बाइपास थाना में निलंबन के बाद भी वसूली की शिकायतें क्यों? भागलपुर पुलिस पर उठे सवाल

भागलपुर के बाइपास थाने में पिछले तीन महीनों में कई पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई है, फिर भी वसूली और कार्यप्रणाली की शिकायतें खत्म नहीं हो रही हैं. यह गंभीर सवाल उठाता है कि व्यवस्था की निगरानी में कहां कमी है.

Bhagalpur Bypass Police Station: भागलपुर का बाइपास थाना पिछले तीन महीनों से लगातार पुलिस विभाग की कार्रवाई के केंद्र में है. जून से अगस्त 2026 के बीच थाना प्रभारी से लेकर प्रभारी एएसआइ तक पर कार्रवाई हो चुकी है. किसी पर ट्रक चालकों से कथित अवैध वसूली का आरोप लगा, तो किसी का नाम वायरल ऑडियो से जुड़ा. 20 अगस्त को प्रभारी एएसआइ को मवेशी लदे वाहन को उचित जांच और सत्यापन के बिना छोड़ने के आरोप में निलंबित किया गया.

कार्रवाई के बावजूद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बाइपास थाने से जुड़ी वसूली और कार्यप्रणाली की शिकायतें बार-बार क्यों सामने आ रही हैं?

यह सवाल इसलिए भी अहम है, क्योंकि एक के बाद एक पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के बाद भी थाने की छवि को लेकर लोगों की शिकायतें खत्म नहीं हुई हैं.

तीन महीने में एक के बाद एक कार्रवाई

जून 2026 में तत्कालीन थाना प्रभारी सुमन कुमार को ट्रक चालकों से अवैध वसूली के आरोपों के बाद पद से हटा दिया गया था. इसके बाद जून में चनवीर यादव को बाइपास थाने की कमान सौंपी गयी.

चनवीर यादव की तैनाती भी जल्द ही सवालों के घेरे में आ गयी. ट्रैक्टर मालिक से कथित अवैध वसूली से जुड़ा एक ऑडियो वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आया. इसके बाद अगस्त में अवैध वसूली से जुड़े मामले में उन्हें निलंबित कर दिया गया.

उनके बाद विकास कुमार को थानाध्यक्ष बनाया गया. लेकिन इससे बाइपास थाना विवादों से बाहर नहीं आ सका.

20 अगस्त को प्रभारी एएसआइ नीरज कुमार को मवेशी लदे वाहन को उचित जांच और सत्यापन के बिना छोड़ने के आरोप में निलंबित कर दिया गया. लगातार कार्रवाई ने थाना स्तर की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं.

सवाल सिर्फ निलंबन का नहीं, निगरानी का भी

किसी पुलिसकर्मी पर आरोप लगने के बाद कार्रवाई होना विभागीय जवाबदेही का हिस्सा है. लेकिन जब एक ही थाने से लगातार अलग-अलग मामलों में कार्रवाई की नौबत आये, तो सवाल व्यवस्था की निगरानी पर भी उठता है.

क्या थाना स्तर पर पुलिसकर्मियों के कामकाज की नियमित निगरानी हो रही है? क्या वरिष्ठ अधिकारी शिकायतों को कार्रवाई से पहले ही पकड़ पा रहे हैं? क्या थाना बदलने या किसी अधिकारी को निलंबित करने से समस्या खत्म हो जाती है?

बाइपास थाना से जुड़े पिछले तीन महीनों के घटनाक्रम को एक साथ देखें तो ये सवाल और गंभीर हो जाते हैं.

पुलिस की पोस्ट पर लोगों ने भी उठाये सवाल

20 अगस्त को प्रभारी एएसआइ नीरज कुमार के निलंबन की जानकारी भागलपुर पुलिस ने अपने फेसबुक पेज पर साझा की थी. इस पोस्ट के बाद लोगों की प्रतिक्रियाओं में भी बाइपास थाना की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी सामने आयी.

