TMBU: प्रभारी कुलपति का एक साल पूरा, 52 शिक्षकों को मिली प्रोन्नति; लेकिन नैक व छात्रसंघ चुनाव समेत इन 4 मोर्चों पर फेल

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) में प्रभारी कुलपति के कार्यकाल का एक साल पूरा हो गया है. इस दौरान पेंशनरों को सेवांत लाभ और 52 शिक्षकों को प्रोन्नति मिली. हालांकि, नैक मूल्यांकन की तैयारी और छात्रसंघ चुनाव जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली सवालों के घेरे में है.

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) में प्रभारी कुलपति प्रो. विमलेंदु शेखर झा के कार्यकाल का एक साल पूरा हो चुका है. उनके इस एक साल के सफर में विवि को कुछ उपलब्धियां जरूर मिलीं, जिनमें पेंशनरों का बकाया सेवांत लाभ देना और नौ विषयों के करीब 52 शिक्षकों को प्रोन्नति देना शामिल है. लेकिन, जब बात शैक्षणिक विकास और बुनियादी ढांचे की आती है, तो विवि प्रशासन कई मोर्चों पर पूरी तरह विफल नजर आता है. नैक (NAAC) मूल्यांकन से लेकर छात्रसंघ चुनाव तक, कई महत्वपूर्ण योजनाएं ठंडे बस्ते में पड़ी हैं.

टीएमबीयू के 4 बड़े फेल्योर: जहां नहीं हुआ कोई काम

1. नैक मूल्यांकन की तैयारी शून्य, को-ऑर्डिनेटर का पद खाली

  • ग्रेडिंग समाप्त: टीएमबीयू की नैक ग्रेडिंग जुलाई 2021 में ही खत्म हो चुकी है (2016 में मूल्यांकन हुआ था), लेकिन नई तैयारी के लिए आइक्यूएसी (IQAC) सेल में कोई को-ऑर्डिनेटर ही नहीं है. पूर्व को-ऑर्डिनेटर सेवानिवृत्त हो चुके हैं.
  • फाइलों का गोदाम: नैक मूल्यांकन की तैयारियों के लिए विवि में जो कमरा दिया गया था, उसे अब प्रोन्नति से संबंधित फाइलों का डंपिंग यार्ड बना दिया गया है.

2. छात्रसंघ चुनाव पर चुप्पी

  • लोकभवन से पूर्व कुलपति (प्रो. जवाहर लाल) के कार्यकाल में ही चुनाव कराने का पत्र आ चुका है, लेकिन प्रभारी कुलपति ने भी इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया. छात्र संगठनों की लगातार उठ रही मांगों को अनसुना किया जा रहा है.

3. बदहाल सेंट्रल लाइब्रेरी, सफाई कर्मी तक नहीं

  • विवि की सेंट्रल लाइब्रेरी की हालत बेहद खस्ता है. साफ-सफाई के लिए कर्मियों का टोटा है. बता दें कि इसी लाइब्रेरी की कमियों के कारण 2016 में नैक टीम ने विवि को मात्र 'बी-ग्रेड' (B-Grade) दिया था.

4. रीजनल स्टडी सेंटर में 6 माह से निदेशक नहीं

  • रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए बने रीजनल स्टडी सेंटर में फरवरी 2026 से ही निदेशक का पद खाली है. शिक्षक के सेवानिवृत्त होने के बाद से यहां रिसर्च से जुड़े सारे काम पूरी तरह से ठप पड़े हैं.

एक्सपर्ट व्यू: पूर्व कुलपति और सीनेट सदस्य ने उठाए सवाल

"10 साल से नैक नहीं होना चिंताजनक" - प्रो. फारूक अली (पूर्व कुलपति, छपरा विवि) पूर्व कुलपति प्रो. फारूक अली ने विवि प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा:

  • ग्रांट पर असर: 10 साल से नैक मूल्यांकन न होना चिंताजनक है, इससे विवि को ग्रांट नहीं मिलेंगे और नए कोर्स शुरू करने में परेशानी होगी.
  • छात्रसंघ जरूरी: चुनाव न होने से विवि को ही नुकसान है. निर्वाचित प्रतिनिधि ही छात्रहित के मुद्दे उठाते हैं, वरना दबाव में विवि को गलत फैसले लेने पड़ते हैं.
  • पहचान का संकट: किसी भी विवि की पहचान उसकी लाइब्रेरी से होती है, टीएमबीयू को अपनी लाइब्रेरी पर तत्काल काम करने की जरूरत है.

"छात्रहित के वादे हवा-हवाई साबित हुए" - जयप्रीत मिश्रा (सीनेट सदस्य) विवि के सीनेट सदस्य जयप्रीत मिश्रा ने कहा कि प्रभारी कुलपति ने योगदान देते समय छात्रहित में आमूल-चूल परिवर्तन की बात कही थी, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं दिखा. उन्होंने लोकभवन से मांग की है कि टीएमबीयू के विकास कार्यों को गति देने के लिए अविलंब नियमित कुलपति की नियुक्ति की जाए.


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लेखक के बारे में

By आरफीन जुबैर

आरफीन जुबैर प्रिंट माध्यम में पिछले 16 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. प्रभात खबर के भागलपुर कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा और खेल में रुचि रखते हैं.

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