TMBU में चार फीट पानी, नाव से पहुंच रहे शिक्षक

TMBU में नाव बनी सहारा, कैंपस में चार फीट से ज्यादा पानी, प्रोफेसर कॉलोनी के शिक्षक छोड़ रहे घर

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) बाढ़ की विकराल चपेट में है. कैंपस में चार फीट से अधिक पानी जमा होने से प्रशासनिक भवन का काम ठप पड़ गया है. जरूरी काम के लिए कर्मचारी नाव का सहारा ले रहे हैं, जबकि प्रोफेसर कॉलोनी के कई शिक्षक बाढ़ के कारण अपना घर छोड़ने को मजबूर हैं.

TMBU Flood Water: तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में सोमवार को पढ़ाई और कार्यालयी कामकाज से ज्यादा बड़ी चुनौती कैंपस तक पहुंचने की रही. विश्वविद्यालय परिसर में जमीन से चार फीट से अधिक पानी जमा है और यह पानी अब प्रशासनिक भवन के अंदर तक पहुंच चुका है. ग्राउंड फ्लोर के एक दर्जन से अधिक शाखाओं में पानी घुसने से कार्यालयों का कामकाज प्रभावित है. हालात ऐसे हैं कि जरूरी काम से आने वाले कर्मचारी और अधिकारी भी नाव के सहारे विश्वविद्यालय पहुंच रहे हैं.

दूसरी ओर, टीएमबीयू की लालबाग प्रोफेसर कॉलोनी की स्थिति और गंभीर है. यहां जमीन से करीब पांच फीट ऊंचा पानी जमा है. सरकारी क्वार्टरों में रहने वाले शिक्षक नाव से आवाजाही कर रहे हैं. ग्राउंड फ्लोर के क्वार्टरों में रहने वाले एक दर्जन से अधिक शिक्षकों को पानी बढ़ने के बाद घर छोड़ना पड़ा है. ये शिक्षक अब किराये के मकान या रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को मजबूर हैं.

बाढ़ के पानी ने विश्वविद्यालय की सामान्य व्यवस्था को इस तरह प्रभावित किया है कि कार्यालय, कर्मचारियों और विद्यार्थियों से जुड़ी रोजमर्रा की गतिविधियां भी ठप पड़ गयी हैं.

प्रशासनिक भवन में घुसा पानी, कई शाखाओं का काम प्रभावित

टीएमबीयू कैंपस में चार फीट से अधिक पानी जमा होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन भी इसकी चपेट में आ गया है. भवन के ग्राउंड फ्लोर पर स्थित कई कार्यालयों में पानी घुस गया है. कर्मचारियों के अनुसार कुछ कमरों में करीब तीन फीट तक पानी है.

ऐसे में कार्यालयों में बैठकर फाइलों और दूसरे जरूरी कामों को निपटाना मुश्किल हो गया है. कई कर्मचारी कुछ देर कार्यालय में रहने के बाद वापस घर लौट गये. उनका कहना है कि पानी के बीच काम करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गयी है.

कर्मचारियों के सामने सवाल है कि जब कार्यालय के कमरों में पानी भरा है तो वे बैठकर काम कहां करें. इसी स्थिति को देखते हुए कर्मचारियों ने बाढ़ के पानी को देखते हुए छुट्टी देने की मांग की है.

पानी में भी नाव से पहुंच रहे कर्मचारी

विश्वविद्यालय परिसर में सड़क और रास्तों पर पानी जमा होने के कारण नाव ही फिलहाल आवाजाही का प्रमुख साधन बन गयी है. जरूरी काम के लिए कुछ कर्मचारी नाव से विश्वविद्यालय पहुंच रहे हैं. काम पूरा करने के बाद उसी नाव से वापस लौट रहे हैं.

यह स्थिति विश्वविद्यालय के सामान्य कामकाज पर बाढ़ के असर को साफ दिखाती है. जहां सामान्य दिनों में कर्मचारी और अधिकारी वाहनों या पैदल प्रशासनिक भवन तक पहुंचते हैं, वहीं अब परिसर के भीतर जाने के लिए भी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है.

फाइलों पर भी मंडरा रहा नुकसान का खतरा

बाढ़ का पानी सिर्फ कर्मचारियों की आवाजाही और कामकाज को प्रभावित नहीं कर रहा, बल्कि कार्यालयों में रखी फाइलों के लिए भी खतरा पैदा हो गया है. कर्मचारियों के अनुसार कई शाखाओं की कुछ फाइलें पानी की भेंट चढ़ गयी हैं. पानी में कागज गलने लगे हैं.

