मुख्य बातें:
भागलपुर, सुलतानगंज से शुभंकर की रिपोर्ट
Shravani Mela Preparations: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 के भव्य शंखनाद में अब महज एक महीने (30 दिन) का समय शेष रह गया है. आगामी 30 जुलाई से शुरू होने वाले देश के इस सबसे बड़े धार्मिक समागम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियों के बड़े-बड़े दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है. ऐतिहासिक अजगैबीनाथ गंगा घाट, नमामि गंगे घाट और मुख्य मेला क्षेत्र की वर्तमान स्थिति व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है. सावन की शुरुआत से पहले ही देश-विदेश से शिवभक्तों और कांवड़ियों का सुल्तानगंज पहुंचना शुरू हो जाता है, ऐसे में बुनियादी सुविधाओं की कछुआ चाल श्रद्धालुओं के लिए बड़ी मुसीबत सबब बन सकती है.
पेयजल-शौचालय का अभाव; स्टेशन रोड से लेकर घाटों तक अतिक्रमण का जाल
- मूलभूत सुविधाओं की कमी: अजगैबीनाथ मंदिर घाट और नमामि गंगे घाट पर अब तक न तो पर्याप्त अस्थाई शौचालयों का निर्माण हुआ है और न ही शुद्ध पेयजल (चापाकल व वाटर एटीएम) की मुकम्मल व्यवस्था की जा सकी है. वर्तमान में गंगाजल भरने आ रहे श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
- अतिक्रमण की मार: सुल्तानगंज स्टेशन रोड, अपर रोड, नमामि गंगे घाट रोड, अजगैबीनाथ मंदिर मार्ग तथा मुख्य कच्ची कांवरिया पथ के कई संवेदनशील हिस्सों में अवैध अतिक्रमण जस का तस बरकरार है. सरकारी और मेला आरक्षित भूमि पर स्थाई व अस्थाई दुकानें सजी होने के कारण मुख्य पावन अवधि में भारी भीड़ के दौरान यहां भीषण जाम और भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने की आशंका बनी हुई है. प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस एंटी-एन्क्रोचमेंट (अतिक्रमण हटाओ) ड्राइव शुरू नहीं की गई है.
न समतलीकरण हुआ न सुरक्षा बैरिकेडिंग; स्थानीय लोगों में भारी चिंता
स्थानीय लोगों का कहना है कि कच्चे गंगा घाटों पर कीचड़ की भरमार है और खतरनाक घाटों को चिन्हित कर बैरिकेडिंग व समतलीकरण (लेवलिंग) का कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है. यदि समय रहते इन कार्यों को अमलीजामा नहीं पहनाया गया, तो लाखों की भीड़ को संभालना नामुमकिन हो जाएगा. दूसरी तरफ, संबंधित विभागों के आला अधिकारियों का दावा है कि जुलाई के प्रथम सप्ताह से युद्धस्तर पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा और तय समय सीमा के भीतर सभी बुनियादी आवश्यकताएं पूर्ण कर ली जाएंगी.
Shravani Mela Preparations: कागजी दावों और धरातल की हकीकत में जंग
श्रावणी मेला केवल बिहार ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष की धार्मिक और सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक है, जहाँ हर साल करीब 50 से 60 लाख श्रद्धालु सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का पवित्र जल उठाकर देवघर (झारखंड) स्थित बाबा बैद्यानाथ धाम के लिए पैदल प्रस्थान करते हैं.
इस बार समय बेहद कम है और धरातल पर काम का बोझ बहुत अधिक. ऐसे में जिला प्रशासन और नगर परिषद के सामने चुनौतियां पहाड़ जैसी हैं. अब देखना यह होगा कि फाइलों में दौड़ रही प्रशासनिक मुस्तैदी कितनी तेजी से धरातल पर उतरती है, ताकि सावन में आने वाले शिवभक्तों को एक सुरक्षित और सुविधायुक्त माहौल मिल सके.
