% कम बारिश होने के बावजूद विनाशकारी बाढ़ आई. नदियों के बदले पैटर्न और जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि ने सभी को चौंका दिया है.

Bihar Flood Reason बिहार में इस वर्ष मानसून के दौरान कम बारिश के कारण सूखे जैसी स्थिति बनी रही. इसके बावजूद राज्य को भीषण बाढ़ का सामना करना पड़ा. 1 जून से 8 सितंबर के बीच बिहार में 601.1 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 27% कम है. वहीं, 1 सितंबर तक राज्य में बारिश की कमी 30% थी. इसके बावजूद अचानक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा और राज्य के कई हिस्से बाढ़ की चपेट में आ गए.

पटना और भागलपुर में गंगा नदी अपने पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) को पार कर गई. राजधानी पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.58 मीटर तक पहुंच गया, जो 2016 में दर्ज पिछले HFL 50.52 मीटर से छह सेंटीमीटर अधिक है. वहीं, भागलपुर के सुल्तानगंज में नदी का जलस्तर 36.80 मीटर तक पहुंचा, जो 2021 में दर्ज HFL 36.75 मीटर से पांच सेंटीमीटर अधिक है. आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, 9 सितंबर तक राज्य के 14 जिलों के 84 प्रभावित अंचलों, 518 पंचायतों और 2,157 गांवों में करीब 40.51 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. अब सवाल उठता है कि जब बिहार में बारिश सामान्य से 27% कम रही, तो फिर इतनी बड़ी बाढ़ आखिर कैसे आई?

बिहार में बाढ़ का बदला पैटर्न

जब बिहार में बारिश सामान्य से 27% कम रही, तो फिर इतनी बड़ी बाढ़ कैसे आई? इससे जुड़े सवाल पर उपमुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने 7 सितंबर को कहा कि इस साल बिहार में बाढ़ का पैटर्न पिछले वर्षों से अलग रहा है. उन्होंने कहा कि आमतौर पर नेपाल से बिहार में आने वाली बागमती, कमला, कोसी और गंडक जैसी नदियां पहले उफान पर आती हैं और उसके बाद गंगा का जलस्तर बढ़ता है. लेकिन इस बार गंगा का जलस्तर पहले बढ़ा और वही मुख्य चिंता का कारण बना। गंगा का जलग्रहण क्षेत्र बिहार से काफी दूर तक फैला हुआ है. ऐसे में बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश सहित ऊपरी इलाकों में हुई बारिश का पानी भी गंगा के जलस्तर को प्रभावित करता है.

गंगा के उफान से बिगड़ी बिहार की स्थिति

बिहार आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल के अनुसार प्रयागराज (इलाहाबाद) और वाराणसी के आसपास हुई बारिश तथा उसके बाद निचले इलाकों की ओर बढ़े पानी के बहाव ने गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी में अहम भूमिका निभाई. उन्होंने कहा कि दूसरी नदियों के मामले में भी पड़ोसी राज्यों से आने वाला पानी एक महत्वपूर्ण कारण रहा. इसी बीच, जब बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर हुई, तब राज्य के कुछ इलाकों में भारी बारिश भी हुई। पूर्वी चंपारण में 214.92 मिमी और सीतामढ़ी में 154.55 मिमी बारिश दर्ज की गई. हालांकि 8 सितंबर तक राज्य में कुल बारिश सामान्य से 27% कम थी, लेकिन केवल सितंबर में बारिश सामान्य से 31% अधिक दर्ज की गई.

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गंगा के जलस्तर ने बढ़ाई मुश्किल

26 अगस्त को तिब्बत में एक ग्लेशियर झील के फटने के बाद नेपाल में अचानक बाढ़ की स्थिति बनी. इसके बाद बिहार जल संसाधन विभाग ने गंडक नदी पर बने वाल्मीकिनगर बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए, जबकि उस समय नदी का जलस्तर सामान्य से नीचे था. 26 अगस्त की रात 11 बजे बैराज पर गंडक का डिस्चार्ज 1,50,200 क्यूसेक तक पहुंचा. अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक यह अपेक्षा से कम था और इसके बाद डिस्चार्ज घटने लगा। इसके बावजूद बिहार में बाढ़ की स्थिति बनी रही.इसका एक बड़ा कारण गंगा का असामान्य रूप से ऊंचा जलस्तर रहा.


बैकवाटर इफेक्ट से बिगड़ी स्थिति

बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार चौधरी के अनुसार, गंगा के बढ़े जलस्तर ने गंडक और पुनपुन जैसी नदियों पर 'बैकवाटर इफेक्ट' पैदा किया. दरअसल, इन नदियों का पानी अंततः गंगा में ही गिरता है। लेकिन जब गंगा का जलस्तर पहले से काफी ऊंचा हो जाता है, तो सहायक नदियों का पानी तेजी से गंगा में नहीं निकल पाता. इससे उनके जलस्तर पर भी दबाव बढ़ता है. झारखंड में हुई भारी बारिश से पुनपुन नदी के जलस्तर पर भी असर पड़ा.

नदियों का बढ़ा जलस्तर, बढ़ा बाढ़ का दायरा

आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल का कहना है कि गंगा बक्सर के रास्ते बिहार में प्रवेश करती है और राज्य में पूर्व की ओर बहती है. इसके कारण भोजपुर, पटना, वैशाली, सारण, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार जैसे बड़े इलाके बाढ़ के लिहाज से संवेदनशील हो जाते हैं. उन्होंने बताया कि उत्तर बिहार की प्रमुख नदियां गंडक, कोसी, बागमती और बूढ़ी गंडक हिमालय और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों से निकलकर बिहार के बेहद समतल मैदानी इलाकों में पहुंचती हैं. इस वजह से ऊपरी इलाकों में पानी बढ़ने का असर बिहार के बड़े हिस्से में दिखाई दे सकता है. इस दौरान कोसी नदी का जलस्तर भी ऊंचा बना रहा। खगड़िया के बलतारा और कटिहार के कुरसेला में कोसी खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी.

नदियों के बढ़े जलस्तर से बढ़ा संकट

गंडक नदी डुमरिया घाट और हाजीपुर में खतरे के निशान से ऊपर रही. वहीं, खगड़िया में बूढ़ी गंडक, बेनीबाद में बागमती, श्रीपालपुर में पुनपुन तथा दरौली और गंगपुर सिसवन में घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर बहती रही. अधिकारी के अनुसार, पटना के दीघा, गांधी घाट और हाथीदह समेत कई स्थानों पर गंगा खतरे के निशान से ऊपर बहती रही. मुंगेर, भागलपुर और कहलगांव में भी गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर रहा.

नदी में बाढ़ का पानी एक जगह रुकने के बजाय आगे की ओर बढ़ता रहता है. इसलिए किसी एक गेज स्टेशन पर दर्ज किया गया अधिकतम जलस्तर आगे के इलाकों में भी बाढ़ का असर बढ़ा सकता है. यही वजह है कि बाढ़ का प्रभाव उन क्षेत्रों से कहीं बड़े इलाके में दिखाई दे सकता है, जहां सबसे ज्यादा बारिश हुई थी.

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By Rajeshkumar Ojha

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