एमबीए विभाग में पुस्तक खरीदारी में धांधली के आरोप को लेकर बनी है उच्च स्तरीय जांच कमेटी
टीएमबीयू में मामले को लेकर जांच कमेटी गठित कर दी जाती है. विवि प्रशासन रिपोर्ट के लिए समय सीमा भी तय कर देती है. लेकिन कमेटी तय समय से कभी एक माह, तो कभी दो माह में रिपोर्ट विवि में जमा कराती है. ऐसे में सवाल उठता है कि विवि प्रशासन मामले को दबानी चाहती है या फिर कमेटी की मिलीभगत से जांच आगे नहीं की जाती है. इसी कड़ी में विवि के एमबीए विभाग में पुस्तक की खरीदारी में धांधली का आरोप विभाग के एक पूर्ववर्ती छात्र संतोष कुमार ने लगाया था. मामले को लेकर विवि प्रशासन ने उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी. कमेटी से एक माह के अंदर रिपोर्ट मांगी गयी थी.दरअसल, विवि के प्रभारी कुलपति प्रो विमलेंदु शेखर झा के आदेश पर नौ फरवरी को रजिस्ट्रार प्रो रामाशीष पूर्वे ने उच्चस्तरीय जांच कमेटी की अधिसूचना जारी की थी. इसमें पीजी सांख्यिकी विभाग के हेड प्रो निसार अहमद संयोजक हैं. जबकि डॉ मृत्युंजय सिंह गंगा, डॉ मुश्फिक आलम, कॉलेज इंस्पेक्टर साइंस प्रो रंजना, कॉलेज इंस्पेक्टर कॉमर्स एंड ऑट्स के प्रो सुरेंद्र कुमार सिंह सदस्य हैं. रजिस्ट्रार प्रो रमाशीष पूर्वे सदस्य सचिव है. अधिसूचना में स्पष्ट शब्दों में एक माह के भीतर रिपोर्ट मांगी थी. विवि से मिली जानकारी के अनुसार फरवरी के दूसरे सप्ताह में संयोजक प्रो निसार अहमद की अध्यक्षता में उनके कार्यालय में कमेटी की बैठक हुई.Bhagalpur News. विवि ने 30 दिन के अंदर मांगी रिपोर्ट, कमेटी ने 32 दिन में सिर्फ एक बैठक की
टीएमबीयू में जांच कमेटी.
