गंगा में समाते घर

भागलपुर: सबौर के इंग्लिश गांव में देखते ही देखते गंगा में समाया दो मंजिला पक्का मकान, 70 बोरी अनाज, नकदी और गहने भी बहे

भागलपुर जिले में गंगा नदी का रौद्र रूप देखने को मिला, जहाँ उफनती धारा ने इंग्लिश गांव में एक दो मंजिला पक्के मकान को लील लिया. इस भयावह घटना में मकान के साथ-साथ घर में रखा कीमती सामान, नकदी, जेवरात और 70 बोरी गेहूं भी बह गए.

भागलपुर जिले के सबौर प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत फरका के इंग्लिश गांव (वार्ड संख्या 7) में रविवार तड़के उफनती गंगा के भीषण कटाव ने विकराल रूप ले लिया. सुबह लगभग 3:00 बजे स्थानीय निवासी ऐतवारी साह का दो मंजिला पक्का मकान ताश के पत्तों की तरह ढहकर गंगा नदी के गर्भ में समा गया. मकान के साथ-साथ घर में रखी नकदी, जेवरात और लगभग 70 बोरी गेहूं सहित सारा घरेलू सामान तेज धारा में बह गया. जलस्तर में बढ़ोतरी और कटाव की इस भयावहता ने पूरे गांव में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है, वहीं बेबस पीड़ित परिवार अब खुले आसमान के नीचे आ गया है.

तड़के 3 बजे भरभराकर गिरा दो मंजिला मकान

घटना के प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार:

  • अचानक तेज हुआ कटाव: इंग्लिश गांव के किनारे गंगा की मुख्य धारा लगातार मिट्टी काट रही थी. रविवार तड़के करीब 3 बजे अचानक जमीन धंसने लगी और देखते ही देखते ऐतवारी साह का मजबूत दो मंजिला मकान नदी में जमींदोज हो गया.
  • सामान निकालने का नहीं मिला मौका: कटाव की रफ्तार इतनी तेज थी कि परिजनों को संभलने या घर के भीतर रखा जरूरी सामान बाहर निकालने तक का वक्त नहीं मिला.

"आशियाना भी गया और दाना-दाना भी": पीड़ित का छलका दर्द

जीवनभर की खून-पसीने की कमाई से बना घर गंगा में विलीन होते देख पीड़ित ऐतवारी साह बिलख पड़े. उन्होंने बताया:

  • 70 बोरी गेहूं और जमा-पूंजी बही: घर के भीतर सालभर के खाने के लिए रखा लगभग 70 बोरा गेहूं, रोजमर्रा की जरूरत का राशन और बक्से में रखे नकदी-जेवरात सब कुछ पानी में बह गए.
  • कंगाल हुआ परिवार: पीड़ित ने रुंधे गले से कहा— "रहने का आशियाना भी छिन गया और खाने का अनाज भी चला गया. ऐसी भयावह विपदा ईश्वर किसी को न दिखाए."


गंगा में समाते घर

किनारे बसे ग्रामीणों में खौफ, पलायन की मजबूरी

इंग्लिश गांव में गंगा किनारे रहने वाले अन्य परिवारों पर भी कटाव का सीधा खतरा मंडरा रहा है:

  • दहशत में ग्रामीण: बाढ़ का पानी आते ही हर साल इस इलाके में घर कटने का सिलसिला शुरू हो जाता है. अपनी आंखों के सामने आशियानों को उजड़ते देख तटवर्ती ग्रामीण भयभीत और लाचार हैं.
  • सुरक्षित स्थानों की तलाश: कई अन्य परिवार भी अपने घरों को खाली कर सुरक्षित स्थानों और ऊंचे तटबंधों पर शरण लेने की तैयारी कर रहे हैं.
  • मुआवजे और कटाव निरोधक कार्य की मांग: स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग से तत्काल कटाव निरोधी कार्य शुरू कराने तथा बेघर हुए पीड़ित परिवार को आपदा राहत कोष से उचित मुआवजा व तिरपाल-राशन उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है.


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By Prabhat khabar news desk

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