Nag Panchami 2026 : नाग पंचमी के अवसर पर भागलपुर के विषहरी मंदिरों, बूढ़ानाथ मंदिर और चंपानगर स्थित ऐतिहासिक विषहरी स्थान पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगेगा. श्रद्धालु नाग देवता, मां विषहरी और बिहुला की पूजा-अर्चना कर दूध, लावा और डलिया अर्पित करेंगे. वहीं बूढ़ानाथ, शिव शक्ति, भूतनाथ और कूपेश्वरनाथ सहित विभिन्न शिवालयों में भी भगवान शिव और नाग देवता की विशेष पूजा होगी. मान्यता है कि भगवान शिव के मस्तक पर नागराज विराजमान हैं, इसलिए इस दिन शिव पूजा का विशेष महत्व होता है.
बेड़ा पंचमी से जुड़ी है अंग प्रदेश की अनूठी पहचान
अंग क्षेत्र में नाग पंचमी को 'बेड़ा पंचमी' के रूप में मनाने की परंपरा सदियों पुरानी है. यह पर्व बिहुला-विषहरी लोकगाथा और मां मनसा की आराधना से जुड़ा हुआ है. विषहरी पूजा महासमिति के अनुसार नाग पंचमी पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिरों में विशेष तैयारियां की जा रही हैं. चंपानगर स्थित मुख्य विषहरी स्थान पर पारंपरिक विधि-विधान से पूजा होगी और श्रद्धालु डलिया अर्पित करेंगे. लोकमान्यता है कि इस दिन ओझा और गुनी भी अपने मंत्रों की सिद्धि के लिए यहां विशेष अनुष्ठान करते हैं.
महासती नेतुला धोबिन की भी होती है विशेष पूजा
बेड़ा पंचमी का विशेष संबंध महासती नेतुला धोबिन से भी माना जाता है. लोककथाओं के अनुसार उन्होंने अपनी साधना, सेवा और देवी मनसा के प्रति अटूट भक्ति से विशेष स्थान प्राप्त किया था. मान्यता है कि वही बिहुला को स्वर्ग तक ले जाने का माध्यम बनी थीं, जिसके बाद देवी मनसा ने उन्हें अपने साथ पूजित होने का वरदान दिया. इसी कारण इस दिन मां मनसा के साथ महासती नेतुला धोबिन की भी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है.
बदलते समय में परंपरा बरकरार, लेकिन घटी सहभागिता
सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार समय के साथ बेड़ा पंचमी में भाग लेने वाले लोगों की संख्या पहले की तुलना में कम हुई है, लेकिन यह परंपरा आज भी जीवंत है. चंपानगर के प्राचीन मां मनसा मंदिर में आज भी प्राचीन रीति-रिवाज, मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न होती है. यह पर्व अंग प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, लोकआस्था और सामाजिक समरसता का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है.
