उत्तरवाहिनी गंगा से बाबाधाम तक आस्था की डगर पर लाखों कदम, 'बोल बम' के जयघोष से दूर होती थकान

भागलपुर के सुल्तानगंज से देवघर तक की कांवर यात्रा का अद्भुत मंजर. 'बोल बम' के जयघोष से गूंजती आस्था, शिवभक्तों की अथक पदयात्रा और मार्ग में मिलने वाली सेवा के अनूठे अनुभव को जानें.

भागलपुर के सुल्तानगंज में दोपहर की चिलचिलाती धूप हो या रिमझिम बारिश, कांवरिया पथ पर कदमों की आहट लगातार तेज होती जा रही है. कहीं कांवर में बंधी घंटियों की मधुर छन-छन सुनाई दे रही है, तो कहीं केसरिया वस्त्रों में रंगे शिवभक्तों की अंतहीन कतारें. हर कुछ कदम पर गूंजता ‘बोल बम... बोल बम... हर-हर महादेव’ का जयघोष पूरे माहौल को भक्तिमय बना रहा है. अजगैवीनाथ की पवित्र उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर करीब 98 किलोमीटर दूर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग पर जलाभिषेक करने के लिए आस्था का अद्भुत जनसैलाब उमड़ पड़ा है.

कांवर उठते ही दुनियादारी की चिंताएं पीछे छूटीं

कांवरिया बनना महज एक यात्रा की शुरुआत नहीं, बल्कि आत्मा के भीतर उतरने का एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव है. कांवर कंधे पर आते ही भक्तों के लिए जीवन का दृष्टिकोण बदल जाता है:

  • तनाव से मुक्ति: न कारोबार का नुकसान याद रहता है और न ही नौकरी या घर-परिवार की आपाधापी; मन में सिर्फ बाबा का नाम बस जाता है.
  • शिव से सीधा जुड़ाव: कांवरिया पथ पर आगे बढ़ रहे श्रद्धालु राघव कुमार बताते हैं कि कांवर उठाने के बाद शिव से जुड़ने की जो अनुभूति होती है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. ऐसा लगता है मानो महादेव के साथ सीधा साक्षात्कार हो रहा हो.

गंगाजल की एक बूंद और उम्मीदों का विशाल संसार

राधा देवी कहती हैं कि बाबा के चरणों में श्रद्धा से गंगाजल की एक बूंद अर्पित करने का विश्वास ही बहुत बड़ा सहारा है. भक्तों का दृढ़ भरोसा है कि बाबा अपने द्वार पर आए किसी भी भक्त को खाली हाथ नहीं लौटाते:

  • कोई परिवार की सुख, शांति और समृद्धि की कामना लेकर आया है.
  • कोई गंभीर बीमारियों और संकटों से मुक्ति पाने के लिए पदयात्रा कर रहा है.
  • युवा अच्छी नौकरी और कारोबार में तरक्की की आस लिए बाबा के दर पर हाजिरी लगाने पहुंचे हैं.

सेवा में भी झलकती है अनूठी शिवभक्ति

बाबाधाम जा रहे कांवरियों के साथ-साथ मार्ग में उनकी सेवा में जुटे लोग भी इस महायज्ञ का अभिन्न हिस्सा बने हुए हैं. पूरे कांवरिया पथ पर जगह-जगह निशुल्क सेवा शिविर लगे हैं:

  • कहीं शीतल पेयजल और शिकंजी का वितरण हो रहा है, तो कहीं ताजे फल बांटे जा रहे हैं.
  • स्वयंसेवक थके-हारे कांवरियों के पैरों की मालिश और प्राथमिक चिकित्सा में जुटे हैं.
  • सेवादार दिलीप कुमार रंजन बताते हैं कि कांवरियों की सेवा करना साक्षात भगवान शिव की सेवा करने के समान है. उनके लिए यह सेवा महज व्यवस्था नहीं, बल्कि सच्ची साधना है.

'बोल बम' का जयघोष: थकान की सबसे बड़ी दवा

कांवरिया पथ पर सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करते हुए जब पैर जवाब देने लगते हैं, तब सहयात्रियों का एक ही नारा गूंजता है—'बोल बम'. यह उद्घोष थके पैरों में नई ऊर्जा का संचार कर देता है.

लखनऊ से आए कांवरिया विदेंश्वरी बम कहते हैं कि कांवर यात्रा एक बेहद कठिन साधना है. शरीर जरूर थकता है, लेकिन बाबा पर अटूट विश्वास मन को डिगने नहीं देता. जब बैद्यनाथ धाम पहुंचकर ज्योतिर्लिंग पर जल अर्पित होता है, तो सारी थकान एक पल में मिट जाती है.

सुलतानगंज | Prabhat Khabar Network

पौराणिक महत्व: क्यों गंगाजल से ही होता है भगवान शिव का अभिषेक?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:

  • हलाहल विष का प्रभाव: समुद्र मंथन के दौरान जब कालकूट विष निकला, तो सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया, जिससे वे 'नीलकंठ' कहलाए.
  • शीतलता का प्रतीक: विष के तीव्र प्रभाव से महादेव के शरीर में असहनीय जलन होने लगी. भगवान शिव ने मां गंगा को अपनी जटाओं में स्थान दिया है, इसलिए गंगाजल को शीतलता और परम श्रद्धा का प्रतीक मानकर शिव का जलाभिषेक किया जाता है.
  • उत्तरवाहिनी गंगा का महत्व: सुल्तानगंज में गंगा उत्तर दिशा की ओर प्रवाहित होती हैं, जिसे आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत दुर्लभ और फलदायी माना जाता है.

अजगैवीनाथ धाम से उठने वाली यह कांवर यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि समर्पण, आस्था और लोकसंस्कृति का वह संगम है जहां भक्त अपनी हर चिंता भूलकर पूरी तरह महादेव के चरणों में समर्पित हो जाता है.


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लेखक के बारे में

By शुभंकर

शुभंकर,करियर की शुरुआत दिल्ली के एक पाक्षिक पत्रिका से किया. राष्ट्रीय सहारा के बाद वर्ष 2005 में प्रभात खबर से जुड़ कर लगातार 21 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. अभी प्रभात खबर सुलतानगंज भागलपुर क्षेत्र में काम कर रहे हैं.हर पल बदलते सामाजिक घटनाक्रम पर पैनी नजर रखते हुए नए कंटेंट के साथ खबरों के लिए प्रभात खबर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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