Bihar Sugar Mill: बिहार में लंबे समय से बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने की कोशिश तेज हो गई है. मिलों के रास्ते में सबसे बड़ी अड़चन जमीन से जुड़े कानूनी विवाद हैं. अब सरकार ने इन मामलों को तेजी से सुलझाने की तैयारी शुरू कर दी है.
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल की अध्यक्षता में बुधवार को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई. इसमें गन्ना उद्योग मंत्री संजय पासवान भी मौजूद रहे. बैठक में साफ कहा गया कि विभागीय लापरवाही की वजह से उद्योग के विकास में रुकावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
बंद चीनी मिलों की जमीन का रिकॉर्ड खंगाला गया
बैठक में पूर्वी चंपारण के बारा चकिया, मोतिहारी की मेसर्स हनुमान शुगर एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड और गोपालगंज की सासामुसा चीनी मिल से जुड़ी जमीनों की स्थिति की समीक्षा की गई.
अधिकारियों से अदालतों में लंबित मामलों, अब तक हुई कार्रवाई और कोर्ट में रखे गए दस्तावेजों की जानकारी ली गई. सरकार का फोकस अब इन मामलों को जल्द से जल्द निपटाने पर है.
जमीन की प्रकृति और मालिकाना हक की होगी जांच
राजस्व मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जमीन की प्रकृति, स्वामित्व और राजस्व रिकॉर्ड का सही तरीके से मिलान किया जाए.
सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में सरकार का पक्ष मजबूती से अदालत के सामने रखने को कहा गया है. वहीं, रैयती जमीन के मामलों में भी स्पष्ट और सही रिकॉर्ड प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है.
सरकार का मानना है कि अगर जमीन के विवाद समय पर खत्म हो जाएं, तो बंद मिलों को फिर से शुरू करने या वहां नए औद्योगिक प्रोजेक्ट लगाने का रास्ता साफ हो सकता है.
बारा चकिया की 1,008 एकड़ जमीन का मामला
पूर्वी चंपारण के बारा चकिया चीनी मिल की करीब 1,008 एकड़ जमीन और परिसंपत्तियों से जुड़े मामलों की समीक्षा की गई. इसमें बेतिया राज की जमीन भी शामिल है.
यह मामला लंबे समय से कानूनी पेच में फंसा हुआ है. अब सरकार इस मामले की प्रभावी पैरवी कर जल्द समाधान की कोशिश करेगी.
हनुमान शुगर मिल की जमीन भी विवाद में
मोतिहारी स्थित मेसर्स हनुमान शुगर एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड की जमीन भी कानूनी प्रक्रिया में फंसी है. मिल से जुड़ी 13 बीघा 6 कट्ठा 13 धूर फ्रीहोल्ड जमीन और बेतिया राज की 24 बीघा 15 कट्ठा 2 धूर लीजहोल्ड जमीन को लेकर विवाद है.
सासामुसा चीनी मिल का भी यही हाल
गोपालगंज की सासामुसा चीनी मिल की जमीन से जुड़े मामलों पर भी बैठक में चर्चा हुई. यहां 44 बीघा 8 कट्ठा 7 धूर स्वामित्व वाली जमीन और हथुआ राज की 21 बीघा 19 कट्ठा 9 धूर मुकर्ररी लीज जमीन से जुड़े विवाद सामने आए हैं. सरकार अब इन मामलों की कानूनी स्थिति की समीक्षा कर उन्हें जल्द सुलझाने की दिशा में काम करेगी.
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किसानों की आय बढ़ाने की भी तैयारी
चीनी मिलों से जुड़े जमीन विवादों के साथ सरकार गन्ने की खेती को भी बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है. गन्ना उद्योग विभाग किसानों को वर्षाकालीन गन्ना रोपाई के लिए आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा.
विभाग के मुताबिक बारिश के मौसम में लगाया गया गन्ना अगले साल फरवरी तक बीज के लिए तैयार हो सकता है. इसके बाद उसी की खूंटी से नवंबर-दिसंबर तक दूसरी फसल भी ली जा सकती है.
इससे किसानों को एक ही रोपाई से बीज उत्पादन और रैटून फसल के जरिए अतिरिक्त आमदनी का मौका मिल सकता है.
दोनों विभाग मिलकर करेंगे काम
चीनी उद्योग को फिर से गति देने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग और गन्ना उद्योग विभाग मिलकर काम करेंगे. दोनों विभागों के सचिवों को सभी लंबित मामलों की अपडेट सूची तैयार करने और नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है.
