सावन की तीसरी सोमवारी पर बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करने के लिए रविवार को सुल्तानगंज की सड़कों पर डाकबम का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ पड़ा. कंधे पर कांवर, हाथ में पवित्र गंगाजल और कदमों में अद्भुत रफ्तार—अजगैवीनाथ नगरी में चारों ओर केवल शिवभक्ति का तीव्र उत्साह दिखाई दिया. 98 किलोमीटर की लंबी दूरी, 24 घंटे से भी कम का सीमित समय और रास्ते में बिना रुके लगातार चलते रहने का कठिन नियम; इस बार खासकर युवाओं में डाकबम बनकर बाबा के दरबार तक दौड़ने का जबर्दस्त जुनून देखा जा रहा है.
डाक कांवर यात्रा: 24 घंटे की कठिन तपस्या और अटूट आस्था
डाक कांवर यात्रा सामान्य पदयात्रा से कहीं अधिक कठिन और चुनौतीपूर्ण मानी जाती है:
- बिना रुके निरंतर यात्रा: धार्मिक मान्यता और संकल्प के अनुसार डाकबम यात्रा के दौरान बैठ या रुक नहीं सकते. यदि किसी कारणवश रुकना भी पड़े, तो पैर लगातार हिलते रहने चाहिए ताकि संकल्प भंग न हो.
- कष्ट सहकर पुण्य की प्राप्ति: बांका के श्रद्धालु रामबहादुर ने बताया कि जीवन में जो कुछ भी मिला है वह बाबा की ही कृपा है, इसलिए उनके दरबार तक कष्ट सहकर दौड़ना भी एक परम सौभाग्य है.
युवाओं में दिखा भारी उत्साह, जीवन में बदलाव का अटूट विश्वास
डाकबम बनने वालों में इस बार सबसे बड़ी तादाद युवाओं की रही. युवाओं का मानना है कि 16 से 24 घंटे के भीतर जलार्पण की यह कठिन साधना उन्हें मानसिक और आत्मिक रूप से मजबूत बनाती है:
- मनोकामना पूर्ति का भरोसा: युवा श्रद्धालुओं का विश्वास है कि एक दिन की इस कठोर तपस्या के बदले पूरे वर्ष परिवार में सुख-शांति, स्वास्थ्य और नौकरी-व्यापार में तरक्की का आशीर्वाद मिलता है.
- सकारात्मक बदलाव: कई डाक कांवरियों ने बताया कि पिछली यात्राओं में डाकजल चढ़ाने के बाद उनकी नौकरी, विवाह और पारिवारिक समस्याओं का सुखद समाधान हुआ, जिसने उनकी आस्था को और प्रगाढ़ कर दिया.
काउंटरों पर लगी लंबी कतारें, बना नया रिकॉर्ड
रविवार सुबह से ही डाकबम रजिस्ट्रेशन और प्रमाणपत्र काउंटरों पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी:
- प्रमाणपत्र पर्ची: हजारों डाक कांवरियों ने प्रशासनिक काउंटरों से पर्ची प्राप्त कर 24 घंटे के भीतर देवघर स्थित ज्योतिर्लिंग पर जलार्पण का विधिवत संकल्प लिया.
- रिकॉर्ड भीड़: सावन माह के बीते 18 दिनों में रविवार को डाकबम की अब तक की सबसे अधिक संख्या दर्ज की गई. बड़ी संख्या में श्रद्धालु बिना औपचारिक पर्ची के भी आस्था के सहारे सीधे रवाना हुए.
सेवा शिविरों ने बढ़ाया हौसला, गूंजता रहा 'बोल बम'
कांवरिया पथ पर दौड़ रहे डाक कांवरियों का मनोबल बढ़ाने के लिए निजी संस्थाओं और स्थानीय सेवादारों द्वारा जगह-जगह विशेष इंतजाम किए गए:
- मार्ग में शीतल जल, शिकंजी, कटे ताजे फल और ओआरएस के पैकेट बांटे गए.
- पैरों में खिंचाव या चोट से राहत के लिए त्वरित स्प्रे व प्राथमिक उपचार की व्यवस्था रही.
- साथ चल रहे परिजन और स्वयंसेवक लगातार ‘बोल बम’ का जयघोष कर डाकबम का उत्साह बढ़ाते रहे.