स्थापना कार्यालय में विवि प्रशासन के निर्देश पर पिछले दस दिनों से ताला लगा हुआ है. ऐसे में कार्यालय के अंदर पानी घुसने से वहां रखी महत्वपूर्ण फाइलों के भी खराब होने की बात कही जा रही है.

फाइलों और कागजात का खराब होना आगे विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कामकाज के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है. हालांकि पानी उतरने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दस्तावेजों और कार्यालयी रिकॉर्ड को कितना नुकसान हुआ है.

काउंटर बंद, दूर-दराज से आये छात्र खाली हाथ लौटे

बाढ़ का सबसे सीधा असर उन छात्र-छात्राओं पर पड़ा जो अपने जरूरी दस्तावेज लेने विश्वविद्यालय पहुंचे थे. कैंपस में पानी भरने के कारण विश्वविद्यालय का काउंटर बंद रहा.

डिग्री, माइग्रेशन, अंकपत्र और प्रोविजनल प्रमाण पत्र लेने के लिए दूर-दराज से पहुंचे विद्यार्थियों को बिना काम कराये वापस लौटना पड़ा. कई छात्रों के लिए विश्वविद्यालय तक पहुंचने में समय और पैसे खर्च हुए, लेकिन काउंटर बंद रहने के कारण उनका काम नहीं हो सका.

बाढ़ की स्थिति में विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने अब छात्रों के लंबित काम को पूरा करने की चुनौती भी होगी. पानी कम होने के बाद काउंटर कब खुलेगा और विद्यार्थियों को किस तरह राहत दी जाएगी, यह भी महत्वपूर्ण होगा.

प्रोफेसर कॉलोनी में पांच फीट पानी, कई शिक्षक घर छोड़ने को मजबूर

टीएमबीयू की लालबाग प्रोफेसर कॉलोनी में जलजमाव की स्थिति सबसे खराब बतायी जा रही है. यहां जमीन से करीब पांच फीट ऊंचा पानी है. सरकारी क्वार्टरों में रहने वाले शिक्षकों के लिए सामान्य आवाजाही मुश्किल हो गयी है.

शिक्षक नाव के जरिए अपने क्वार्टरों से बाहर आ-जा रहे हैं. वहीं ग्राउंड फ्लोर पर रहने वाले एक दर्जन से अधिक शिक्षकों ने पानी की वजह से घर छोड़ दिया है. कुछ शिक्षक किराये के मकान में रह रहे हैं, जबकि कुछ ने रिश्तेदारों के यहां शरण ली है.

इन परिवारों के लिए यह सिर्फ आवाजाही की समस्या नहीं है. घर छोड़कर अस्थायी रूप से दूसरी जगह रहना, जरूरी सामान की सुरक्षा और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी चुनौती बन गया है.

TMBU Flood Water: आगे क्या, पानी घटने तक कैसे चलेगा विवि का काम?

टीएमबीयू में फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती पानी के बीच जरूरी प्रशासनिक काम को जारी रखना है. एक तरफ कार्यालयों में पानी घुसा है, दूसरी तरफ कर्मचारी और अधिकारी नियमित तरीके से वहां पहुंच नहीं पा रहे हैं. छात्रों के काउंटर बंद हैं और कई शिक्षक अपने घर छोड़ चुके हैं.

ऐसे में पानी घटने तक वैकल्पिक कार्यालय व्यवस्था, कर्मचारियों की सुरक्षा और विद्यार्थियों के जरूरी काम को प्राथमिकता देना अहम होगा. साथ ही पानी उतरने के बाद कार्यालयों, फाइलों और अन्य संसाधनों को हुए नुकसान का आकलन भी करना पड़ेगा.

फिलहाल विश्वविद्यालय परिसर और प्रोफेसर कॉलोनी की तस्वीर यही बता रही है कि बाढ़ ने टीएमबीयू की सामान्य व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है. कैंपस में चार फीट से अधिक और प्रोफेसर कॉलोनी में करीब पांच फीट पानी के बीच नाव अब सिर्फ बचाव का साधन नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय तक पहुंचने का मुख्य जरिया बन गयी है.

Also Read: बिहार में बाढ़ से 20 लोगों की मौत, 12 जिलों में हाई अलर्ट, कहीं टूटे बांध तो कहीं पुल, कोसी-सीमांचल में बढ़ रहा खतरा

Also Read: बिहार में जंतर-मंतर जैसा नजारा, पटना के जेपी गोलंबर पर जुटे प्रदर्शनकारी, फ्रेजर रोड जाने वाली सड़क बंद, भारी पुलिस बल तैनात

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By आरफीन जुबैर

आरफीन जुबैर प्रिंट माध्यम में पिछले 16 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. प्रभात खबर के भागलपुर कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा और खेल में रुचि रखते हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >