भागलपुर जिले के कहलगांव स्थित गुरुकृपा किड्स कॉलेज में सावन शुक्ल सप्तमी के पावन अवसर पर गोस्वामी तुलसीदास जयंती पूरी श्रद्धा और भक्ति-भाव के साथ मनाई गई. इस भव्य और आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन ऋषि अष्टावक्र जन्मभूमि सेवा न्यास और श्री राघव परिवार के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था. कार्यक्रम के दौरान रामचरितमानस के पाठ, विद्वानों के विचार और भजनों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया.
रामचरितमानस सिखाता है मर्यादा और धर्म का मार्ग
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे प्रसिद्ध कथावाचक स्वामी मधुसूदनाचार्य जी महाराज ने गोस्वामी तुलसीदास जी के जीवन और उनके साहित्य पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि तुलसीदास जी ने 'रामचरितमानस' जैसे महाकाव्य के माध्यम से पूरे समाज को मर्यादा, धर्म और सच्ची भक्ति का मार्ग दिखाया है, जो आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक है. स्वामी जी ने उपस्थित लोगों को प्रेरित करते हुए आमजन से यह आह्वान किया कि वे अपने-अपने घरों में रामचरितमानस का नित्य पाठ करें, जिससे परिवार और समाज में सकारात्मकता और संस्कारों का संचार हो सके.
सुंदरकांड पाठ और मधुर भजनों से गूंजा परिसर
इस पावन अवसर पर सुंदरकांड समिति के दिलीप कुमार साह के नेतृत्व में पूरी टीम ने रामचरितमानस का सांकेतिक पाठ किया, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया. इसके अलावा, सृष्टि कुमारी और मीनाक्षी कुमारी द्वारा प्रस्तुत किए गए सुमधुर भजनों ने कार्यक्रम में समां बांध दिया और पूरे माहौल को पूरी तरह से शिव-राम की भक्ति में रंग दिया. इस भव्य कार्यक्रम का सफल और सुचारू संचालन रणधीर कुमार चौधरी द्वारा किया गया.
विद्वानों ने बताई तुलसी साहित्य की वर्तमान प्रासंगिकता
जयंती समारोह में उपस्थित शिक्षाविदों और विद्वानों ने भी अपने विचार साझा किए. डॉ. राघवेंद्र नारायण आर्य, डॉ. सितारे हिंद, डॉ. उमाशंकर पासवान, डॉ. शत्रुघ्न कुमार और जयप्रकाश त्रिषिथ ने आधुनिक समाज में 'तुलसी साहित्य की प्रासंगिकता' विषय पर अपने सारगर्भित विचार रखे. इस पुनीत अवसर पर कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के निदेशक अंकुर खेतान, पवन खेतान के साथ-साथ राघव परिवार के पवन चौधरी, संजय कुशवाहा, जयप्रकाश साह, ठाकुर प्रसाद साह, संतोष साह और मुरारी खेतान सहित सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे.
