भागलपुर स्थित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (JLNMCH) परिसर में पीपीपी (PPP) मोड पर संचालित नेफ्रोप्लस डायलिसिस केंद्र में मरीजों की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. केंद्र में न तो नियमित रूप से नेफ्रोलॉजिस्ट (गुर्दा रोग विशेषज्ञ) उपलब्ध रहते हैं और न ही स्वच्छता मानकों का ठीक से पालन किया जा रहा है. सोमवार को केंद्र की कुव्यवस्था उस वक्त खुलकर सामने आई, जब उपलब्ध सात मशीनों के बावजूद आठ गंभीर मरीजों को डायलिसिस के लिए बुला लिया गया.
सोमवार को केंद्र में उजागर हुई अव्यवस्थाएं
सोमवार को सुबह और दोपहर की शिफ्ट में आठ-आठ मरीजों को बुलाया गया था, लेकिन केंद्र में केवल सात मशीनें ही कार्य कर रही थीं:
- घंटों इंतजार करने को मजबूर मरीज: सुबह 7:00 बजे बुलाए गए मरीजों में से केवल एक मरीज का डायलिसिस समय पर शुरू हो सका. टेक्नीशियन की कमी और सफाई के नाम पर अन्य मरीजों का इलाज सुबह 8:00 बजे के बाद शुरू हुआ.
- सेंटर इंचार्ज की सफाई: इस अव्यवस्था पर सेंटर इंचार्ज राकेश कुमार ने कहा कि गलती से स्लॉट में आठ मरीजों का नाम दर्ज हो गया था. उन्होंने यह भी दावा किया कि रविवार को केंद्र और मशीनों की विशेष सफाई (Deep Cleaning) की गई थी, जिसके कारण सोमवार सुबह थोड़ा विलंब हुआ.
नेफ्रोलॉजिस्ट के अभाव से फॉलोअप प्रभावित
डायलिसिस कराने वाले मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि केंद्र में नियमित रूप से कोई स्थायी नेफ्रोलॉजिस्ट तैनात नहीं है:
मरीजों की शिकायत: "महीने में केवल एक बार बाहर से आने वाले नेफ्रोलॉजिस्ट मरीजों की जांच करते हैं, लेकिन गंभीर मरीजों का समुचित फॉलोअप नहीं लिया जाता. पिछले दो महीनों से व्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है."
जनरेटर में देरी और इंफेक्शन का बड़ा खतरा
केंद्र में सफाई और हाइजीन को लेकर भी भारी लापरवाही बरती जा रही है:
- ब्लड क्लॉटिंग (रक्त जमने) का जोखिम: मरीजों का आरोप है कि बिजली जाने के काफी देर बाद जनरेटर चालू किया जाता है. अगर डायलिसिस के बीच में मशीन बंद होती है, तो मरीज के शरीर से बाहर निकले खून में क्लॉट बनने का खतरा रहता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है.
- अटेंडेंट की अनियंत्रित आवाजाही: अन्य सेंटरों के विपरीत यहां मरीजों के अटेंडेंट बिना किसी रोक-टोक के अंदर प्रवेश कर जाते हैं, जिससे डायलिसिस ले रहे मरीजों में गंभीर इंफेक्शन (संक्रमण) फैलने का खतरा बना रहता है.
JLNMCH उपाधीक्षक ने दिए जांच के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन हरकत में आया है:
- उपाधीक्षक सुरेश प्रसाद का बयान: "यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं था. अब जानकारी मिली है, तो इसकी अपने स्तर से गहन जांच कराई जाएगी. लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी."
