सात दिनों से मालदा रेलवे कार्यालय का चक्कर लगा रहे निगम कर्मी
पुल निर्माण निगम के अनुसार पिछले सात दिनों से निगम का एक कर्मी मालदा रेलवे डिविजन कार्यालय का लगातार चक्कर लगा रहा है. पहले रेलवे अधिकारियों ने पत्र नहीं मिलने की बात कही. बाद में पत्र से जुड़ी जानकारी देने पर खोजबीन का हवाला देकर मामला टाल दिया गया. इसके बाद निगम कर्मी खुद पत्र लेकर कार्यालय पहुंचा, लेकिन अब मामला डिविजन और जोनल स्तर के बीच फंसा बताया जा रहा है. मंजूरी नहीं मिलने से गार्डर लांचिंग का काम शुरू नहीं हो पा रहा है.रेलवे इंजीनियर से कहासुनी तक की नौबत
निगम अधिकारियों और रेलवे इंजीनियर के बीच टेलीफोन पर कहासुनी तक स्थिति पहुंच गयी. निगम कर्मी ने यहां तक कह दिया कि अगर रेलवे खुद गार्डर लांचिंग कराना चाहता है तो अपनी टीम भेज दे, निगम उसकी लागत का भुगतान करने को तैयार है. इसके बावजूद कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है. इधर, रेलवे हिस्से में निगम की सभी तैयारियां पूरी बतायी जा रही है. अब केवल रेलवे की मंजूरी का इंतजार है. मंजूरी मिलते ही गार्डर लांचिंग का काम शुरू किया जा सकेगा.
तय समय से एक साल पीछे चल रही परियोजना
भोलानाथ आरओबी परियोजना पहले से ही तय समय से करीब एक साल पीछे चल रही है. परियोजना की दूसरी डेडलाइन भी अप्रैल में फेल हो चुकी है. लगातार हो रही देरी से स्थानीय लोगों में भी नाराजगी बढ़ रही है.
भोलानाथ आरओबी : अब तक का कार्य
लागत : 86.17 करोड़ रुपये फाउंडेशन : 96 प्रतिशतसब स्ट्रक्चर : 76 प्रतिशत
सुपर स्ट्रक्चर : 55 प्रतिशत
अप्रोच रोड का निर्माण : शून्य कार्य की उपलब्धता पर अबतक भुगतान : 35.54 करोड़ रुपयेरैयतों को मुआवजा के लिए भेजी गयी नोटिस
भोलानाथ आरओबी निर्माण परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली गयी है. प्रशासन की ओर से चिह्नित रैयतों के मुआवजे की राशि तय कर दी गयी है. इसके साथ ही सभी संबंधित रैयतों को नोटिस भी भेज दिया गया है.
नोटिस मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी कर मुआवजा भुगतान किया जायेगा. जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरओबी निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद जतायी जा रही है.
कोटभोलानाथ आरओबी का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है. रेलवे हिस्से में गार्डर लांचिंग की स्कीम बनाकर रेलवे को भेजी गयी है, लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिली है. इस वजह से इस हिस्से का काम प्रभावित हो रहा है. रेलवे को स्कीम भेजने के बाद लगातार संपर्क किया जा रहा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है. रेलवे की मंजूरी के बिना गार्डर लांचिंग नहीं हो सकेगी और इससे परियोजना पूरी होने में देरी हो रही है.
ज्ञानचंद्र दास, वरीय परियोजना अभियंतापुल निर्माण निगम कार्य प्रमंडल, भागलपुर