एक यूजर ने कमेंट में आरोप लगाया कि वर्तमान में भी बाइपास थाने के पीछे वसूली होती है. यूजर ने इसे अपनी आंखों से देखने और लोगों को गाली देते हुए सुनने का दावा किया. अन्य यूजरों ने भी पोस्ट पर तीखी प्रतिक्रियाएं दीं.

हालांकि, सोशल मीडिया पर किये गये इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. इसके बावजूद पुलिस की कार्रवाई से संबंधित पोस्ट पर इस तरह की प्रतिक्रियाएं यह संकेत जरूर देती हैं कि आम लोगों के एक वर्ग में थाने की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष मौजूद है.

ट्रक, ट्रैक्टर से लेकर मवेशी वाहन तक पहुंचा मामला

बाइपास थाना से जुड़े मामलों में एक बात लगातार सामने आती है. थाना क्षेत्र से गुजरने वाले वाहनों और पुलिस जांच की प्रक्रिया.

पहले ट्रक चालकों से कथित अवैध वसूली का मामला सामने आया. इसके बाद ट्रैक्टर मालिक से जुड़े कथित वसूली के ऑडियो ने सवाल खड़े किये. अब मवेशी लदे वाहन को जांच और सत्यापन के बिना छोड़ने के आरोप में एएसआइ पर कार्रवाई हुई है.

घटनाओं की प्रकृति अलग-अलग है, लेकिन इन सभी मामलों में पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में आयी है. यही वजह है कि अब मामला किसी एक पुलिसकर्मी की कथित गलती तक सीमित नहीं माना जा सकता.

कार्रवाई के बाद भी आम लोगों का भरोसा क्यों जरूरी?

किसी भी थाने की सबसे बड़ी ताकत वहां के लोगों का भरोसा होता है. अगर शिकायतकर्ता को यह लगे कि उसकी बात सुनी जायेगी और पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई करेगी, तो कानून-व्यवस्था मजबूत होती है.

इसके उलट, अगर किसी थाने की छवि वसूली या पक्षपात की शिकायतों से जुड़ने लगे तो इसका सीधा असर पुलिस और आम लोगों के बीच भरोसे पर पड़ता है.

बाइपास थाना शहर और आसपास के इलाकों से आने-जाने वाले वाहनों के लिए महत्वपूर्ण है. ऐसे में यहां पुलिस की कार्यप्रणाली का पारदर्शी होना और भी जरूरी हो जाता है.

सिर्फ निलंबन नहीं, व्यवस्था की जांच भी जरूरी

लगातार कार्रवाई के बाद अब विभाग के सामने चुनौती केवल दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित करने की नहीं है. यह पता लगाना भी जरूरी है कि ऐसी शिकायतों की पुनरावृत्ति क्यों हो रही है.

थाने की नियमित निगरानी, पुलिसकर्मियों की ड्यूटी की समीक्षा, शिकायतों की स्वतंत्र जांच और संवेदनशील स्थानों पर पारदर्शी व्यवस्था से स्थिति में सुधार लाया जा सकता है.

साथ ही यह भी जरूरी है कि किसी पुलिसकर्मी पर आरोप लगने और दोष साबित होने के बीच उचित जांच प्रक्रिया का पालन हो. इससे ईमानदारी से काम करने वाले पुलिसकर्मियों का मनोबल भी बना रहेगा और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई भी प्रभावी होगी.

Bhagalpur Bypass Police Station: एसएसपी की क्राइम मीटिंग में सख्त निर्देश

सिटी एसपी अतुलेश झा ने कहा कि पुलिस विभाग ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रयास कर रहा है. एसएसपी क्राइम मीटिंग में भी सख्त निर्देश दे चुके हैं कि किसी थाने में ऐसी घटना नहीं हो, जिससे कार्रवाई की नौबत आये.

उन्होंने कहा कि पुलिस सभी पर नजर रख रही है, ताकि इस तरह की घटना दोबारा नहीं हो.

अब देखने वाली बात यह होगी कि बाइपास थाना में लगातार हुई कार्रवाई के बाद क्या पुलिस की कार्यप्रणाली में स्थायी बदलाव आता है और लोगों के बीच बनी शिकायतों की धारणा दूर हो पाती है.

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By Atul kumar

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