गोपालपुर : त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने की तैयारी कर रहे संभावित प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ती जा रही है. पंचायत चुनाव निर्धारित समय पर होंगे या नहीं, इसे लेकर अब तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. चुनावी तैयारियों के बीच परिसीमन और आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया में हो रही देरी ने दावेदारों का चुनावी गणित उलझा दिया है.
दिसंबर 2026 में पूरा होना है पंचायतों का कार्यकाल
बिहार में वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल दिसंबर 2026 में पूरा होना है. पहले समय पर चुनाव कराने की तैयारी की चर्चा थी, लेकिन परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया में देरी के कारण अब दिसंबर तक चुनाव संपन्न होने पर भी सवाल उठ रहे हैं.
जुलाई में सामने आयी जानकारी के अनुसार, करीब 32 साल बाद पंचायतों के परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया था. नए परिसीमन के आधार पर चुनाव कराने की स्थिति में चुनाव कार्यक्रम और आगे खिसकने की आशंका जतायी जा रही है.
परिसीमन और आरक्षण पर सबसे बड़ा सवाल
संभावित प्रत्याशियों के सामने फिलहाल कई सवाल हैं :
- परिसीमन की प्रक्रिया कब अंतिम रूप लेगी?
- नया आरक्षण रोस्टर कब जारी होगा?
- कौन-सी पंचायत या सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित होगी?
- चुनाव की अंतिम तारीख कब घोषित होगी?
राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर पंचायत परिसीमन 2026 की प्रक्रिया दर्ज है, लेकिन चुनाव कार्यक्रम और अंतिम तिथि को लेकर अभी स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आयी है.
हाईकोर्ट के आदेश से आरक्षण का मुद्दा अहम
पंचायत चुनाव में आरक्षण को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण हो गयी है. पटना हाईकोर्ट के हालिया आदेश के बाद सरकारी नौकरियों में लागू आरक्षण संबंधी प्रावधानों को पंचायत चुनाव में उसी रूप में लागू करने को लेकर स्थिति बदल गयी है. अदालत ने इससे जुड़े कुछ सरकारी आदेशों को भी निरस्त किया है.
अब सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के अगले कदम पर निगाह है. आरक्षण का नया स्वरूप स्पष्ट होने के बाद ही संभावित प्रत्याशियों को पता चलेगा कि उनकी सीट किस श्रेणी में रहेगी.
दावेदारों का चुनावी गणित उलझा
मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, सरपंच और वार्ड सदस्य पद के संभावित दावेदार महीनों से अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हैं. कई लोग जनसंपर्क और चुनावी तैयारियां भी शुरू कर चुके हैं, लेकिन परिसीमन और आरक्षण की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से वे अंतिम रणनीति तय नहीं कर पा रहे हैं.
कई दावेदारों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि जिस क्षेत्र से वे चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, वह चुनाव तक उसी स्वरूप में रहेगा भी या नहीं.
वर्तमान प्रतिनिधियों के लिए देरी राहत भरी
दूसरी ओर पंचायत चुनाव में संभावित देरी को मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है. चुनाव टलने की स्थिति में वर्तमान प्रतिनिधियों को पद पर बने रहने के लिए अतिरिक्त समय मिलने की चर्चा राजनीतिक हलकों में शुरू हो गयी है.
फिलहाल पंचायत चुनाव की तारीख, परिसीमन और आरक्षण तीनों पर स्पष्टता नहीं है. ऐसे में गांव की राजनीति में चुनावी हलचल के साथ इंतजार भी बढ़ता जा रहा है.
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