Sultanganj Shravani Mela: सुलतानगंज. कंधे पर कांवर, तन पर भगवा वस्त्र और आंखों पर काला चश्मा. श्रावणी मेले में कांवरियों का यह बदला हुआ अंदाज इन दिनों कांवरिया पथ से लेकर मेला क्षेत्र तक लोगों का ध्यान खींच रहा है. ‘बोल बम’ के जयघोष के बीच युवाओं के बीच ब्लैक सनग्लास अब सिर्फ धूप से बचने का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यात्रा के दौरान स्टाइल और पहचान का हिस्सा भी बनता दिख रहा है.
खास बात यह है कि इस पूरे अंदाज के लिए कांवरियों को ज्यादा खर्च भी नहीं करना पड़ रहा. मेला क्षेत्र में सिर्फ 50 रुपये में स्टाइलिश काला चश्मा मिल रहा है. तेज धूप में लंबी पैदल यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं के लिए यह कीमत और उपयोगिता दोनों लिहाज से आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.
कांवर के साथ काला चश्मा बना नया स्टाइल स्टेटमेंट
कांवरिया पथ पर इन दिनों अस्थायी चश्मे की दुकानों पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखी जा रही है. दुकान पर पहुंचते ही युवा कांवरिये अलग-अलग फ्रेम और डिजाइन के चश्मे आजमा रहे हैं. पसंद आने पर चश्मा खरीदते हैं और फिर दोस्तों के साथ फोटो और सेल्फी का दौर शुरू हो जाता है.
भगवा कपड़े, कंधे पर कांवर और आंखों पर ब्लैक सनग्लास का यह कॉम्बिनेशन पारंपरिक कांवर यात्रा में आधुनिक रंग जोड़ रहा है. खासकर युवाओं में मॉडर्न फ्रेम और ब्लैक लुक को लेकर ज्यादा उत्साह देखने को मिल रहा है.
हालांकि, इस आकर्षण के पीछे केवल फैशन नहीं है. तेज धूप में कई किलोमीटर पैदल चलने वाले कांवरियों के लिए आंखों को सीधी धूप से बचाना भी जरूरी है. ऐसे में 50 रुपये का चश्मा उन्हें उपयोगिता और स्टाइल दोनों का विकल्प दे रहा है.
50 रुपये में धूप से राहत, चेहरे पर नया अंदाज
श्रावणी मेले में कांवरियों की यात्रा आसान नहीं होती. लंबी दूरी तक पैदल चलना, गर्मी और तेज धूप के बीच लगातार आगे बढ़ना श्रद्धालुओं के लिए चुनौतीपूर्ण होता है. ऐसे में धूप से आंखों को बचाने के लिए चश्मे की मांग बढ़ना स्वाभाविक है.
स्थानीय दुकानदारों के अनुसार, कम कीमत होने के कारण कांवरिये इसे आसानी से खरीद लेते हैं. कई युवा तो यात्रा शुरू करने से पहले ही चश्मा खरीद रहे हैं, जबकि कुछ रास्ते में धूप बढ़ने पर इसकी तलाश कर रहे हैं.
यानी जिस चश्मे की शुरुआत धूप से बचाव के लिए होती है, वह कुछ ही देर में यात्रा की तस्वीरों और सोशल मीडिया के लिए स्टाइल का हिस्सा बन जाता है.
महानगरों से सुलतानगंज पहुंच रही चश्मों की खेप
कांवरियों के बीच बढ़ी मांग का असर स्थानीय कारोबार पर भी दिखाई दे रहा है. कारोबारियों के मुताबिक सुलतानगंज में करीब 6 से 7 थोक विक्रेता चश्मों की आपूर्ति कर रहे हैं, जबकि मेला क्षेत्र और कांवरिया मार्ग में करीब 200 खुदरा दुकानदार इसकी बिक्री में लगे हैं.
मांग को पूरा करने के लिए पटना, दिल्ली, जयपुर, कोलकाता और मुंबई जैसे शहरों से लगातार चश्मों की खेप मंगायी जा रही है. इससे साफ है कि श्रावणी मेले में कांवरियों की बदलती पसंद ने छोटे कारोबारियों के लिए भी बाजार का एक नया अवसर तैयार किया है.
एक दिन में करीब 10 हजार चश्मे बिकने का दावा
स्थानीय कारोबारियों का दावा है कि मेला क्षेत्र से लेकर कच्चे कांवरिया पथ तक चश्मों की बिक्री तेज है. उनके अनुसार, एक दिन में करीब 10 हजार चश्मे बिक रहे हैं.
कारोबारियों का दावा है कि पिछले 14 दिनों में 1.40 लाख से अधिक चश्मों की बिक्री हो चुकी है. हालांकि, यह आंकड़ा कारोबारियों के दावे पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
इनमें ब्लैक फ्रेम और मॉडर्न डिजाइन वाले चश्मों की मांग सबसे ज्यादा बतायी जा रही है. युवाओं के अलावा दूसरे कांवरिये भी धूप से राहत के लिए इन्हें खरीद रहे हैं.
बदलते श्रावणी मेले की तस्वीर भी दिखा रहा यह ट्रेंड
श्रावणी मेला सिर्फ आस्था का बड़ा केंद्र नहीं है, बल्कि हर साल बदलती सामाजिक और कारोबारी तस्वीर भी यहां दिखाई देती है. इस बार कांवरिया पथ पर काला चश्मा इसी बदलाव की एक दिलचस्प झलक पेश कर रहा है.
एक तरफ श्रद्धालु पारंपरिक तरीके से कांवर लेकर ‘बोल बम’ का जयघोष करते हुए बाबाधाम की ओर बढ़ रहे हैं. दूसरी तरफ युवाओं का एक वर्ग उसी यात्रा में आधुनिक फैशन और सोशल मीडिया संस्कृति का रंग भी जोड़ रहा है.
50 रुपये का यह छोटा सा चश्मा इसलिए खास बन गया है क्योंकि इससे कांवरियों को धूप से राहत मिल रही है, वहीं युवा इसे अपने लुक का हिस्सा बनाकर यात्रा की यादों को तस्वीरों में भी सहेज रहे हैं.
Sultanganj Shravani Mela:मेले के कारोबार में जुड़ा नया रंग
श्रावणी मेले के दौरान फूल-माला, कांवर, पूजा सामग्री, खान-पान और कपड़ों के साथ अब चश्मे का कारोबार भी स्थानीय बाजार का हिस्सा बन गया है. बढ़ती मांग से थोक और खुदरा कारोबारियों को फायदा मिल रहा है.
कांवरिया पथ पर बदलती जरूरतों के मुताबिक छोटे दुकानदार भी अपने सामान में बदलाव कर रहे हैं. इस बार ब्लैक सनग्लास ने इसी बदलते बाजार में अपनी जगह बना ली है.
आस्था की इस लंबी यात्रा में कांवरियों के लिए काला चश्मा फिलहाल धूप से बचाव का साधन भी है और युवाओं के लिए ‘बोल बम’ लुक का नया स्टाइल स्टेटमेंट भी.
