न बेटा, न बेटी; 85 साल की बेसहारा बुजुर्ग के लिए 'श्रवण कुमार' बने चार पड़ोसी, पालकी में बैठाकर करा रहे 98 किमी की कांवर यात्रा

न कोई अपना, न बेटा-बेटी, फिर भी 85 वर्षीय राम कुमारी देवी की बाबा बैद्यनाथ के दर्शन की अधूरी इच्छा पूरी हुई. उनके 4 पड़ोसियों ने 'श्रवण कुमार' बनकर पालकी में बिठाया और 98 किमी की कठिन यात्रा कराई.

कहते हैं रिश्ते सिर्फ खून से नहीं, बल्कि दिल और इंसानियत से बनते हैं. जब आधुनिक समाज में बुजुर्ग माता-पिता अपनों के बीच भी अकेलेपन का दंश झेल रहे हैं, तब सुल्तानगंज से देवघर के कांवरिया पथ से सामने आई एक भावुक तस्वीर ने पूरे समाज को मानवीय संवेदनाओं का आईना दिखाया है. 85 वर्ष की निसंतान और चलने-फिरने में असमर्थ बुजुर्ग महिला राम कुमारी देवी की बाबा बैद्यनाथ के दर्शन की अधूरी इच्छा को पूरा करने के लिए चार पड़ोसियों ने बेटा-बेटी का फर्ज निभाया है. सुल्तानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर इन चार कंधों ने बुजुर्ग मां को पालकी में बैठाया और 98 किलोमीटर दूर बाबाधाम की कठिन पदयात्रा पर निकल पड़े.

आंखों में आंसू देख पसीजा पड़ोसियों का दिल

मूल रूप से लखनऊ में अभावों के बीच गुजर-बसर करने वाली 85 वर्षीया राम कुमारी देवी की कोई संतान नहीं है. उनके वृद्ध पति फकीरा साहनी भी अब मजदूरी करने की शारीरिक स्थिति में नहीं हैं:

  • पैरों की चोट और बेबसी: पैरों में गंभीर चोट और अत्यधिक वृद्धावस्था के कारण राम कुमारी देवी खुद चलने में पूरी तरह असमर्थ थीं.
  • आंखों से छलके आंसू: सावन के महीने में जब आसपास के लोग बाबाधाम जाने की तैयारी कर रहे थे, तो वे यह सोचकर रो पड़ीं कि यदि उनका कोई बेटा या बेटी होता, तो वह भी उन्हें बाबा के दर्शन करा लाता.
  • राधा देवी ने बढ़ाया हाथ: पड़ोस में रहने वाली मुजफ्फरपुर की राधा देवी ने जब यह दर्द देखा, तो उन्होंने फौरन कहा—"दादी, आप मत रोइए. हम आपके बच्चे बनकर आपको बाबा बैद्यनाथ के दरबार तक ले जाएंगे."
85 वर्षीय निसंतान राम कुमारी देवी को पालकी में उठाकर ले जाते पड़ोसी

दो हजार में बनाई पालकी, चार कंधों ने उठाई 98 किमी की जिम्मेदारी

राधा देवी, उनके पति मनोज साहनी, पड़ोसन किरण देवी और एक अन्य साथी (जो सभी लखनऊ में रहकर मेहनत-मजदूरी करते हैं) ने अपनी निजी यात्रा को पीछे रखकर बुजुर्ग महिला की इच्छा को प्राथमिकता दी:

  • बांस और खटिया की पालकी: चारों ने मिलकर करीब 2,000 रुपये खर्च किए और बांस व खटिया की मदद से एक मजबूत पालकी तैयार की.
  • बारी-बारी से उठाया कंधा: दो महिलाएं और दो पुरुष लगातार बारी-बारी से पालकी को अपने कंधों पर उठाकर 98 किलोमीटर के पथरीले और कठिन रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं.
  • संकल्प की दृढ़ता: सेवादार किरण देवी और मनोज साहनी का कहना है कि उनका अपना संकल्प बाद में पूरा होगा, पहले दादी का जल बाबा पर चढ़ाना है; चाहे इसके लिए सावन बीतकर भादो ही क्यों न आ जाए.

कांवरिया पथ पर हर आंख हुई नम, इंसानियत की अनूठी मिसाल

सुलतानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर जब यह पालकी कांवरिया पथ पर आगे बढ़ी, तो रास्ते में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं की निगाहें इस दृश्य पर ठहर गईं:

  • 85 साल की राम कुमारी देवी के चेहरे पर बरसों बाद संतोष और बाबा नगरी जाने की असीम खुशी साफ झलक रही थी.
  • श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान शिव की सच्ची पूजा केवल मंदिर में जल चढ़ाना नहीं, बल्कि किसी बेसहारे की आंखों के आंसू पोंछकर उसकी अधूरी उम्मीदों को मंजिल तक पहुंचाना है.


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By शुभंकर

शुभंकर,करियर की शुरुआत दिल्ली के एक पाक्षिक पत्रिका से किया. राष्ट्रीय सहारा के बाद वर्ष 2005 में प्रभात खबर से जुड़ कर लगातार 21 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. अभी प्रभात खबर सुलतानगंज भागलपुर क्षेत्र में काम कर रहे हैं.हर पल बदलते सामाजिक घटनाक्रम पर पैनी नजर रखते हुए नए कंटेंट के साथ खबरों के लिए प्रभात खबर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >