Samrat Choudhary: बच्चों और महिलाओं का गायब होना सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय है. मानव तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के साथ अब सरकार पुनर्वास पर भी जोर देगी. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि गायब बच्चों और महिलाओं को बिहार लाकर उनका पुनर्वास किया जाएगा.
मुख्यमंत्री शनिवार को पटना के ज्ञान भवन में आयोजित 'ईस्टर्न जोनल कॉन्फ्रेंस-कम-कंसल्टेशन ऑन मिसिंग एंड ह्यूमन ट्रैफिकिंग' को संबोधित कर रहे थे. सम्मेलन में मानव तस्करी और लापता बच्चों को लेकर कई अहम मुद्दों पर मंथन हुआ.
बच्चों के गायब होने को गंभीर समस्या बताया
सम्राट चौधरी ने कहा कि बच्चों का गायब होना सरकार के लिए गंभीर समस्या है. उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से बाहर जाता है तो उसके वापस लौटने की उम्मीद रहती है. लेकिन जिन्हें गायब कर दिया जाता है, उनके लौटने की उम्मीद कम हो जाती है.
उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों और महिलाओं को वापस लाना बड़ी चुनौती है. सरकार इस दिशा में गंभीरता से काम करेगी. मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि केवल रेस्क्यू करना ही काफी नहीं है. बच्चों और महिलाओं को वापस लाने के बाद उनके पुनर्वास की भी व्यवस्था करनी होगी.
'गायब बच्चों और महिलाओं को बिहार लाकर करेंगे पुनर्वास'
सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार गायब बच्चों और महिलाओं को बिहार लाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में काम करेगी.
उन्होंने कहा कि पुनर्वास सबसे बड़ी चुनौती है. इसके लिए सरकार की ओर से जरूरी कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने सम्मेलन में हुए मंथन को भी महत्वपूर्ण बताया. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सम्मेलन में जो सुझाव और निष्कर्ष सामने आएंगे, सरकार उन पर गंभीरता से विचार करेगी.
मानव तस्करी रोकने के लिए राज्यों में बेहतर तालमेल जरूरी
मानव तस्करी का नेटवर्क अक्सर एक राज्य तक सीमित नहीं रहता. ऐसे में अलग-अलग राज्यों की पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है.
सम्मेलन में बिहार के साथ झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के प्रतिनिधि भी शामिल हुए. लापता बच्चों की पहचान, उनकी तलाश और तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई को लेकर चर्चा हुई.
कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के जज ए. अमानुल्लाह, पटना हाईकोर्ट के जज राजीव रंजन प्रसाद, मोहित कुमार शाह, सुप्रीम कोर्ट की सीनियर वकील मुक्ता गुप्ता और बिहार के महाधिवक्ता एसडी संजय ने भी अपने विचार रखे.
'कर्मभूमि से जन्मभूमि आने का समय आ गया'
मानव तस्करी के मुद्दे के साथ मुख्यमंत्री ने बिहार से होने वाले पलायन को भी जोड़कर देखा. उन्होंने कहा कि अब कर्मभूमि से जन्मभूमि बिहार आने का समय आ गया है.
सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार की बड़ी आबादी रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाती रही है. अगर राज्य में रोजगार और उद्योग के अवसर बढ़ेंगे तो लोगों को बाहर जाने की जरूरत कम होगी. उन्होंने कहा कि बिहार में उद्योग आएंगे तो लोग यहां स्थिर होंगे.
'बिहार में इंडस्ट्री आएगी, तभी लोग स्थिर होंगे'
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में बड़े निवेश की तैयारी चल रही है. निवेशकों की ओर से स्टील और न्यूक्लियर प्लांट जैसे क्षेत्रों में निवेश की सहमति की बात भी उन्होंने कही.
उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में बिहार में बड़े पैमाने पर निवेश होगा. उनका कहना था कि उद्योग और रोजगार बढ़ने से बिहार के लोगों को अपने राज्य में ही बेहतर अवसर मिलेंगे.
बिहार से बाहर रहने वालों को लेकर भी कही बड़ी बात
सम्राट चौधरी ने जन वितरण प्रणाली के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि बिहार से बाहर दूसरे राज्यों में अब करीब छह लाख लोग ही राशन उठा रहे हैं. उनके मुताबिक, इसमें कुछ और लोगों को जोड़कर यह संख्या करीब साढ़े सात लाख तक हो सकती है.
मुख्यमंत्री के अनुसार, इससे यह संकेत मिलता है कि बिहार से बाहर रहने वाले लोगों की संख्या में कमी आई है.
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बाढ़ और रोजगार की चुनौती का भी किया जिक्र
सम्राट चौधरी ने बिहार की भौगोलिक चुनौतियों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि राज्य का एक बड़ा हिस्सा बाढ़ से प्रभावित होता है. खासकर उत्तर बिहार में बाढ़ की समस्या गंभीर रही है.
उन्होंने गंगा, गंडक और कोसी जैसी नदियों को व्यवस्थित करने की जरूरत बताई. मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार बाढ़ की समस्या को कम करने के लिए भी काम कर रही है.
'कोटा में पढ़ने वाला और पढ़ाने वाला दोनों बिहारी'
मुख्यमंत्री ने बिहार के युवाओं की क्षमता का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कोटा में पढ़ने वाले और पढ़ाने वाले दोनों बिहारी हैं.
उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में अधिकारी बिहार और उत्तर प्रदेश से हैं. उनके मुताबिक, बिहार में ही युवाओं के लिए बेहतर शिक्षा और रोजगार का माहौल तैयार करने की कोशिश हो रही है.
क्या है सरकार का फोकस?
सम्राट चौधरी के संबोधन से सरकार की प्राथमिकता के तीन पहलू सामने आए. पहला, लापता बच्चों और महिलाओं को तलाशना. दूसरा, मानव तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई करना. और तीसरा, रेस्क्यू किए गए लोगों का पुनर्वास करना.
सरकार का जोर यह भी है कि बिहार में रोजगार और उद्योग बढ़ें. इससे लोगों को रोजगार के लिए बाहर जाने की जरूरत कम हो. सम्मेलन में राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया.
