bhagalpur news. गर्मी बढ़ने से बढ़ सकता हैं कीट-पतंगों का प्रकोप बढ़ा

गर्मी बढ़ने से कीट-पतंगों का प्रकोप बढ़ने की संभावना बढ़ गयी है. इसे लेकर जिला कृषि विभाग अंतर्गत पौधा संरक्षण विभाग ने किसानों को सावधानी बरतने के सुझाव दिये हैं.

गर्मी बढ़ने से कीट-पतंगों का प्रकोप बढ़ने की संभावना बढ़ गयी है. इसे लेकर जिला कृषि विभाग अंतर्गत पौधा संरक्षण विभाग ने किसानों को सावधानी बरतने के सुझाव दिये हैं. कृषि विशेषज्ञों की मानें तो, गर्मी बढ़ने से कीट-पतंग का प्रकोप बढ़ जाता है. इससे इसका लार्वा बढ़ता ही चला जाता है. बाढ़ग्रस्त क्षेत्र व जलजमाव वाले क्षेत्रों में भी कजरा पिल्लू व सैनिक कीट का प्रकोप बढ़ा है. इसे लेकर पौधा संरक्षण विभाग के पदाधिकारी व कर्मचारियों ने क्षेत्रों का निरीक्षण किया और किसानों को आवश्यक सुझाव दिये. हालांकि गर्मी बढ़ने पर आम के मंजर पर मधुआ कीट से मुक्ति मिली है. पौधा संरक्षण विभाग के सहायक निदेशक सुजीत कुमार पाल ने बताया कि मसूर व चना जैसे रबी फसल में फल्ली छेदक कीड़े होने की संभावना बन सकती है. उन्होंने यह भी बताया कि गर्मी आम के मंजर को मधुआ कीट से मुक्ति दिलाने में सहायक सिद्ध हुआ है. रबी फसल दलहन में फल्ली छेदक कीड़े से बचाव के लिए किसान खेत में फेरोमोन ट्रैप-गंध पास लगा सकते हैं. इसके अलावा अन्य उपाय के रूप में पक्षी आश्रय लगा सकते हैं. यहां पर पक्षी आयेंगे, तो वे कीड़े को खा जायेंगे. इससे यदि नियंत्रित नहीं होगा, तभी रासायनिक कीटनाशक का इस्तेमाल कर सकते हैं. दियारा क्षेत्र व टाल क्षेत्र में मकई में सैनिक कीट मिलता रहा है. इस बार अब तक कहीं से शिकायत नहीं मिली है. फिर भी किसान इसके लिए प्रेफेनोफॉस 40 प्रतिशत ईसी एवं साइपर मैत्रिन 4 प्रतिशत के मिश्रण को एक से डेढ़ एमएल प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव कर सकते हैं. क्लोरपायरी फोस 50 प्रतिशत एवं साइपर मैत्रिन 5 प्रतिशत के मिश्रण को एक से डेढ़ एमएल प्रति लीटर दे सकते हैं. इसका प्रयोग गेहूं में भी कर सकते हैं. इससे कजरा पिल्लू एवं सैनिक कीट नियंत्रण पाया जा सकता है. दोनों कीट का प्रकोप बाढ़ के कारण व टाल एरिया में पानी जमाव के कारण बढ़ा है.

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By NISHI RANJAN THAKUR

NISHI RANJAN THAKUR is a contributor at Prabhat Khabar.

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