Bhagalpur News: सोने और चांदी के जिउतिया लॉकेट की बढ़ी मांग, जिउतिया 14 को

सोने और चांदी के जिउतिया लॉकेट की बढ़ी मांग, जिउतिया 14 को

– 14 को माताएं अपनी संतान की सुख-समृद्धि और लंबी आयु के लिए करेंगी जीमूतवाहन की पूजा- घर से बाजार तक जिउतिया की तैयारी शुरू, पूजन सामग्री व सर्राफा बाजार में बढ़ी रौनक

– अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 14 सितंबर को प्रात: 05:04 बजे होगी शुरू, 15 की रात 3:06 बजे समाप्ति

वरीय संवाददाता, भागलपुर

अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जिउतिया (जीवित पुत्रिका) व्रत रखा जाता है. इस साल यह व्रत 14 सितंबर को है. नहाय-खाय का अनुष्ठान 13 को होगा. जिउतिया को लेकर घर से लेकर बाजार तक तैयारी शुरू हो गयी है. माताएं संतान की लंबी उम्र, समृद्धि और उन्नत जीवन के लिए निर्जला व्रत रखेंगी. पूजन सामग्री व सर्राफा बाजार में रौनक बढ़ गयी है. सोना-चांदी के जिउतिया लॉकेट की डिमांड बढ़ गयी है. कारोबारियों को इससे भागलपुर में पांच करोड़ से अधिक का कारोबार की उम्मीद है. इसके अलावा बाजार में डलिया, फल आदि पूजन सामग्री की बिक्री बढ़ गयी है, तो मिठाई दुकानों में खाजा तैयार होने लगा है. मिठाई दुकानदार नंदकिशोर साह ने बताया कि 180 से 250 रुपये किलो तक खाजा बिक रहे हैं. बाजार में डलिया 100 रुपये जोड़ा तक बिक रहे हैं. सर्राफा कारोबारी विशाल आनंद ने बताया कि सोनापट्टी बाजार में 500 रुपये में चांदी व 5000 रुपये में सोना का जिउतिया लॉकेट-जितमान उपलब्ध है. अधिकतम डेढ़ लाख तक का सोना का जितमान लॉकेट उपलब्ध है. माताओं में सोना का जिउतिया लॉकेट लेने का क्रेज बढ़ गया है. इससे पूरे जिले में करोड़ों के कारोबार की संभावना है.

महिलाएं लाल या पीले रंग के धागे गले में धारण करते हैं

बाजार में धागा वाली जिउतिया भी महिलाएं गुथवा रही हैं. पंडित शंकर मिश्रा ने बताया कि संतान की दीर्घायु व सुखी जीवन के लिए रखी जाने वाली जिउतिया व्रत वाले दिन में जिउतिया वाली लॉकेट बहुत ज्यादा महत्व रखती है. इस दिन महिलाएं लाल या पीले रंग के धागे अपने गले में धारण करती हैं. इसमें एक धागा साधारण तरीके का होता है. इसमें तीन जगह गांठें लगी रहती हैं. इसकी गांठें सामान्य होती हैं, वहीं कई महिलाएं अपने सामर्थ्य के अनुसार सोने की लॉकेट में भी जिउतिया बनवाकर धारण करती हैं. यह कठिन व्रत उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल आदि में अधिक प्रचलित हैं.

जिउतिया का शुभ मुहूर्त

पंडित समीर मिश्रा ने बताया कि अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी 14 सितंबर को प्रात: 05:04 बजे शुरू होगी. 15 को रात्रि 3:06 बजे समाप्त होगी. यह पर्व तीन दिनों तक चलता है. 13 सितंबर को नहाय खाय और 14 को निर्जला व्रत रखा जायेगा. इसके बाद 15 सितंबर को व्रत का पारण किया जायेगा.

निर्जला व्रत रखती हैं महिलाएं, बच्चों के जीवन में आती है सुख-समद्धि

यह 24 घंटे का निर्जला व्रत है. इसकी शुरुआत अष्टमी से होती है. समापन नवमी तिथि को होता है. व्रत में एक दिन से पहले तामसिक भोजन जैसे प्याज, लहसुन, मांसाहारी भोजन का सेवन नहीं करना होता है. इस व्रत में भगवान जीमूतवाहन, गाय के गोबर से बने चील-सियारिन की पूजा का विधान है. व्रत में अक्षत, पेड़ा, दूर्वा की माला, पान, लौंग, इलायची, पूजा की सुपारी, शृंगार सामान, सिंदूर, पुष्प, गांठ का धागा, कुश से बनी जीमूतवाहन की मूर्ति, धूप, दीप, मिठाई, फल, बांस के पत्ते, सरसों का तेल, खली, गाय का गोबर पूजा में जरूरी है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत में एक छोटा सा तालाब बनाकर पूजा की जाती है.

जिउतिया व्रत का नहाय-खाय

छठ व्रत की तरह इस व्रत का भी नहाय खाय किया जाता है. इसमें व्रती महिलाएं स्नान आदि करने के बाद पूजा-पाठ करके भोजन ग्रहण करती हैं और अगले दिन निर्जला व्रत रखती हैं.

जिउतिया का पारण

निर्जला उपवास रखने के बाद जिउतिया व्रत का पारण तीसरे दिन प्रातः काल पूजा-पाठ के बाद सूर्य देव को अर्घ देकर किया जाता है. इस बार 15 सितंबर के तड़के 3:06 बजे नवमी प्रवेश कर रहा है. इसके बाद पारण किया जा सकता है. वैसे जो व्रती उदय-अस्त मानती हैं वो सूर्याेदय के बाद पारण कर सकती हैं.

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Author: SANJIV KUMAR

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