भागलपुर से डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का था गहरा नाता: 1945 में जब CMS स्कूल मैदान पहुंचे थे पूर्व राष्ट्रपति, भाषण के लिए ब्रिटिश हुकूमत ने दी थी आधे दिन की छुट्टी

भागलपुर का डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन से रहा गहरा ऐतिहासिक नाता. 1945 में जब वे इस शहर में आए थे, तब ब्रिटिश प्रशासन ने उनके सम्मान में आधे दिन का सरकारी अवकाश घोषित किया था. राष्ट्रकवि दिनकर और पंडित निशिकांत मिश्र के निमंत्रण पर हुए इस दौरे के कई अनछुए पहलू.

देश के महान दार्शनिक, प्रख्यात शिक्षक, प्रथम उपराष्ट्रपति एवं द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की पावन जयंती 5 सितंबर को देशभर में शिक्षक दिवस (Teachers' Day) के रूप में मनाई जाती है. अंगनगरी भागलपुर की धरती से डॉ. राधाकृष्णन का ऐतिहासिक और आत्मीय जुड़ाव रहा है, जिसके बारे में आज की पीढ़ी बहुत कम जानती है. साल 1945 में स्वतंत्रता सेनानी पंडित निशिकांत मिश्र और राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के विशेष आमंत्रण पर डॉ. राधाकृष्णन भागलपुर पधारे थे. उस दौर में ब्रिटिश हुकूमत ने उनके सम्मान में आधे दिन का सरकारी अवकाश घोषित किया था. वहीं दूसरी ओर, शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में भागलपुर के बाजारों में अपने पसंदीदा गुरुजनों के लिए उपहार और स्मृति चिह्न खरीदने के लिए छात्र-छात्राओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है.

बीएचयू से जुड़ा था नाता, दिनकर और निशिकांत मिश्र के बुलावे पर आए भागलपुर

बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष एवं प्रख्यात शिक्षाविद् राजीवकांत मिश्रा ने डॉ. राधाकृष्णन के भागलपुर आगमन के ऐतिहासिक संस्मरण साझा किए:

  • बीएचयू से उपजी प्रगाढ़ता: स्वतंत्रता संग्राम में जेल जाने के कारण पंडित निशिकांत मिश्रा का दाखिला जब स्थानीय कॉलेजों में नहीं हुआ, तब उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में प्रवेश लिया. वे विश्वविद्यालय संसद के सदस्य बने और तत्कालीन कुलपति डॉ. राधाकृष्णन के संपर्क में आए.
  • 1945 का ऐतिहासिक दौरा: पंडित निशिकांत मिश्र के आग्रह और आगे चलकर तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) के कुलपति बने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के विशेष आमंत्रण पर डॉ. राधाकृष्णन 1945 में भागलपुर पहुंचे.

जब मंच की सजावट पूरी होने से पहले ही शुरू कर दिया था संबोधन

समय की पाबंदी (Punctuality) को लेकर डॉ. राधाकृष्णन ने भागलपुरवासियों को जीवनभर का सबक दिया था:

  • आधे दिन की सरकारी छुट्टी: एक शिक्षक के रूप में उनका कद इतना विशाल था कि ब्रिटिश शासन के दौरान भी उनकी जनसभा को लेकर जिले में आधे दिन का अवकाश घोषित किया गया था.
  • सीएमएस स्कूल मैदान में सीख: आदमपुर स्थित सीएमएस स्कूल मैदान में उनकी आम सभा तय थी. आयोजक मंच और पंडाल सजा ही रहे थे कि डॉ. राधाकृष्णन ठीक समय पर मंच पर पहुंच गए. उन्होंने आयोजकों से कहा— "आप जिस भी स्थिति में हैं, कार्यक्रम फौरन शुरू करें. मैं समय का बहुत सम्मान करता हूं. समय को पकड़ना सीखें, तभी समय आपका साथ देगा."
  • पुस्तकालय में उपस्थिति: सभा के बाद वे सावित्री मिश्रा द्वारा स्थापित 'भारतीय पुस्तकालय' गए और वहां अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के उपरांत शिव भवन में चाय-नाश्ता ग्रहण किया.

