भागलपुर जिले के नगर पंचायत अकबरनगर में सफाई कर्मियों और सुपरवाइजरों को हटाए जाने का विवाद अब गहराता जा रहा है. यह मामला शनिवार को नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा के पास पहुंच गया. पीड़ित सुपरवाइजरों ने मंत्री को लिखित आवेदन सौंपकर नई आउटसोर्सिंग एजेंसी की मनमानी पर रोक लगाने, सेवा बहाल करने और विगत सात महीनों के बकाए वेतन भुगतान की गुहार लगाई है. मंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांचोपरांत सख्त कार्रवाई और नगर पंचायत प्रशासन से स्पष्टीकरण (शोकॉज) पूछने का भरोसा दिलाया है.
नई एजेंसी की मनमानी और नौकरी से बेदखली का आरोप
सुपरवाइजरों ने सौंपे गए आवेदन में आरोप लगाया है कि वे सभी वर्ष 2021 से नगर पंचायत अकबरनगर में पूरी निष्ठा के साथ सफाई कार्य की देखरेख कर रहे हैं:
- अचानक हटाने का फरमान: नई एजेंसी के आते ही यह फरमान सुना दिया गया कि अब केवल बीए (ग्रेजुएट) पास कर्मियों को ही कार्य पर रखा जाएगा और पुराने कर्मियों को जबरन हटा दिया गया.
- रोजी-रोटी का संकट: अचानक सेवामुक्त किए जाने और पिछले 7 महीनों से वेतन न मिलने के कारण कर्मचारियों के परिवारों के समक्ष भरण-पोषण और भुखमरी की नौबत आ गई है.
- विभागीय निर्देशों की अनदेखी: कर्मियों का कहना है कि नगर विकास विभाग के स्पष्ट निर्देश थे कि नई एजेंसी के चयन के बाद भी पुराने कर्मचारियों को नहीं हटाया जाएगा, परंतु एजेंसी ने इन आदेशों की धज्जियां उड़ा दीं.
अधिकारियों पर आवेदन की रिसीविंग न देने का आरोप
पीड़ित कर्मियों ने नगर पंचायत के अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी और कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि जब वे अपनी समस्याओं को लेकर कार्यालय पहुंचे, तो अधिकारियों ने उनके लिखित आवेदन की पावती (रिसीविंग) तक देने से मना कर दिया.
कार्यपालक पदाधिकारी का तर्क और मंत्री का आश्वासन
पूरे प्रकरण पर नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी निशान्त कुमार ने कहा कि सफाई का जिम्मा नई एजेंसी को सौंपा गया है और एजेंसी को जिससे काम कराना है वह कराएगी; कार्यालय को केवल काम पूरा होने से सरोकार है.
दूसरी ओर, नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने पीड़ित कर्मियों की शिकायत को गंभीरता से सुना. उन्होंने कर्मियों को आश्वस्त किया कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और विभागीय नियमों की अनदेखी करने पर नगर पंचायत से शोकॉज पूछकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी.
