Bihar election 2020 : संसोपा के टिकट पर 1967 में विधायक बने थे हुकुमदेव

भाजपा के बुजुर्ग नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री हुकुमदेव नारायण यादव 1967 के विधानसभा चुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर विधायक बने थे.

भाजपा के बुजुर्ग नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री हुकुमदेव नारायण यादव 1967 के विधानसभा चुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर विधायक बने थे. दरभंगा जिले के केवटी रनवे सीट से गाछ सिंबल से चुनाव लड़े और कांग्रेस के आरपी राय को भारी मतों से पराजित कर दिया. हुकुमदेव बाद के 1969 और 1972 के दो विधानसभा चुनावों तक सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर ही विधायक रहे.

1964 के पहले प्रजा सोश्लिस्ट पार्टी और सोश्लिस्ट पार्टी अलग थी. 1964 में बनारस में सम्मेलन हुआ जिसमें प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के तत्कालीन नेता रामानंद तिवारी और कर्पूरी ठाकुर भी शामिल हुए. यही दोनों दलों को मिला कर संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी बनी. संशोपा ने नारा दिया- संशोपा ने बांधी गांठ- पिछड़ा पावे सौ में साठ, अंग्रेजी में काम न होगा-फिर से देश गुलाम न होगा. चुनाव में यह नारा लोकप्रिय हुआ.

पहली बार विधायक बनने के पूर्व हुकुमदेव नारायण यादव दरभंगा जिले की राजनीति में काफी सक्रिय रहे थे. बाद के दिनों में हुकुमदेव नारायण यादव भाजपा के साथ हो लिये, लेकिन जब संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से वे विधायक हुए तो विधानसभा में तत्कालीन कांग्रेसी नेता ललित नारायण मिश्र के खिलाफ सदन में आक्रामक रहते थे.

तत्कालीन मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय ने एक बार उनसे कहा कि आप जितनी बार ललित नारायण मिश्र का नाम लेते हैं उतना भगवान का लेते तो पांच पीढ़ी तक कल्याण होता. हुकुमदेव के निकट बैठे गजेंद्र प्रसाद हिमांशु ने कहा कि मुख्यमंत्री जी आप भी ललित बाबू की जगह उतनी ही बार भगवान का नाम लेते तो आपकी सात पीढ़ी का कल्याण होता.

चुनाव के दौरान विधानसभा के भीतर का यह जुमला खूब चर्चित रहा था. पूर्व डिप्टी स्पीकर गजेंद्र प्रसाद हिमांशु बताते हैं, एक बार हुकुमदेव नारायण यादव जब वोट मांगने इलाके में गये तो सामने ललित नारायण मिश्र के बेटे विजय कुमार मिश्र को सामने देख बोल पड़े- गोप और ठोप एक हो जाओ. बोलचाल में माहिर हुकुमदेव का यह जुमला भी खूब प्रचलित रहा.

posted by ashish jha

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By Prabhat khabar news desk

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