भागलपुर, नवगछिया. इस्माईलपुर-बिंद टोली तटबंध पर गंगा नदी ने एक बार फिर रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है. रविवार की सुबह स्पर संख्या-7 पर गंगा का जलस्तर 33.10 मीटर दर्ज किया गया. यह वर्ष 2021 में दर्ज अब तक के उच्चतम बाढ़ स्तर 33.50 मीटर से महज 40 सेंटीमीटर कम है. जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि ने तटबंध और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है.
खतरे के निशान से 1.50 मीटर ऊपर बह रही गंगा
जल संसाधन विभाग के अनुसार इस्माईलपुर-बिंद टोली स्पर संख्या-7 पर चेतावनी स्तर 30.60 मीटर और खतरे का निशान 31.60 मीटर है. रविवार सुबह नदी का जलस्तर 33.10 मीटर पहुंच गया, जो खतरे के निशान से 1.50 मीटर ऊपर है. पिछले 12 घंटे में जलस्तर में करीब 20 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गयी है.
छह साल बाद फिर 33 मीटर के पार पहुंचा जलस्तर
इस्माईलपुर-बिंद टोली के लिए वर्ष 2021 की बाढ़ अब तक की सबसे भयावह स्थिति का गवाह रही है. उस वर्ष गंगा का उच्चतम बाढ़ स्तर 33.50 मीटर दर्ज हुआ था. इसी दौरान इस्माईलपुर-बिंद टोली के बीच रिंग बांध में कटाव और टूटने से आसपास के दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में आ गए थे.
अब 2026 में गंगा का जलस्तर एक बार फिर 33 मीटर के पार पहुंच गया है और 2021 के ऐतिहासिक उच्चतम स्तर के बेहद करीब है. इससे तटबंध और आसपास के गांवों में चिंता बढ़ गयी है.
तटबंध के टो पर बढ़ रहा नदी की मुख्य धारा का दबाव
जलस्तर बढ़ने के साथ गंगा की मुख्य धारा का दबाव इस्माईलपुर-बिंद टोली तटबंध और उसके स्परों पर लगातार बढ़ रहा है. हाल के दिनों में स्पर संख्या पांच से सात के आसपास नदी की तेज धारा पहुंचने की स्थिति भी सामने आयी है.
जल संसाधन विभाग के अभियंता तटबंध और स्परों की लगातार निगरानी कर रहे हैं. विभाग की ओर से फिलहाल तटबंध को सुरक्षित बताया जा रहा है, लेकिन जलस्तर में लगातार वृद्धि को देखते हुए चौकसी बढ़ा दी गयी है. जुलाई में विभाग की ओर से हर किलोमीटर पर ग्रामीण सुरक्षा गार्डों की तैनाती की बात भी कही गयी थी.
2025 के स्तर से भी 47 सेंटीमीटर अधिक
पिछले वर्ष भी इस्माईलपुर-बिंद टोली में गंगा का जलस्तर काफी ऊंचा पहुंचा था. सितंबर 2025 में यहां जलस्तर 32.63 मीटर दर्ज किया गया था, जो खतरे के निशान से 1.03 मीटर ऊपर था. विभागीय रिकॉर्ड में इस स्थल का अधिकतम बाढ़ स्तर 33.50 मीटर बताया गया है.
वर्तमान 33.10 मीटर जलस्तर पिछले वर्ष दर्ज 32.63 मीटर के स्तर से करीब 47 सेंटीमीटर अधिक है. साथ ही यह वर्ष 2021 के ऐतिहासिक उच्चतम बाढ़ स्तर से सिर्फ 40 सेंटीमीटर नीचे है.
रिकॉर्ड से सिर्फ 40 सेंटीमीटर दूर गंगा
मौजूदा स्थिति को आंकड़ों से समझा जाए तो गंगा का जलस्तर गंभीर स्थिति में पहुंच चुका है.
- चेतावनी स्तर - 30.60 मीटर
- खतरे का स्तर - 31.60 मीटर
- 2025 का दर्ज उच्च स्तर - 32.63 मीटर
- 2026 का वर्तमान स्तर - 33.10 मीटर
- 2021 का उच्चतम बाढ़ स्तर - 33.50 मीटर
यानी गंगा इस समय खतरे के निशान से 1.50 मीटर ऊपर और वर्ष 2021 के ऐतिहासिक उच्चतम स्तर से महज 40 सेंटीमीटर नीचे बह रही है.
कटाव और बाढ़ की दोहरी चुनौती
जलस्तर बढ़ने के साथ अब सबसे बड़ी चुनौती तटबंध की सुरक्षा और कटाव को रोकना है. इस्माईलपुर-बिंद टोली क्षेत्र में पहले से ही बाढ़ सुरक्षा और कटावरोधी कार्य चल रहे हैं. करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से संचालित इन कार्यों की जुलाई में विभागीय उड़नदस्ता टीम ने तकनीकी जांच भी की थी.
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर में इसी तरह वृद्धि जारी रही और नदी की मुख्य धारा तटबंध से सटकर बहती रही तो स्थिति गंभीर हो सकती है. लोगों ने तटबंध के संवेदनशील हिस्सों पर 24 घंटे निगरानी, पर्याप्त बाढ़ संघर्ष सामग्री की उपलब्धता और कटावरोधी कार्यों में तेजी लाने की मांग की है.
अगले कुछ घंटे अहम
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यह है कि गंगा वर्ष 2021 के उस ऐतिहासिक जलस्तर से महज 40 सेंटीमीटर नीचे पहुंच चुकी है, जिसने इस्माईलपुर-बिंद टोली क्षेत्र में भारी तबाही मचायी थी. जलस्तर में पिछले 12 घंटे में करीब 20 सेंटीमीटर की वृद्धि को देखते हुए आने वाले घंटों में नदी की स्थिति पर प्रशासन और जल संसाधन विभाग की निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हो गयी है.
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