सुलतानगंज में गंगा स्नान के दौरान बालक डूबा, घंटों नहीं पहुंची रेस्क्यू टीम, मचा कोहराम

Namami Gange Tragedy: श्रावणी मेला से पहले सुलतानगंज के नामामि गंगे घाट पर हुई यह घटना प्रशासन की तैयारियों और घाटों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रही है.

सुलतानगंज, भागलपुर से रिपोर्ट

Namami Gange Tragedy: सुलतानगंज के नामामि गंगे घाट पर रविवार को गंगा स्नान के दौरान एक 13 वर्षीय बालक गहरे पानी में डूबकर लापता हो गया. घटना के बाद घाट पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और परिजनों की चीख-पुकार से पूरा क्षेत्र गूंज उठा.

जानकारी के अनुसार, अबजूगंज के गंगापुर अठगामा गांव निवासी रमन कुमार अपने परिजनों के साथ गंगा स्नान करने के लिए घाट पर पहुंचा था. स्नान के दौरान अचानक उसका पैर फिसल गया और वह घाट के पास मौजूद गहरी खाई में जा गिरा. देखते ही देखते बालक पानी में लापता हो गया.

चीखते रहे परिजन, लेकिन मदद को आगे नहीं आया कोई

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बालक के डूबने के बाद परिजन लगातार शोर मचाते रहे और लोगों से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन खाई की गहराई अधिक होने के कारण कोई भी व्यक्ति पानी में उतरने की हिम्मत नहीं जुटा सका.

परिजनों ने बताया कि उन्हें घाट पर मौजूद गहरी खाई की जानकारी नहीं थी. पानी में उतरते ही पैरों के नीचे की मिट्टी खिसक गई और बालक सीधे गहरे पानी में चला गया.

Namami Gange Tragedy: दो घंटे तक नहीं पहुंची बचाव टीम

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने तत्काल अंचलाधिकारी, थाना पुलिस और एसडीआरएफ टीम को सूचना दी. आरोप है कि सूचना दिए जाने के बावजूद करीब दो घंटे तक बचाव दल मौके पर नहीं पहुंचा, जिससे लोगों में नाराजगी देखी गई.

सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों और परिजनों का कहना है कि घाट काफी खतरनाक होने के बावजूद वहां किसी प्रकार का चेतावनी बोर्ड या गहरे पानी की जानकारी देने वाला संकेतक नहीं लगाया गया है. साथ ही नियमित रूप से एसडीआरएफ टीम की तैनाती भी नहीं रहती है.

श्रावणी मेला से पहले प्रशासन के लिए चेतावनी

एक माह बाद श्रावणी मेला शुरू होने वाला है, जिसमें प्रतिदिन लाखों कांवरिया इसी घाट पर स्नान कर गंगाजल भरते हैं. ऐसे में यदि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत नहीं किया गया तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता.

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि घाटों पर चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, खतरनाक क्षेत्रों को चिन्हित किया जाए और श्रावणी मेला शुरू होने से पहले एसडीआरएफ तथा बचाव दल की स्थायी तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा बनी रहे.

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Author: Shubhanka Kumar

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