सदर अस्पताल में मर चुकी है मानवता

आरा : सदर अस्पताल में शायद मानवता फिर दम तोड़नेवाली है. वो भी एक नहीं, दो-दो. एक 30 वर्षीय पीरो के युवक की जान खतरे में है, तो दूसरा महिला की भी जान जोखिम में पड़ी हुई है. अस्पताल में कार्यरत कर्मियों को अफसोस है, लेकिन अस्पताल प्रशासन को कुछ नहीं. उसकी चुप्पी इन्हें दम […]

आरा : सदर अस्पताल में शायद मानवता फिर दम तोड़नेवाली है. वो भी एक नहीं, दो-दो. एक 30 वर्षीय पीरो के युवक की जान खतरे में है, तो दूसरा महिला की भी जान जोखिम में पड़ी हुई है. अस्पताल में कार्यरत कर्मियों को अफसोस है, लेकिन अस्पताल प्रशासन को कुछ नहीं.
उसकी चुप्पी इन्हें दम तोड़ने के लिए मजबूर कर रही है. हुआ यह कि पांच दिनों पहले पीरो पुलिस ने वाहन के धक्के से जख्मी 30 वर्षीय युवक को सदर अस्पताल में लाकर बेहोशी की हालत में लाकर भरती कराया. इलाज करने के नाम पर खानापूर्ति भी यदि हुई रहती, तो और बात थी. मगर यहां मानवता को तो दम तोड़ने के लिए विवश करना था. इमरजेंसी के ठीक सामने तथा मेडिकल वार्ड के बगल में लावारिस पड़ा हुआ है. उसके शरीर में कीड़े पड़ चुके हैं. सिर पर जख्म का निशान है. यह सब प्रतिदिन आवागमन करनेवाले अधिकारी, चिकित्सक, कर्मचारी, मरीज तथा उनके परिजन आते-जाते अक्सर देखे जाते हैं.
आज अस्पताल प्रशासन ने नहीं, लेकिन रास्ते से जा रहे एक मरीज के परिजनों ने मक्खियां शरीर पर भिनभिनाते देख कपड़ा जरूर डाल दिया, ताकि वह चैन से कुछ पल बीता सके. ऐसी ही एक और मार्मिक व सच्ची घटना जीरिया देवी के साथ घटी है. धोबहा के तेतरिया गांव की रहनेवाली शंभु ठाकुर की पत्नी जीरिया देवी गत पांच दिनों से पड़ी हुई है. इसकी स्थिति इलाज के अभाव में खराब होती जा रही है. उसके पैर में जख्म के निशान बड़े आसानी से देखे जा सकते हैं. मगर क्या मजाल अस्पताल प्रशासन की इन जरूरतमंदों को इलाज करे.

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