Bihar Assistant Professor: बिहार के राज्य विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. बिहार लोक भवन ने मौजूदा भर्ती व्यवस्था की समीक्षा और इसमें व्यापक सुधार के सुझाव देने के लिए एक समिति का गठन किया है. यह फैसला 24 अगस्त 2026 को बिहार लोक भवन में राज्यपाल और ऑल पीएचडी होल्डर्स एंड रिसर्चर्स एसोसिएशन के बैनर तले आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच हुए समझौते के बाद लिया गया है.
चार सदस्यीय समिति में कौन-कौन शामिल
बिहार लोक भवन की अधिसूचना के मुताबिक समिति में चार सदस्यों को शामिल किया गया है. इसमें रिटायर्ड IAS अमरजीत सिन्हा, रिटायर्ड IAS संजय कुमार, पद्मश्री प्रो. एच.सी. वर्मा और डॉ. पी.के. रॉय शामिल हैं. राज्यपाल सचिवालय में विश्वविद्यालय मामलों के अतिरिक्त सचिव संजय कुमार, IAS समिति के सदस्य-सचिव के तौर पर काम करेंगे.
विश्वविद्यालयों से मांगी जाएगी पूरी जानकारी
समिति सिर्फ मौजूदा व्यवस्था पर चर्चा तक सीमित नहीं रहेगी. इसे विश्वविद्यालयों, सरकारी विभागों, वैधानिक संस्थाओं और दूसरे संस्थानों से जरूरी जानकारी, रिकॉर्ड और दस्तावेज लेने का अधिकार दिया गया है. इसके अलावा अलग-अलग हितधारकों और विशेषज्ञों से लिखित सुझाव भी लिए जाएंगे. समिति जरूरत के अनुसार कुलपतियों, वरिष्ठ शिक्षाविदों, विषय विशेषज्ञों, प्रशासकों और दूसरे लोगों से भी राय ले सकती है.
90 दिनों में देनी होगी रिपोर्ट
समिति को अपनी जांच और विचार-विमर्श पूरा करने के बाद 90 दिनों के भीतर बिहार लोक भवन को रिपोर्ट देनी है. इस रिपोर्ट में समिति अपनी जांच के निष्कर्षों के साथ ऐसे सुझाव भी देगी, जिन पर आगे कार्रवाई की जा सके. छात्रों की मांगों के अलावा दूसरे जुड़े हुए मुद्दों पर भी समिति अपनी सिफारिश दे सकती है.
21 दिन के आमरण अनशन के बाद बनी समिति
ऑल पीएचडी होल्डर्स एंड रिसर्च स्कॉलर्स एसोसिएशन ऑफ बिहार के प्रदेश संयोजक कुमुद पटेल के मुताबिक, सहायक प्राध्यापक नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार समेत कई मांगों को लेकर उन्होंने 21 दिनों तक आमरण अनशन किया था. इस आंदोलन के दौरान अतिथि शिक्षकों की सेवा अवधि 65 वर्ष किए जाने की मांग भी उठाई गई थी. उनका कहना है कि इससे लंबे समय से विश्वविद्यालयों में सेवा दे रहे अतिथि शिक्षकों के हितों की रक्षा हो सकेगी.
24 अगस्त के समझौते के बाद आगे बढ़ा फैसला
24 अगस्त को राज्यपाल और आंदोलनरत छात्रों के बीच हुए समझौते में सहायक प्राध्यापक नियुक्ति प्रक्रिया की समीक्षा और उसमें व्यापक सुधार के लिए समिति बनाने पर सहमति बनी थी. अब उसी समझौते के आधार पर समिति का औपचारिक गठन किया गया है. आंदोलन से जुड़े कुमुद पटेल ने इसे पीएचडी धारकों, शोधार्थियों, अतिथि शिक्षकों और उच्च शिक्षा के अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया है.
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नियुक्ति व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग
कुमुद पटेल का कहना है कि उनका आंदोलन सिर्फ व्यक्तिगत नियुक्ति तक सीमित नहीं है. उनकी मांग विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, न्यायपूर्ण और बेहतर बनाने की है. उन्होंने उम्मीद जताई है कि समिति सभी पक्षों की समस्याओं और मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और उच्च शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ठोस सुझाव देगी.
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