25 जुलाई तक हर हाल में पूरा होगा इस्माईलपुर–बिंदटोली का कटाव निरोधी कार्य: कार्यपालक अभियंता

गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए, जल संसाधन विभाग ने इस्माईलपुर–बिंदटोली तटबंध पर चल रहे कटाव निरोधी कार्यों को 25 जुलाई तक हर हाल में पूरा करने का निर्देश दिया है. ₹86 करोड़ की लागत से हो रहे इन कार्यों में प्रगति की समीक्षा की गई है.

गंगा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने इस्माईलपुर–बिंदटोली तटबंध पर चल रहे कटाव निरोधी (Erosion Control) कार्यों को 25 जुलाई तक हर हाल में पूरा करने का सख्त निर्देश दिया है. विभागीय अधिकारियों के अनुसार, मानसूनी बारिश के बावजूद काम की रफ्तार धीमी नहीं होने दी जा रही है और मजदूरों को रेनकोट उपलब्ध कराकर युद्धस्तर पर काम लिया जा रहा है.

एजेंडा-134 का ₹22 करोड़ का कार्य पूरा

जल संसाधन विभाग की एजेंडा संख्या-134 के तहत मुख्य सुरक्षा कार्य संपन्न करा लिए गए हैं:

  • 256 मीटर में री-स्टोरेशन: स्पर संख्या-7 और 8 के बीच 256 मीटर की लंबाई में सीट पाइलिंग, बोल्डर एप्रोन, बोल्डर स्लोप, जियो बैग पिचिंग तथा मिट्टी भराई कर तटबंध को पुराने स्वरूप में बहाल कर दिया गया है.
  • लागत: लगभग ₹22 करोड़ की लागत से यह कार्य पूरा किया गया है.

एजेंडा-135 का ₹64 करोड़ का काम अंतिम दौर में

एजेंडा संख्या-135 के तहत ₹64 करोड़ की लागत से 740 मीटर क्षेत्र में सीट पाइलिंग, बोल्डर एप्रोन, बोल्डर स्लोप और मिट्टी भराई का काम कराया जा रहा है:

  • स्पर संख्या-9 पर कार्य: स्पर संख्या-9 के अप एवं डाउन स्ट्रीम तथा नोज के 'डी' भाग में बोल्डर एप्रोन और स्लोप का निर्माण जारी है.
  • ताजा स्थिति: बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया के अनुसार सीट पाइलिंग, बोल्डर एप्रोन तथा मिट्टी भराई पूरी हो चुकी है, जबकि दूसरे लेयर के बोल्डर स्लोप का काम अंतिम चरण में है.
  • ज्ञाप/झल्लू दास टोला में भी काम जारी: रंगरा चौक प्रखंड के ज्ञानी/झल्लू दास टोला में भी ₹20 करोड़ की लागत से कटाव निरोधी कार्य कराया जा रहा है.

"25 जुलाई तक पूरा होगा लक्ष्य": कार्यपालक अभियंता

कटाव निरोधी कार्यों की प्रगति पर बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता ई. गौतम कुमार ने बताया:

कार्यपालक अभियंता ई. गौतम कुमार का बयान: "इस्माईलपुर–बिंदटोली तटबंध पर 25 जुलाई तक हर हाल में कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. बारिश में भी मजदूरों को रेनकोट उपलब्ध कराकर काम कराया जा रहा है. विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने तथा समय पर राशि का आवंटन न मिलने के कारण शुरुआती विलंब हुआ था, लेकिन अब युद्धस्तर पर कार्य जारी है."


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