भागलपुर जिले के नवगठित नगर पंचायत अकबरनगर में सफाईकर्मियों की बेमियादी हड़ताल रविवार को चौथे दिन भी जारी रही. सफाई एजेंसी द्वारा मजदूरों की संख्या आधी किए जाने के विरोध में सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है. पूरे नगर पंचायत क्षेत्र के 11 वार्डों में कचरा उठाव नहीं होने से जगह-जगह कूड़े के ऊंचे ढेर लग गए हैं. स्थिति इतनी बदहाल रही कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर भी नगर पंचायत प्रशासन को गंदगी और बदबू के बीच ही झंडोत्तोलन करना पड़ा, जिसे लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है.
मजदूरों की संख्या घटाने के विरोध में हड़ताल पर कर्मचारी
नगर पंचायत क्षेत्र में सफाई कार्य का जिम्मा संभाल रही आउटसोर्सिंग एजेंसी के एकतरफा निर्णय के खिलाफ सफाईकर्मियों ने मोर्चा खोल रखा है.
मजदूरों का कहना है कि:
- संख्या घटाने का विरोध: पहले पूरे क्षेत्र की सफाई के लिए 40 से 50 सफाईकर्मी तैनात थे, लेकिन अब एजेंसी ने इसे घटाकर महज 20 कर दिया है.
- बेरोजगारी और काम का बोझ: कर्मचारियों का तर्क है कि इस फैसले से आधे मजदूर सीधे तौर पर बेरोजगार हो जाएंगे, वहीं काम पर रखे गए 20 कर्मचारियों पर दोगुना कार्यभार आ जाएगा.
- पूर्ववत व्यवस्था की मांग: हड़ताली मजदूरों की स्पष्ट मांग है कि जब तक सभी पुराने सफाईकर्मियों को काम पर वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
मोहल्लों में सड़ांध, बीमारियों के फैलने की आशंका
लगातार चार दिनों से घर-घर से कचरा उठाव और मुख्य सड़कों की झाड़ू-सफाई बंद है:
- वार्डों के मुख्य चौराहों और गलियों में सड़ता हुआ कचरा जमा होने से तेज दुर्गंध फैल रही है.
- स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों का रास्ते से गुजरना दूभर हो गया है.
- लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही सफाई शुरू नहीं हुई तो इलाके में संक्रामक बीमारियां फैलने का गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा.
फंड की कमी और आवंटन न मिलने से घटी संख्या: प्रशासन
सफाई संकट को लेकर नगर पंचायत प्रशासन ने फंड की अनुपलब्धता को मुख्य वजह बताया है:
- स्वच्छता अपशिष्ट पदाधिकारी: ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि वर्तमान में नगर पंचायत के पास पर्याप्त वित्तीय राशि उपलब्ध नहीं है. इसी वित्तीय संकट के चलते फिलहाल सीमित संख्या (20 सफाईकर्मियों) के साथ सफाई कार्य संचालित करने का निर्णय लिया गया था.
- कार्यपालक पदाधिकारी: ईओ निशान्त कुमार ने स्पष्ट किया कि विभाग से अभी जरूरी बजट आवंटन प्राप्त नहीं हुआ है. साथ ही, बार-बार वेतन भुगतान को लेकर होने वाली हड़तालों की पृष्ठभूमि में व्यवस्था को संभालने के लिए सीमित मजदूरों से कार्य कराने का अस्थायी फैसला लिया गया है.
