Bihar Ration Card: बिहार में राशन कार्ड का नया लक्ष्य अब सिर्फ सरकारी आंकड़ों का मामला नहीं रहा. 11,04,425 नए राशन कार्ड जोड़ने के अभियान ने खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग और बिहार आपूर्ति सेवा संघ को आमने-सामने ला दिया है. आपूर्ति अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि संसाधनों के बिना तय किया गया यह लक्ष्य जमीन पर उतारना मुश्किल है.
अधिकारियों को हो रही ये परेशानी
संघ का आरोप है कि अधिकारियों से कंप्यूटर, स्कैनर, इंटरनेट और विभागीय वाहन जैसी जरूरी सुविधाओं के बिना ही काम पूरा कराने का दबाव बनाया जा रहा है. दावा है कि प्रिंटआउट, दस्तावेजों की जांच और फील्ड विजिट के लिए गाड़ी तक का खर्च कई जगह अधिकारियों को अपनी जेब से उठाना पड़ रहा है. यह खर्च औसतन 250 से 300 रुपये प्रति कार्ड तक पहुंचने का दावा किया गया है.
पुराने आंकड़ों से निकला 11 लाख का लक्ष्य?
आपूर्ति सेवा संघ के अध्यक्ष के मुताबिक लक्ष्य किसी नए सर्वे के आधार पर नहीं, बल्कि उपलब्ध आंकड़ों और गणितीय फॉर्मूले से तय किया गया है. विभागीय आंकड़ों के अनुसार एनएफएसए की 8.71 करोड़ लाभुकों की अधिकतम सीमा में से 8.24 करोड़ लोग पहले ही आच्छादित हैं.
ऐसे में 46.93 लाख की शेष सीलिंग को 4.25 के औसत परिवार आकार से भाग देकर करीब 11.04 लाख नए राशन कार्ड का लक्ष्य निकाला गया है. संघ का सवाल है कि जब आधार 15 साल पुराने जनसंख्या आंकड़े हैं, तो मौजूदा जरूरत का आकलन कैसे होगा?
एक कॉल और जीपीएस पर भी विवाद
संघ ने 17 जुलाई को सीयूजी फोन पर कॉल रिसीव न होने या जीपीएस लाइव लोकेशन नहीं मिलने के आधार पर अधिकारियों का एक दिन का वेतन काटे जाने पर भी आपत्ति जताई है. अब विरोध की शुरुआत हो चुकी है. 20 से 26 अगस्त तक अधिकारी और कर्मचारी काला बिल्ला लगाकर काम करेंगे. फिलहाल काम प्रभावित नहीं होगा.
लेकिन मांगों का समाधान नहीं हुआ तो संघ ने सामूहिक अवकाश और उसके बाद पूर्ण हड़ताल की चेतावनी दी है. विभाग, मुख्य सचिव और मंत्री को आंदोलन की पहले ही सूचना भी दी जा चुकी है. अब देखना होगा कि राशन कार्ड का यह लक्ष्य सरकार और कर्मचारियों के बीच समाधान तक पहुंचता है या आंदोलन की राह पर आगे बढ़ता है.
