भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल अंतर्गत गोपालपुर, इस्माईलपुर और रंगरा प्रखंडों में गंगा और कोसी नदी के रौद्र रूप ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल कर रख दी है. मानसून पूर्व जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग द्वारा बैठकों, तटबंधों की निगरानी, कटाव निरोधक कार्य और लाइफ जैकेट की खरीद के तमाम दावे किए गए थे, लेकिन जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि के सामने वे नाकाफी साबित हुए हैं. दर्जनों गांवों और संपर्क पथों पर बाढ़ का पानी बहने लगा है. इस्माईलपुर प्रखंड एवं अंचल कार्यालय परिसर पूरी तरह जलमग्न हो चुका है, जिससे प्रशासनिक कामकाज ठप होने की कगार पर पहुंच गया है.
ब्रह्मोत्तर बांध पर खतरा, इस्माईलपुर-बिंद टोली तटबंध के स्परों पर टकरा रही धारा
गोपालपुर प्रखंड की रक्षा करने वाले अत्यंत महत्वपूर्ण ब्रह्मोत्तर बांध पर गंगा के बढ़ते जलस्तर का जबर्दस्त दबाव बना हुआ है. अगस्त में ही मिट्टी धंसने और रिसाव की सूचना के बाद मरम्मत कार्य शुरू किया गया था, लेकिन पानी का दबाव अब भी चिंता का विषय बना हुआ है. उधर, इस्माईलपुर-बिंद टोली तटबंध के स्पर संख्या 5 से लेकर 7 तक गंगा की मुख्य धारा सीधे टकरा रही है, जिससे भीषण कटाव का खतरा मंडरा रहा है.
इस्माईलपुर: अंचल कार्यालय परिसर में घुसा पानी, ग्रामीणों का संपर्क टूटा
इस्माईलपुर में हालात सामान्य से कहीं अधिक बदतर हो चुके हैं. प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में पानी घुसने से सरकारी फाइलों और जरूरी दस्तावेजों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना पड़ रहा है. संपर्क सड़कों के डूबने से गांवों का संपर्क प्रखंड मुख्यालय से टूट गया है. पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने तत्काल प्रभाव से सरकारी नावों, लाइफ जैकेट और एनडीआरएफ/एसडीआरएफ के प्रशिक्षित बचाव दलों की तैनाती की मांग की है.
26 विद्यालय बाढ़ के पानी में डूबे, पास के स्कूलों से किए गए टैग
सैलाब की मार शिक्षा व्यवस्था पर भी साफ देखी जा रही है. गोपालपुर, इस्माईलपुर और रंगरा समेत जिले के 6 प्रखंडों के कुल 26 सरकारी विद्यालय बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं. बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित न हो, इसके लिए शिक्षा विभाग ने प्रभावित विद्यालयों को निकटवर्ती ऊंचे और सुरक्षित विद्यालयों से टैग कर वैकल्पिक कक्षाएं चलाने का निर्देश दिया है.
तटबंधों पर निगरानी और फ्लड फाइटिंग सामग्री की कमी से आक्रोश
5 सितंबर को उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नवगछिया के राघोपुर तटबंध का स्थलीय मुआयना कर अधिकारियों को तटबंधों की 24 घंटे निगरानी के कड़े निर्देश दिए थे. इसके बावजूद संवेदनशील स्थलों पर पर्याप्त बालू भरी बोरियां (सैंड बैग्स) और फ्लड फाइटिंग सामग्री समय पर न पहुंचने से ग्रामीणों में भारी रोष है. अब सबसे बड़ी चुनौती इन तीनों प्रखंडों के कमजोर तटबंधों, सड़कों और रिहायशी बस्तियों को पानी के तेज बहाव से बचाए रखने की है.
