पटना से सीतामढ़ी तक, बिहार के इन जिलों में फर्स्ट फेज में खुलेंगे हाइटेक नंद घर, सोलर बिजली और टीवी से होंगी लैस

Bihar Anganwadi Transformation: बिहार के 1000 आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक नंद घर बनाया जाएगा. वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल की पहल से बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाई, पोषण, स्वास्थ्य जांच, साफ पानी और सोलर बिजली मिलेगी.

Bihar Anganwadi Transformation: बिहार में बच्चों के पोषण, शुरुआती शिक्षा और महिला सशक्तीकरण को लेकर एक बड़ी पहल होने जा रही है. वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल बिहार के 1000 आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक नंद घर के रूप में विकसित करेंगे. इस योजना के तहत पहले चरण में पटना, गया, पूर्णिया, सीतामढ़ी, जमुई और शेखपुरा समेत राज्य के अधिकतर जिलों से पांच से 10 आंगनबाड़ी केंद्रों को चयनित किया जायेगा.

क्या सुविधा मिलेगी

इसके लिए वैसे आंगनबाड़ी केंद्रों का चयन किया गया है, जिनके पास अपना भवन है. नंदघर में बच्चों के साथ-साथ गर्भवती और धात्री महिलाओं के लिए पैक्ड न्यूट्रिशन और मोबाइल हेल्थ वैन के जरिए नियमित स्वास्थ्य जांच की सुविधा मिलेगी. दोपहर में बच्चों की पढ़ाई के बाद शाम के वक्त इन्हीं केंद्रों का इस्तेमाल स्थानीय महिलाओं को रोजगारपरक कौशल विकास देने के लिए किया जायेगा.

आइसीडीएस की निदेशक डॉ प्रीति ने बताया कि अनिल अग्रवाल ने सैद्धांतिक रूप से 1000 आंगनबाड़ी केंद्रों को नंदघर के रूप में विकसित करने की सहमति दी है. बिहार में एक लाख 14 हजार 548 आंगनबाड़ी केंद्र हैं. इनमें 52 लाख से अधिक बच्चे रजिस्टर्ड हैं.

नंदघर में क्या होगा खास

पारंपरिक आंगनबाड़ी के उलट नंदघर में बच्चों के लिए टीवी , ऑडियो-विजुअल टूल्स और आधुनिक खिलौनों के जरिए खेल-खेल में शिक्षा दी जायेगी.

24 घंटे सोलर बिजली और शुद्ध पानी

इन केंद्रों को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाया जायेगा. बिजली के लिए सोलर पैनल लगेंगे और बच्चों व माताओं के लिए वॉटर प्यूरीफायर से साफ पेयजल की व्यवस्था होगी.

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क्या है नंदघर मॉडल

नंदघर वेदांता रिसोर्सेज और अनिल अग्रवाल फाउंडेशन द्वारा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सहयोग से शुरू की गयी एक राष्ट्रीय पहल है. पारंपरिक और पुराने ढर्रे पर चल रहे सरकारी आंगनबाड़ी केंद्रों का एक कॉर्पोरेट और मॉडर्न रूप इसका मकसद है.

ग्रामीण और जमीनी स्तर पर बच्चों की शुरुआती शिक्षा, स्वास्थ्य और महिलाओं के सशक्तीकरण के पूरे ढांचे को पूरी तरह से हाइटेक और वर्ल्ड क्लास बनाया जायेगा . नंदघर में तीन से छह साल के बच्चों के लिए प्ले स्कूल जैसी व्यवस्था होगी.

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By Paritosh shahi

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 4 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.

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