bhagalpur news. दो बार मिला समय, फिर भी मुरारका व लॉ कॉलेज में नियमित प्राचार्य ने नहीं किया ज्वाइन

टीएमबीयू के मुरारका काॅलेज के लिए चयनित नियमित डॉ लक्ष्मी पांडेय व टीएनबी

टीएमबीयू के मुरारका काॅलेज के लिए चयनित नियमित डॉ लक्ष्मी पांडेय व टीएनबी लाॅ काॅलेज के लिए प्राचार्य प्राे वाणी भूषण ने अबतक ज्वाइन नहीं किया. ज्वाइनिंग के लिए अंतिम दिन 31 जनवरी था. बिहार राज्य विवि सेवा आयाेग ने विवि के लिए 10 नियमित प्राचार्याें का चयन किया था. इसमें प्राे भूषण व डाॅ पांडेय शामिल थे. सभी 10 प्राचार्याें की ज्वाइनिंग की प्रक्रिया अगस्त 2025 में पूर्व कुलपति प्रो जवाहर लाल के कार्यकाल में हुआ था. लोकभन के निदेशानुसार लाॅटरी सिस्टम से काॅलेजाें आवंटन किया गया था. इसमें प्रो वाणी भूषण काे टीएनबी लाॅ काॅलेज व लक्ष्मी पांडेय काे मुरारका काॅलेज सुलतानगंज मिला था. मामले में विवि प्रशासन आगे क्या कार्रवाई करेगी. इस बाबत विवि के रजिस्ट्रार प्रो रामाशीष पूर्वे से संपर्क किया. उनसे बात नहीं हो पायी. प्रभात नॉलेज दाे बार मिला मौका विवि ने उक्त दोनों प्राचार्यों को ज्वाइन करने के लिए दो मौका दिया था. नियमानुसार ज्वाइनिंग के लिए पहले मौका तीन माह का समय दिया था. अवधि अक्टूबर में ही पूरा हुआ था. दाेनाें प्राचार्याें ने दोबारा आवेदन देकर तीन माह का समय मांगा. यह अवधि 31 जनवरी 2026 को पूरा हो गया है. दूर व सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नहीं किया ज्वाइन डॉ लक्ष्मी पांडे ने कहा कि मुरारका कॉलेज मुख्यालय से दूर है. साथ ही महिला के नाते सुरक्षा व्यवस्था भी गंभीर मुद्दा था. उनके पति प्रो प्रमोद पांडे मुख्यालय के पीजी मैथिली विभाग में कार्यरत थे. महिला होने के नाते घर-परिवार की जिम्मेवारी थी. प्राचार्य के नाते काफी भाग-दौड़ था. क्योंकि प्राचार्य पर कॉलेज से संबंधित सारे महत्वपूर्ण कार्य को कराना होता है. जबतक कॉलेज में प्राचार्य नहीं रहेंगे. काम आगे नहीं बढ़ पायेगा. कहा कि तमाम चीजों को देखते हुए ज्वाइन नहीं करने का निर्णय लिया. बता दें कि प्रो लक्ष्मी पांडे वर्तमान में पीजी मनोविज्ञान विभाग में विभागाध्यक्ष है. दूसरी तरफ टीएनबी लॉ कॉलेज के नियमित प्राचार्य प्रो वाणी भूषण से मामले में बात करने की कोशिश की गयी, लेकिन वह एक कार्यक्रम में व्यस्त थे इसलिए बात नहीं हो सकी. एक्सपर्ट ब्यू छपरा विवि के पूर्व कुलपति प्रो फारूक अली ने कहा कि नियमित प्राचार्यों के पदभार ग्रहण नहीं करने से कॉलेज व छात्रहित को नुकसान पहुंचा है. क्योंकि नियमित प्राचार्य रहने से कॉलेज के विकास व छात्रों की समस्या का निदान त्वरित गति से होता है. बताया कि प्राचार्यों के पैनल की मान्यता एक साल तक रहती है. विवि प्रशासन अब दोनों प्राचार्य के पदभार ग्रहण नहीं करने की सूचना आयोग को देगा. साथ ही कॉलेजों के प्राचार्यों के रिक्त सूची भी आयोग को उपलब्ध करायेगा.

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Author: ATUL KUMAR

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