Shravani Mela 2026: भागलपुर. सावन खत्म होते-होते आस्था की ऐसी तस्वीर सामने आयी है, जिसने इस साल के श्रावणी मेला की भव्यता का पूरा आंकड़ा सामने रख दिया है. 29 जुलाई से 28 अगस्त तक कृष्णगढ़ और धांधी बेलारी होकर 1 करोड़ 6 लाख 3 हजार 728 श्रद्धालुओं की आवाजाही दर्ज की गयी. यह आंकड़ा जिला प्रशासन ने ई-पीपल काउंटिंग मशीन से दर्ज किया है.
यानी मेला अवधि में हर दिन औसतन लाखों श्रद्धालु इन प्रमुख मार्गों से होकर बाबाधाम देवघर की ओर बढ़ते रहे. शुक्रवार को श्रावणी मेला के अंतिम दिन जिला प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ों ने इस साल कांवरिया और श्रद्धालुओं की भीड़ की तस्वीर साफ कर दी.
अकेले कृष्णगढ़ से गुजरे 75 लाख से ज्यादा श्रद्धालु
ई-पीपल काउंटिंग मशीन से दर्ज आंकड़ों के मुताबिक कृष्णगढ़ में पूरे मेला अवधि के दौरान 75,01,800 श्रद्धालुओं की आवाजाही हुई.
यह संख्या बताती है कि बाबाधाम जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए कृष्णगढ़ इस पूरे धार्मिक आयोजन के दौरान कितना महत्वपूर्ण मार्ग रहा.
वहीं धांधी बेलारी में 31,01,928 श्रद्धालुओं की आवाजाही दर्ज की गयी.
दोनों प्रमुख स्थलों का आंकड़ा जोड़ने पर कुल संख्या 1,06,03,728 तक पहुंच गयी.
पहली नजर में समझिए कितना बड़ा है यह आंकड़ा
एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की आवाजाही का मतलब सिर्फ धार्मिक उत्साह नहीं है. इतनी बड़ी संख्या में लोगों की लगातार आवाजाही के लिए सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, सुरक्षा, शौचालय, यातायात और भीड़ नियंत्रण जैसी व्यवस्थाओं को लगातार सक्रिय रखना पड़ता है.
श्रावणी मेला के दौरान कृष्णगढ़ और धांधी बेलारी में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन को लगातार भीड़ की स्थिति पर नजर रखनी पड़ी.
इसी वजह से इस बार श्रद्धालुओं की संख्या का आकलन केवल अनुमान के आधार पर नहीं, बल्कि ई-पीपल काउंटिंग मशीन के जरिए किया गया.
आखिर ई-पीपल काउंटिंग मशीन से क्यों गिना गया?
श्रावणी मेला जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं की संख्या का सही आकलन प्रशासन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है. भीड़ कितनी बढ़ रही है और किस स्थान पर दबाव ज्यादा है, इसका पता होने पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को उसी हिसाब से तैयार किया जा सकता है.
ई-पीपल काउंटिंग मशीन से मिले आंकड़ों ने प्रशासन को श्रद्धालुओं की आवाजाही का व्यवस्थित आकलन करने में मदद की.
इससे भीड़ प्रबंधन के साथ सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए आवश्यक इंतजाम करने में भी सहायता मिली.
भीड़ बढ़ी तो प्रशासन ने बढ़ायी निगरानी
श्रावणी मेला के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती रही. बड़ी संख्या में कांवरिया और अन्य श्रद्धालु कृष्णगढ़ तथा धांधी बेलारी के रास्ते बाबाधाम देवघर की ओर जाते रहे.
भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से सुविधा, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर विशेष जोर दिया गया.
प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के साथ ही भीड़ प्रबंधन को लेकर लगातार निगरानी बनाये रखी, ताकि अधिक भीड़ के बावजूद आवागमन प्रभावित न हो.
Shravani Mela 2026: एक महीने की आवाजाही से मिले आंकड़े अब आगे भी आएंगे काम
29 जुलाई से 28 अगस्त की शाम पांच बजे तक दर्ज हुआ यह आंकड़ा केवल इस साल के मेले की भीड़ बताने तक सीमित नहीं है. प्रशासन के लिए यह भविष्य की तैयारियों का आधार भी बन सकता है.
कृष्णगढ़ और धांधी बेलारी में कितने श्रद्धालु पहुंचे, किस अवधि में भीड़ का दबाव अधिक रहा और किस स्तर की व्यवस्था की जरूरत पड़ी, इसका आकलन भविष्य के श्रावणी मेले और दूसरे बड़े आयोजनों की योजना बनाने में उपयोगी हो सकता है.
श्रावणी मेला-2026 के समापन के साथ अब एक महीने तक चली श्रद्धालुओं की आवाजाही का आंकड़ा सामने आ गया है. दो प्रमुख स्थलों से होकर एक करोड़ छह लाख से अधिक श्रद्धालुओं का गुजरना इस साल के मेले में आस्था के विशाल जनसैलाब की तस्वीर पेश करता है.
