सावन की पहली सोमवारी से पूर्व मौसम ने ली करवट, रिमझिम बारिश के बीच मंदिरों में तैयारियां पूरी

भागलपुर में सावन की पहली सोमवारी (3 अगस्त) से पहले मौसम खुशनुमा हो गया है. रिमझिम बारिश के बीच मंदिरों में तैयारियां अंतिम चरण में हैं और शिव भजनों से माहौल भक्तिमय है. किसानों के चेहरों पर भी खुशी है क्योंकि यह बारिश धान की रोपाई के लिए लाभदायक है.

भागलपुर जिले में सावन की पहली सोमवारी (3 अगस्त) से ठीक पहले मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है. शनिवार शाम से ही आसमान में घने काले बादल छाए हुए हैं और कई इलाकों में हल्की बूंदाबांदी व बारिश का दौर जारी है. रविवार सुबह से ही हो रही रिमझिम बारिश के बीच शहर के मंदिरों में पहली सोमवारी की तैयारियां अंतिम चरण में हैं, वहीं हर तरफ बोल-बम और शिव भजनों की गूंज से माहौल भक्तिमय हो उठा है.

मंदिरों में पहली सोमवारी की तैयारियां पूरी, शिव भजनों से गूंजा शहर

3 अगस्त को पडने वाली सावन की पहली सोमवारी को लेकर भागलपुर शहर के सभी प्रमुख शिवालयों और मंदिरों में श्रद्धालुओं के जलाभिषेक एवं दर्शन-पूजन के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं:

  • भक्तिमय माहौल: रविवार सुबह से ही शहर के चौक-चौराहों और मंदिरों के आसपास सावन के पारंपरिक और भक्ति गीतों की मधुर ध्वनि गूंज रही है.
  • श्रद्धालुओं में उत्साह: रिमझिम बारिश और सुहावने मौसम के बीच भक्त जल चढ़ाने और पूजा सामग्री की खरीदारी के लिए बाजारों में पहुंच रहे हैं.

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 'श्रावणी मेला स्पेशल ट्रेन'

सावन माह में कांवरियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पूर्व रेलवे (Eastern Railway) के मालदा डिवीजन द्वारा कई विशेष ट्रेनों के परिचालन की घोषणा की गई है:

  • भागलपुर-किऊल स्पेशल: 3 अगस्त को पहली सोमवारी के अवसर पर भागलपुर से किऊल के बीच 'श्रावणी मेला स्पेशल ट्रेन' का परिचालन किया जाएगा.
  • महीने भर सेवा: सावन के पूरे महीने श्रद्धालुओं की सुगम यात्रा के लिए मालदा रेल मंडल द्वारा कई स्पेशल ट्रेनों को हरी झंडी दी गई है, जिससे देवघर और सुल्तानगंज जाने वाले कांवरियों को बड़ी राहत मिलेगी.

सुहावने मौसम से किसानों के चेहरे खिले

मौसम में आए इस बदलाव और बारिश से जहां एक तरफ तापमान में गिरावट आई है और लोगों को गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ किसानों के चेहरे भी खिल उठे हैं.

बारिश की बूंदें पड़ते ही किसान अपने खेतों में तेजी से धान की रोपनी (बुवाई) के काम में जुट गए हैं. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह मानसूनी बारिश धान की फसल के लिए बेहद लाभदायक साबित होगी.


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लेखक के बारे में

By ललित किशोर मिश्र

ललित किशोर मिश्र प्रिंट माध्यम में 15 वर्षों से व डिजिटल माध्यम में पिछले 3 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के भागलपुर कार्यालय में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, रेलवे और परिहवन में रुचि रखते हैं.

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