भागलपुर स्थित गंगा नदी पर बने विक्रमशिला सेतु पर प्रस्तावित निर्माण व मरम्मत कार्य के कारण आगामी दिनों में यातायात प्रभावित या पूरी तरह बंद होने की संभावना को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. इसे लेकर तिनटंगा करारी स्थित आवास पर पूर्व सांसद सह वरिष्ठ भाजपा नेता अनिल यादव ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की. बैठक में विभिन्न पंचायतों के मुखिया, सरपंच और वार्ड सदस्यों ने भाग लिया. इस दौरान सेतु बंद होने से उत्पन्न होने वाली संभावित गंभीर परिस्थितियों और जनता की परेशानियों पर विस्तृत चर्चा की गई.
उत्तर बिहार और सीमांचल की लाइफलाइन है विक्रमशिला सेतु
बैठक को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद अनिल यादव ने कहा कि विक्रमशिला सेतु केवल एक ढांचागत पुल नहीं है, बल्कि यह भागलपुर, नवगछिया, कोसी और सीमांचल सहित पूरे उत्तर बिहार के आवागमन व व्यापार की जीवनरेखा (लाइफलाइन) है. पुल पर परिचालन बंद या बाधित होने का सीधा असर आम लोगों के दैनिक जीवन के साथ-साथ पूरे इलाके की आर्थिक और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ेगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि पुल का मरम्मत कार्य जरूरी है, लेकिन इससे पहले जनता के लिए एक मजबूत वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की जानी चाहिए.
बाढ़ और त्योहारों के समय आपूर्ति ठप होने की आशंका
पूर्व सांसद ने बताया कि आने वाले दो-तीन महीने बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण हैं. एक तरफ जहां क्षेत्र में बाढ़ का प्रकोप बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, दुर्गापूजा और दीपावली जैसे बड़े पर्व-त्योहारों का दौर शुरू होने वाला है. ऐसे समय में यदि पुल पर आवागमन रुका, तो मरीजों को अस्पताल पहुंचने, छात्रों को स्कूल-कॉलेज जाने और आम जनता को आवश्यक कार्यों के लिए भारी फजीहत झेलनी पड़ेगी. बाढ़ के दौरान नावों का परिचालन भी हर समय सुरक्षित और संभव नहीं होता, जिससे खाद्यान्न और जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति ठप हो सकती है और बाजार में महंगाई बढ़ सकती है.
मुख्यमंत्री से मजबूत वैकल्पिक व्यवस्था की करेंगे मांग
अनिल यादव ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को केवल स्थानीय समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसका प्रभाव कई जिलों के लाखों लोगों पर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि वे जल्द ही इस गंभीर विषय पर मुख्यमंत्री से बात करेंगे और निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ठोस व सुरक्षित वैकल्पिक आवागमन सुनिश्चित करने का आग्रह करेंगे. उन्होंने कहा कि विकास कार्य अनिवार्य हैं, लेकिन यह जनता को भारी परेशानी में डालकर नहीं होना चाहिए. बैठक में उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों ने भी एक स्वर में निर्माण कार्य के दौरान समानांतर और सुगम वैकल्पिक मार्ग बहाल करने की मांग का समर्थन किया.
