Bihar News: बिहार की नदियों में सालों से जमा गाद अब सरकार के लिए कमाई का जरिया भी बनेगी और बाढ़ से राहत का रास्ता भी. खान एवं भूतत्व विभाग मानसून के बाद राज्य की 19 प्रमुख नदियों का वैज्ञानिक सर्वे कराएगा.
सर्वे में नदी की तलहटी में जमा मिट्टी और बालू की मात्रा का पता लगाया जाएगा. साथ ही यह भी देखा जाएगा कि इसमें से कितनी सामग्री निकाली जा सकती है और उसका इस्तेमाल कहां किया जा सकता है.
पहले सर्वे, फिर तैयार होगी जिला सर्वे रिपोर्ट
सरकार सीधे नदियों से गाद निकालने का काम शुरू नहीं करेगी. पहले वैज्ञानिक तरीके से सर्वे कराया जाएगा. इसमें नदी के अलग-अलग हिस्सों में जमा गाद की स्थिति का आकलन होगा. सर्वे के आधार पर संबंधित जिलों में जिला सर्वे रिपोर्ट (DSR) तैयार की जाएगी. रिपोर्ट को मंजूरी मिलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू होगी.
जिला समाहर्ता के जरिए होगी गाद की नीलामी
रिपोर्ट को मंजूरी मिलने के बाद नदी से निकाली जाने वाली उपयोगी मिट्टी और बालू की नीलामी कराई जाएगी. यह प्रक्रिया संबंधित जिला समाहर्ता के माध्यम से होगी. सरकार को उम्मीद है कि इससे बड़ी मात्रा में राजस्व भी मिल सकता है. वहीं, नदी की तलहटी से अतिरिक्त गाद हटने पर जलधारण क्षमता बढ़ेगी.
इन 19 नदियों पर होगी नजर
सरकार ने फिलहाल 19 प्रमुख नदियों को गाद प्रबंधन के लिए चिन्हित किया है. इनमें गंगा, कोसी, गंडक, बागमती, बूढ़ी गंडक, कमला-बलान, महानंदा, सिकरहना, बलान, लालबकिया, घोघा, पंचाने, सकरी, बाया, नून, कदाने, मसान, परमान और सुरसर शामिल हैं.
सर्वे में यह पता लगाया जाएगा कि किस नदी के किस हिस्से में कितनी गाद जमा है. इसके बाद यह तय होगा कि कितनी मात्रा में गाद निकाली जा सकती है.
सड़क और तटबंध बनाने में काम आएगी गाद
नदियों से निकलने वाली उपयोगी मिट्टी और बालू को बेकार नहीं जाने दिया जाएगा. इसका इस्तेमाल सड़क निर्माण, तटबंध बनाने, भराई और दूसरी बुनियादी परियोजनाओं में किया जा सकेगा.
इससे निर्माण कार्यों के लिए स्थानीय स्तर पर सामग्री उपलब्ध होगी. साथ ही नदी का प्रवाह भी बेहतर होने की उम्मीद है.
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बूढ़ी गंडक में दिख रहे गाद के टीले
समस्तीपुर में बूढ़ी गंडक नदी इसका उदाहरण है. नदी में अभी जलस्तर बढ़ा हुआ है. इसके बावजूद बीच धारा और किनारों पर गाद के बड़े टीले दिखाई देते हैं.
इन टीलों पर घास उगने के कारण ये छोटे-छोटे टापू जैसे नजर आते हैं. गाद के कारण नदी की गहराई कम होने से बरसात में पानी फैलने और जलनिकासी प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है.
समस्तीपुर के जिला खनन पदाधिकारी शंभू प्रसाद साहू ने बताया कि जल संसाधन विभाग के साथ समन्वय कर योजना पर काम किया जाएगा. जिला पदाधिकारी के स्तर पर टीम बनाई जाएगी. टीम नदी में जमा गाद का आकलन कर रिपोर्ट तैयार करेगी.
बाढ़ से राहत और सरकार की कमाई, दोनों का प्लान
नदियों में गाद जमा होना बिहार के लिए पुरानी समस्या है. तलहटी उथली होने से नदियों की पानी रखने की क्षमता घटती है. मानसून के दौरान इसका असर बाढ़ और जलभराव के रूप में दिखाई देता है.
सरकार की इस योजना से दो बड़े फायदे होने की उम्मीद है. गाद हटने से नदियों की गहराई और जलधारण क्षमता बढ़ेगी. इससे बाढ़ और जलभराव का खतरा कम हो सकता है.
दूसरी ओर, निकाली गई उपयोगी मिट्टी और बालू की नीलामी से सरकार को राजस्व मिलेगा. यानी जिस गाद को अब तक समस्या माना जाता था, उसका इस्तेमाल विकास कार्यों में भी होगा और उससे सरकारी खजाने की आमदनी भी बढ़ेगी.
आगे दूसरी नदियों तक बढ़ सकता है दायरा
फिलहाल 19 नदियों से योजना शुरू की जा रही है. सर्वे और इसके नतीजों के आधार पर आगे राज्य की दूसरी नदियों में भी गाद प्रबंधन की प्रक्रिया लागू की जा सकती है. सरकार का फोकस अब नदियों की सफाई के साथ उनके संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर भी है.