ऐतिहासिक संस्मरण: मुख्य बिंदु एक नज़र में

ऐतिहासिक पहलू (Key Aspects)ऐतिहासिक विवरण व तथ्य (Historical Details)
विशिष्ट अतिथिडॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (तत्कालीन बीएचयू कुलपति, बाद में भारत के राष्ट्रपति)
भागलपुर आगमन का वर्षवर्ष 1945
आमंत्रणकर्तास्वतंत्रता सेनानी पंडित निशिकांत मिश्र एवं राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर
जनसभा स्थलसीएमएस हाई स्कूल मैदान, आदमपुर (भागलपुर)
प्रशासनिक कदमतत्कालीन ब्रिटिश प्रशासन द्वारा भागलपुर में आधे दिन का सरकारी अवकाश घोषित
दौरा किए गए अन्य स्थलआदमपुर स्थित भारतीय पुस्तकालय एवं शिव भवन
टीचर्स डे को लेकर सजा गिफ्ट बाजार. | Prabhat Khabar Network

टीचर्स डे को लेकर सजा तोहफों का बाजार, छात्रों में जबर्दस्त उत्साह

शिक्षक दिवस को लेकर भागलपुर शहर के स्टेशन चौक, खलीफाबाग, वेरायटी चौक, तिलकामांझी और घंटाघर के गिफ्ट शोरूम में खासी रौनक देखने को मिल रही है:

  • विशेष डिस्काउंट और ऑफर्स: गिफ्ट शोरूम संचालक ममता बाजोरिया ने बताया कि कृष्ण जन्माष्टमी और शिक्षक दिवस के दोहरे अवसर पर उपहारों पर विशेष डिस्काउंट दिए जा रहे हैं.
  • पसंदीदा तोहफों की मांग: छात्र अपने गुरुजनों को सम्मानित करने के लिए कस्टमाइज्ड और उपयोगी चीजें प्राथमिकता से चुन रहे हैं.

शिक्षक दिवस पर इस बार क्या है ट्रेंडिंग?

  • पर्सनलाइज्ड कलम (Customized Pen): शिक्षकों की पहली पसंद कलम होती है. इस बार मेटल बॉडी पेन पर शिक्षक का नाम और प्रेरक संदेश उकेरकर देने का सबसे ज्यादा क्रेज है.
  • क्लासरूम स्टेशनरी सेट: आकर्षक डिब्बों में पैक स्टिकी नोट्स, पेपर क्लिप्स, मार्कर और हाईलाइटर्स के सेट काफी बिक रहे हैं, जो शिक्षकों के दैनिक कार्य में काम आते हैं.
  • पर्सनलाइज्ड मग व कोट्स: 'बेस्ट टीचर एवर' या ज्ञानवर्धक कोट्स लिखे सेरेमिक मग की भारी मांग है.
  • इको-फ्रेंडली मिनी प्लांट्स: पर्यावरण के प्रति जागरूक छात्र टेबल डेस्क पर रखने योग्य इनडोर मिनी प्लांट्स (जैसे जेड प्लांट, मनी प्लांट, स्नेक प्लांट) उपहार स्वरूप दे रहे हैं, जिन्हें न्यूनतम रखरखाव की दरकार होती है.
  • थीम व मटकी केक: जन्माष्टमी और टीचर्स डे को मिलाकर स्कूल और कोचिंग संस्थानों में विशेष रूप से डिजाइन किए गए ब्लैकबोर्ड, बुक थीम और मटकी केक की एडवांस बुकिंग हुई है.

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लेखक के बारे में

By दीपक कुमार राव

दीपक कुमार राव प्रिंट माध्यम में 18 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 वर्षों से एक्टिव हैं. प्रभात खबर के भागलपुर कार्यालय में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, कला-संस्कृति व सामाजिक कार्य में रुचि रखते हैं.

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