29 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा से शुरू होगा रथयात्रा अनुष्ठान

Jagannath Rath Yatra: भागलपुर के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिरों में 29 जून को 108 घड़े के पवित्र जल से भगवान जगन्नाथ का महास्नान कराया जाएगा, जिसके बाद प्रभु 17 दिनों के लिए ‘अनासार’ में चले जाएंगे.

भागलपुर से दीपक राव की रिपोर्ट

Jagannath Rath Yatra: भागलपुर शहर में 29 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर पारंपरिक और हर्षोल्लास के साथ भगवान श्री जगन्नाथ की स्नान यात्रा आयोजित की जाएगी. इसी के साथ विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा का अनुष्ठान भी प्रारंभ हो जाएगा. शहर के सखीचंद घाट (नया बाजार) स्थित जगन्नाथ मंदिर, गिरधारी साह हाट जगन्नाथ मंदिर और बाटा गली के समीप स्थित जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की प्रतिमाओं को पूरे विधि-विधान से महास्नान कराया जाएगा.

108 घड़ों और औषधीय जल से होगा महास्नान

  • पवित्र नदियों का जल: सखीचंद घाट जगन्नाथ मंदिर के पंडित समीर कुमार मिश्र, पुजारी सौरभ कुमार मिश्र और आनंद मिश्रा सहित 11 ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यह अनुष्ठान होगा. इसके लिए बूढ़ानाथ गंगा तट, सरयू नदी, हरिद्वार की गंगा और पुरी (ओडिशा) के समुद्र जल को मंगाया गया है.
  • औषधीय महास्नान: इस पवित्र जल में हल्दी, सुंगधित इत्र और विशेष जड़ी-बूटियों (औषधियों) को मिलाकर कुल 108 घड़ों से भगवान का अभिषेक किया जाएगा. मान्यता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ स्कंद पुराण में वर्णित 33 करोड़ देवी-देवताओं के साथ अदृश्य रूप में स्नान करते हैं. यह दिन प्रभु का प्राकट्य दिवस (जन्मदिन) भी माना जाता है.

स्नान के बाद बीमार होंगे भगवान, 17 दिनों तक ‘अनासार’ में रहेंगे

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा के भारी स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ बीमार हो जाते हैं. अस्वस्थ होने के कारण उन्हें मुख्य गर्भगृह से हटाकर 17 दिनों के लिए एक अलग कक्ष में रखा जाता है, जिसे मंदिर की भाषा में ‘अनासार’ (आइसोलेशन) कहा जाता है. इस अवधि में भक्तों के लिए दर्शन पूरी तरह बंद रहेंगे और भगवान को केवल जड़ी-बूटियों के काढ़े और सात्विक पथ्य का भोग लगाया जाएगा.

Jagannath Rath Yatra: 16 जुलाई को निकलेगी भव्य रथ यात्रा

17 दिनों के उपचार के बाद भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा से ठीक एक दिन पहले पूरी तरह स्वस्थ होंगे, जिसके बाद रात्रि काल में उनकी विशेष ‘निशा पूजा’ कर उन्हें वापस मुख्य गर्भगृह में लाया जाएगा. इसके बाद 16 जुलाई (आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि) को भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ भव्य रथ पर सवार होकर अपनी मौसी रोहिणी के घर (गुंडिचा मंदिर) के लिए प्रस्थान करेंगे.

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मौसी के घर भगवान द्वितीया तिथि से दशमी तिथि तक प्रवास करेंगे, जहां उन्हें कई तरह के छप्पन भोग और पकवान अर्पित किए जाएंगे. इसके बाद दशमी तिथि की संध्या को प्रभु वापस अपने मुख्य मंदिर लौटेंगे. इस पावन आयोजन को लेकर भागलपुर के सभी जगन्नाथ मंदिरों में रंग-रोगन और सौंदर्यीकरण का काम युद्धस्तर पर शुरू हो गया है.

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By Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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