हरिशयनी एकादशी से शुरू हुआ चातुर्मास, 4 महीने के लिए मांगलिक कार्यों पर लगी रोक; 20 नवंबर से शुरू होंगे विवाह

हरिशयनी एकादशी के साथ ही सनातन धर्म में चातुर्मास का पवित्र काल शुरू हो गया है, जिसके चलते अगले चार महीनों के लिए सभी मांगलिक कार्य रुक गए हैं. 20 नवंबर को देव उठनी एकादशी के साथ ही शुभ मुहूर्त फिर से शुरू होंगे.

भागलपुर में शनिवार को हरिशयनी एकादशी (देवशयनी एकादशी) के अवसर पर मंदिरों और ठाकुरबाड़ियों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया. इसके साथ ही सनातन धर्मावलंबियों का चार महीने का पवित्र चातुर्मास काल विधिवत प्रारंभ हो गया है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों के दौरान भगवान श्री हरि विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं, जिसके चलते विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग गया है.

सावन बाजार से कारोबारियों को उम्मीद

मांगलिक कार्यों पर रोक लगने से सराफा और वस्त्र बाजार में अस्थाई मंदी का असर देखा जाएगा:

  • सावन से भरपाई: स्थानीय कारोबारियों को उम्मीद है कि सावन के आगमन के साथ ही बाजार की रफ्तार लौटेगी. भागलपुर के थोक बाजारों से गेरुआ वस्त्र, पूजन सामग्री, फल और अन्य धार्मिक सामानों की बिक्री बढ़ेगी.
  • खाटू श्याम मंदिर में आयोजन: एकादशी के पावन अवसर पर संध्या काल में खाटू श्याम मंदिर में भव्य ज्योत और भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा.

20 नवंबर को देवउठनी एकादशी के साथ खुलेगा शुभ मुहूर्त

कर्मकांड विद्वान पंडित समीर मिश्रा ने बताया कि चातुर्मास के दौरान केवल ईश्वर भक्ति और धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व रहता है:

  • देवोत्थान एकादशी: कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवोत्थान (देवउठनी) एकादशी 20 नवंबर को है. इसी दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागेंगे और चातुर्मास समाप्त होगा.
  • तुलसी विवाह से शुरुआत: 20 नवंबर को तुलसी विवाह के साथ ही फिर से सभी प्रकार के शुभ व वैवाहिक लग्न शुरू हो जाएंगे.

चार महीने तक भगवान शिव संभालेंगे सृष्टि का संचालन

धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए पंडित अंजनी शर्मा ने बताया:

पंडित अंजनी शर्मा का वक्तव्य: "चातुर्मास के दौरान जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं, तब संपूर्ण सृष्टि के संचालन और संरक्षण का दायित्व देवाधिदेव महादेव (भगवान शिव) संभालते हैं. यह समय वर्षा ऋतु का होता है, जो किसानों के लिए अत्यंत शुभ है. भक्तजन भगवान शिव की आराधना कर मनोवांछित फल प्राप्त करते हैं. चातुर्मास समाप्ति के बाद जब विष्णु जी जागते हैं, तब शिवजी पुनः समाधि में चले जाते हैं."

चंपापुर जैन सिद्धक्षेत्र में 28 जुलाई से शुरू होगा चातुर्मास

भागलपुर स्थित प्रसिद्ध चंपापुर जैन सिद्धक्षेत्र में भी चातुर्मास की तैयारियां अंतिम चरण में हैं:

  • 28 जुलाई से 8 नवंबर तक: सिद्धक्षेत्र मंत्री सुनील जैन ने बताया कि जैन धर्मावलंबियों का चातुर्मास 28 जुलाई से शुरू होकर 8 नवंबर तक चलेगा.
  • प्रमुख आयोजन: 16 सितंबर को 'दशलक्षण महापर्व' और 25 सितंबर को भगवान वासुपूज्य का 'निर्वाण महोत्सव' मनाया जाएगा.
  • देश-विदेश से जुटेंगे श्रद्धालु: श्रद्धालुओं के लिए राजस्थान से अष्टमंगल द्रव्य और जबलपुर से विशेष अभिषेक कलश मंगवाए जा रहे हैं. इस बार साधकों को पूज्य माता आर्यिका जी का सानिध्य प्राप्त होगा.


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लेखक के बारे में

By दीपक कुमार राव

दीपक कुमार राव प्रिंट माध्यम में 18 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 वर्षों से एक्टिव हैं. प्रभात खबर के भागलपुर कार्यालय में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, कला-संस्कृति व सामाजिक कार्य में रुचि रखते हैं.

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