घंटों धूप में खड़ी रहती हैं प्रसूति महिलाएं
आरा : सदर अस्पताल में जननी बाल सुरक्षा योजना के तहत लाभ लेने के लिए आने वाली महिलाओं को परेशानी झेलनी पड़ती है. इस योजना के लिए बनाये गये कार्यालय के पास अस्पताल प्रशासन द्वारा न तो शेड की व्यवस्था की गयी है और न ही बैठने के लिए कुर्सियों की व्यवस्था की गयी है. […]
आरा : सदर अस्पताल में जननी बाल सुरक्षा योजना के तहत लाभ लेने के लिए आने वाली महिलाओं को परेशानी झेलनी पड़ती है. इस योजना के लिए बनाये गये कार्यालय के पास अस्पताल प्रशासन द्वारा न तो शेड की व्यवस्था की गयी है और न ही बैठने के लिए कुर्सियों की व्यवस्था की गयी है. इससे सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. एक तरफ सरकार महिलाओं को सुविधा देने के लिए प्रसव के बाद तथा प्रसव के पूर्व सहायता राशि देती है.
वहीं, दूसरी तरफ कार्यालय के पास सुविधा नाम की कोई चीज नहीं है. महिलाओं को इस विशेष परिस्थिति में घंटों खड़ा रह कर आवेदन देने तथा अपनी बारी का इतंजार करना पड़ता है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत सरकार ने ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए जननी सुरक्षा योजना की शुरुआत की थी, पर स्थानीय स्तर पर लाल फीताशाही व लापरवाही के कारण महिलाओं को वांछित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं. इससे महिलाओं को काफी परेशानी हो रही है.
12 अप्रैल, 2005 को शुरू की गयी थी योजना : 12 अप्रैल, 2005 को जननी सुरक्षा योजना की शुरुआत की गयी थी. गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान मिलने वाले भोजन सहित अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की थी. सरकार ने संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए इस योजना की शुरुआत की थी. इसके लिए प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था की गयी थी, ताकि जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ रह सकें व कुपोषण का शिकार न बन पाएं.
सदर अस्पताल में नहीं है संरचनात्मक सुविधा
सरकार के लाख प्रयास के बाद भी गर्भवती महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर सुविधा नहीं दी जा रही है. महिलाओं के लिए बैठने की व्यवस्था नहीं की गयी है. वहीं किसी तरह का शेड नहीं लगाया गया है. इस कारण महिलाओं को गर्मी के दिनों में कड़ी धूप में व बरसात के दिनों में बारिश में खड़ा रहकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है.
सदर अस्पताल में काफी परेशानी होती है. सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता राशि लेने में काफी कठिनाई होती है. कर्मचारियों द्वारा मनमाने ढंग से काम किया जाता है तथा उनका व्यवहार भी ठीक नहीं है.
गंगोत्री देवी, प्रसूति
समय पर कर्मचारियों की लापरवाही व मनमानी के कारण राशि नहीं मिल पाती है. इससे काफी परेशानी होती है. सरकार द्वारा जिस लक्ष्य से इस योजना की शुरुआत की गयी थी, वह लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है.
बेबी देवी, प्रसूति
गर्मी में धूप में खड़ा रहना पड़ता है. गर्भवती महिलाओं को सुविधा के लिए योजना चलायी जा रही है, पर शेड की कमी से घंटों धूप में खड़ा रहने से उनके तथा शिशु के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.
आशा देवी, प्रसूति
आवेदन जमा करने तथा राशि मिलने में काफी परेशानी होती है. संबंधित कर्मियों द्वारा परेशान किया जाता है. वहीं, इसके लिए निर्मित कार्यालय के पास शेड व बैठने की व्यवस्था नहीं होने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है.
सुधा देवी, प्रसूति
शेड का निर्माण नहीं हो पाया है. इसके लिए विभाग को लिखा गया है. जैसे ही स्वीकृति मिलेगी, शेड का निर्माण किया जायेगा. महिलाओं की परेशानी दूर करने के लिए हर संभव प्रयास किया जायेगा.
डॉ रास बिहारी सिंह, सिविल सर्जन
माता व शिशु मृत्यु दर में कमी लाने का था लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य माता एवं शिशु के मृत्यु दर में कमी लाने के लिए इस योजना की शुरुआत की गयी. गरीब महिलाओं के गर्भवती होने के दौरान पौष्टिक आहार की कमी के कारण काफी संख्या में शिशु व गर्भवती महिलाओं की मौत हो जाती थी. इस कारण जिले में माता एवं शिशु मृत्यु दर बहुत अधिक था, जिसे नियंत्रित करने के लिए सरकार ने गरीब महिलाओं को सहायता के लिए योजना की शुरुआत की थी.