मानसून सक्रिय : भागलपुर समेत कई जिलों में भारी बारिश-वज्रपात का अलर्ट; किसानों के लिए जारी हुई एडवाइजरी

Bihar Monsoon Update : बिहार के मौसम का मिजाज जल्द बदलने वाला है. भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अगले कुछ दिनों में कई जिलों में भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की है. किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी भी जारी की गई है.

Bihar Monsoon Update : अगले कुछ दिनों में बिहार के मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने वाला है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के पूर्वानुमान के आधार पर बीएयू, सबौर ने बताया है कि 25 से 29 जुलाई के दौरान दक्षिण बिहार के कई जिलों में गरज-चमक, तेज हवा और बारिश का दौर जारी रह सकता है. किसानों और आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है.

इन जिलों में भारी बारिश और वज्रपात का अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार अरवल, भोजपुर, बक्सर, गया, रोहतास, कैमूर और नवादा जिले के एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा, मेघगर्जन, वज्रपात और तेज सतही हवाएं चलने की संभावना है. वहीं भागलपुर सहित दक्षिण बिहार के अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं. आसमान में घने बादल छाए रहने से तापमान में गिरावट आएगी और उमस से भी कुछ राहत मिलने की उम्मीद है.

तापमान रहेगा नियंत्रित, पूरबा हवा देगी राहत

पूर्वानुमान के अनुसार इस अवधि में अधिकतम तापमान 31 से 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है. सुबह के समय सापेक्ष आर्द्रता 80 से 90 प्रतिशत और दोपहर में 55 से 60 प्रतिशत रहने का अनुमान है. इस दौरान पूरबा हवा 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी, जिससे मौसम अपेक्षाकृत सुहावना बना रहेगा.

धान की रोपाई में तेजी लाने की सलाह

बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर ने किसानों से कहा है कि मौजूदा बारिश और आगामी वर्षा की संभावना को देखते हुए धान की रोपाई में तेजी लाएं. रोपाई से पहले प्रति हेक्टेयर 25 से 30 किलोग्राम नाइट्रोजन, 40 किलोग्राम फॉस्फोरस, 30 किलोग्राम पोटाश और 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट का उपयोग करने की सलाह दी गई है. विश्वविद्यालय ने भागलपुर कतरनी जैसी सुगंधित धान की किस्मों की खेती को भी बढ़ावा देने की अपील की है.

वर्षा जल का करें संरक्षण, किसानों को वैज्ञानिकों की सलाह

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खेतों की निचली जमीन के चारों ओर मजबूत मेड़ (बांध) बनाने की सलाह दी है, ताकि वर्षा जल का अधिकतम संचयन किया जा सके. भविष्य में जरूरत पड़ने पर यही संचित पानी सिंचाई के लिए उपयोगी होगा. साथ ही मौसम खराब होने के दौरान खुले खेतों में काम करने से बचने और वज्रपात के समय सुरक्षित स्थानों पर रहने की भी सलाह दी गई है.

यह मौसम आधारित कृषि परामर्श बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा केंद्र के नोडल पदाधिकारी डॉ. बीरेंद्र कुमार द्वारा जारी किया गया है.


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लेखक के बारे में

By ब्रजेश नंदन माधुर्य

ब्रजेश नंदन माधुर्य प्रिंट माध्यम में 20 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के भागलपुर कार्यालय में काम कर रहे हैं. स्वच्छता व ई-कॉमर्स में रुचि रखते हैं.

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