Bhagalpur news स्लैब टूटने से दहियार व केला व्यापारियों की टूटी कमर

विक्रमशिला सेतु के स्लैब टूटने का असर अब सब्जी किसानों, दुग्ध उत्पादकों और फल व्यापारियों पर पड़ने लगा है

विक्रमशिला सेतु के स्लैब टूटने का असर अब सब्जी किसानों, दुग्ध उत्पादकों और फल व्यापारियों पर पड़ने लगा है. नवगछिया क्षेत्र के दहियार पशुपालक इन दिनों सबसे ज्यादा परेशान हैं. नवगछिया अनुमंडल के सैकड़ों पशुपालक रोजाना गाय-भैंस का दूध लेकर भागलपुर जाते थे. कोई इसे सीधे बाजार में बेचता था, तो कई लोग सुधा डेयरी में आपूर्ति करते थे. कई दुग्ध उत्पादक शहर के बड़े होटलों और घर-घर दूध सप्लाई करते थे. पुल क्षतिग्रस्त होने से व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गयी है. अब दूध नाव के सहारे भेजा जा रहा है, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ गये हैं. जगतपुर गांव के दुग्ध उत्पादक किसान दीपक यादव (दो क्विंटल), अनुज यादव (ढाई क्विंटल), रितेश यादव (80 किलो), गुलशन कुमार (दो क्विंटल) और मिथुन कुमार (एक क्विंटल) लेकर भागलपु ने जाते थे. सभी ने बताया किि अब दूध दोपहर तक भागलपुर पहुंच रहा है. ऐसे में ताजगी और गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, जिससे कीमत कम मिल रही है. भवानीपुर, खरीक और आसपास के कई गांवों से काफी संख्या में लोग भागलपुर जाकर दूध बेचते हैं. अब उन्हें रोजाना परेशानी हो रही है. केला व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है. नवगछिया क्षेत्र के केला व्यापारी श्यामलाल कुमार, लड्डू कुमार और सुभाष यादव जैसे कई कारोबारी समय पर भागलपुर बाजार नहीं पहुंच सके. उनका माल अटक गया और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. स्थानीय लोगों का कहना है कि विक्रमशिला सेतु एक पुल नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. इसके बाधित होने से दूध, फल और सब्जी जैसे रोजमर्रा के व्यवसाय पर सीधा असर पड़ा है.

दुग्ध उत्पादकों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था, विशेषकर दूध जैसी जल्दी खराब होने वाली चीजों के लिए त्वरित समाधान करे, ताकि उनकी आजीविका पर मंडरा रहा संकट कम हो सके.

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Published by: Jitendra tomar

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