Bhagalpur. मनराजी लीची को वैश्विक बाजार में पहुंचाने की उठने लगी मांग

अब भागलपुर के नवगछिया अनुमंडल की ‘मनराजी लीची’ को जीआई टैग दिलाने की मांग एक बार फिर तेज हो गयी है.

भागलपुर से दीपक राव की रिपोर्ट :

मुजफ्फरपुर की शाही लीची के बाद अब भागलपुर के नवगछिया अनुमंडल की ‘मनराजी लीची’ को जीआई (GI) टैग दिलाने की मांग एक बार फिर तेज हो गयी है. स्थानीय लीची उत्पादकों ने जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार से इसे खास पहचान देने की गुहार लगायी है. किसानों का मानना है कि अगर इस अनूठी लीची को जीआई टैग मिलता है, तो इसकी मांग देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बड़े पैमाने पर बढ़ जायेगी.

बाजार की कमी और एयरपोर्ट का अधूरा सपना

स्थानीय किसान और लीची एक्सपोर्टर चंदन कुमार सिंह ने क्षेत्र की जमीनी हकीकत को बयां करते हुए कहा कि बाजार की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण लीची सही समय पर सही जगह नहीं पहुंच पा रही है. उन्होंने दर्द बयां करते हुए कहा, हमारे लिए सबसे बड़ी समस्या एयरपोर्ट की है. भागलपुर में एयरपोर्ट की सुविधा नहीं होना एक ऐसा सपना लग रहा है जो अब तक अधूरा है. अगर एयर कनेक्टिविटी होती, तो हमारी लीची चंद घंटों में वैश्विक बाजारों में चमक रही होती.

क्यों खास है ‘मनराजी लीची’?

गंगा के उपजाऊ मैदानी क्षेत्र में स्थित नवगछिया की यह लीची केवल एक फल नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की कृषि विरासत और किसानों की आर्थिक रीढ़ है. पकरा के लीची उत्पादक सौरभ सिंह बताते हैं कि यह किस्म अपनी विशिष्टताओं के कारण उपभोक्ताओं के बीच बेहद लोकप्रिय है.

मनराजी लीची की मुख्य विशेषताएं:

यह लीची अपने आकर्षक चमकीले लाल रंग, मध्यम से बड़े आकार और चिकनी बनावट के लिए जानी जाती है. अपनी उत्कृष्ट और बेजोड़ मिठास के कारण यह हर किसी की पहली पसंद बनी हुई है. इस किस्म के फल आकार में अपेक्षाकृत बड़े (लगभग 22-26 ग्राम) होते हैं और प्रायः गुच्छों में लगते हैं, जिससे इसकी उत्पादकता बढ़ जाती है. इसका छिलका मोटा और अत्यधिक खुरदुरा होता है, जो इसे लंबी दूरी के परिवहन के दौरान सुरक्षित रखने में मदद करता है.

उपजाऊ मिट्टी और अनुकूल मौसम का वरदान

नवगछिया की उपजाऊ दोमट मिट्टी और यहां की खास सूक्ष्म जलवायु (Micro-climate) मनराजी लीची के उत्पादन के लिए अमृत समान है. इसके फल सामान्यतः मई के अंतिम सप्ताह से जून के प्रथम सप्ताह के बीच पककर तैयार हो जाते हैं. यही कारण है कि यह बाजार में सीजन की शुरुआती और मध्यम अवधि की मांग को अकेले दम पर पूरा करने का माद्दा रखती है.

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SANJEEV KUMAR JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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