परेशानी . मरीजों को धूप में खड़ा होकर दिखाने के लिए पंजीकरण व दवा लेनी पड़ती है
सहार : जिले से 40 किलोमीटर दूर सहार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का घोर अभाव है, जिसके कारण मरीज को हल्की परेशानी होने के बाद अच्छे इलाज के लिए आरा भेजा जाता है, जिसमें कई मरीज की जान लंबी दूरी एवं अच्छे इलाज के अभाव में चली जाती है. अगर इस पर वरीय पदाधिकारियों के द्वारा पहल की जाती,
तो सहार में भी मरीजों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का उचित लाभ मिल सकता है. बता दें कि सहार स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 2016 में 30 बेडवाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना की गयी थी, जिसका उद्घाटन तरारी विधायक सुदामा प्रसाद ने किया था. इसके बाद ग्रामीणों मे खुशी के माहौल था, लेकिन प्रशासनिक दांव- पेच एवं स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी की मनमानी के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का लाभ मरीजों को अब तक नहीं मिल पा रहा है. बता दें कि सहार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन क्षतिग्रस्त होना शुरू हो गया है, लेकिन मरीज को इसका लाभ अब भी नहीं मिल पा रहा है.
यहां पर मरीजों को कड़ी धूप में खड़ा होकर दिखाने के लिए पंजीकरण एवं दवा लेना पड़ता है. साथ ही प्रसव के लिए आने पर सतरंगी चादर तो दूर की बात है बेड खाली होने के बाद भी मिलना मुश्किल रहता है. इसके कारण मरीज अस्पताल प्रांगण में जमीन पर लिटाया जाता है, जिसके कारण मरीजों मे स्वास्थ्य के पदाधिकारियों के प्रति आक्रोश व्याप्त रहता है, वहीं सहार में हर माह सौ से ऊपर प्रसव कराया जाता है, लेकिन अब तक महिला चिकित्सक की व्यवस्था नहीं करायी गयी है, यहां प्रसव के काम एएनएम पर ही निर्भर रहता है, जिससे मरीजों में प्रसव के दौरान भय की स्थिति उत्पन्न रहती है. स्वास्थ्य केंद्र में संसाधनों की कमी भी देखने को मिलती है.
यहां मरीजों को बैठने एवं कर्मियों को कार्य करने के लिए टेबल तक की व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण मरीजों को मिलनेवाले बेड, कर्मियों की टेबल बनी हुई है. वहीं प्रभारी की उदासीनता के कारण यक्ष्मा जांच घर बराबर बंद मिलती है, जिससे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को नहीं मिल रही हैं सुविधाएं
नहीं बदली जाती है सतरंगी चादर
अस्पताल में सरकार की योजना के अनुसार प्रतिदिन अलग रंग की चादर बदलने की तो बात दूर है. कुव्यवस्था का आलम यह है कि मरीजों को बेड पर चादर ही नहीं दिया जाता है. कुछ बेड पर चादर होता भी है, तो फटी पुरानी चादर रहता है. इससे मरीजों को काफी परेशानी होती है. गरमी में तो मरीज गरमी को झेल नहीं पाते हैं.
आठ की जगह चार डॉेक्टर ही है कार्यरत
सरकार द्वारा अस्पताल में मरीजों को देखने के लिए आठ चिकित्सकों का पद स्वीकृत है, पर हालात यह है कि अस्पताल में महज आधे चिकित्सक ही कार्यरत है. इससे प्रखंड के मरीजों का हाल बुरा है. मरीज चिकित्सक के अभाव में बाहर जाते है, जिससे उनको काफी परेशानी होती है. इसे लेकर मरीजों में काफी मायूसी है.
नहीं होती है यक्ष्मा मरीज की जांच
यक्ष्मा काफी भयावह रोग है. यह समाज में काफी लोगों को परेशान करता है, पर अस्पताल में इसकी जांच की व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीजों को आरा या अन्य जगहों पर जाना पड़ता है, जिससे मरीजों को काफी आर्थिक क्षति उठानी पड़ती है. इससे गरीब मरीजों को काफी परेशानी होती है.
अस्पतालों में नहीं है महिला चिकित्सक
सरकार द्वारा महिला सशक्तीकरण की बात की जाती है. महिलाओं के विकास पर सरकार का काफी जोर है, पर अस्पताल में सरकार की यह योजना औंधे मुंह पड़ी है. महिला चिकित्सक के अभाव में प्रसूति का काम एएनएम द्वारा किया जाता है, जो महिलाओं तथा बच्चों के लिए खतरों से खाली नहीं है. इस कुव्यवस्था से महिला मरीजों में काफी निराशा है.
चिकित्सकों के कुल स्वीकृत पद08
कुल कार्यरत चिकित्सक04
पुरुष चिकित्सक04
संविदा चिकित्सक0
एएनएम8
संविदा एएनएम16
प्रसूति बेड6
कुल स्टॉफ43
आउटडोर दवा33
इनडोर78
उप केंद्र14
अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र01
एंबुलेंस01
