बाढ़ से पहले भरकर रखी 4 लाख बोरियां, जरूरत पड़ी तो आधी से ज्यादा बेकार : बाढ़ प्रबंधन की तैयारी पर सवाल

लाखों बालू भरी बोरियां जुलाई से खुले में रखी हैं, लेकिन बारिश और नमी के कारण ये खराब हो रही हैं. जरूरत के समय इन बोरियों के इस्तेमाल पर सवाल उठ रहे हैं. प्राकृतिक आपदा से निपटने में प्रशासनिक लापरवाही साफ दिख रही है.

गोपालपुर (भागलपुर) : बाढ़ प्रबंधन को लेकर जल संसाधन विभाग की तैयारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं. इस्माईलपुर-बिंद टोली तटबंध पर बाढ़ से निपटने के लिए जुलाई के पहले सप्ताह से ही चार लाख से अधिक बालू भरी बोरियां तैयार कराकर खुले में रखे जाने का दावा है. महीनों तक बारिश, धूप और नमी में पड़े रहने के बाद वास्तविक जरूरत के समय इनमें से बड़ी संख्या में बोरियों के खराब होने की बात सामने आ रही है.

लाखों की सामग्री खुले में, संरक्षण की व्यवस्था पर सवाल

बाढ़ के दौरान तटबंधों को बचाने में बालू भरी बोरियों का महत्वपूर्ण इस्तेमाल होता है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब विभाग को पहले से पता रहता है कि बाढ़ के समय इनकी आवश्यकता पड़ेगी, तो इन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने की व्यवस्था क्यों नहीं की जाती.

स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि खुले में लंबे समय तक रखे जाने के कारण बोरियां बारिश और नमी से कमजोर हो जाती हैं. ऐसे में आपदा के समय जरूरी संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद उनका प्रभावी इस्तेमाल नहीं हो पाता.

बाढ़ आने पर सक्रियता, पहले की तैयारी पर सवाल

बाढ़ आने के बाद अधिकारी और कर्मचारी तटबंधों की सुरक्षा को लेकर दिन-रात जुट जाते हैं. संवेदनशील स्थानों पर फ्लड फाइटिंग कार्य भी तेज किया जाता है. लेकिन बाढ़ से पहले की तैयारी और सामग्री के भंडारण में होने वाली लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं.

चार लाख से अधिक बोरियां तैयार कराने में सरकारी धन खर्च होने के बावजूद यदि बड़ी संख्या में सामग्री समय से पहले खराब हो रही है, तो इसके लिए जवाबदेही तय करने की मांग भी उठ रही है.

बाढ़ प्राकृतिक, लापरवाही प्रशासनिक

बाढ़ एक प्राकृतिक आपदा है, लेकिन उससे निपटने की तैयारी में लापरवाही को प्राकृतिक नहीं कहा जा सकता. सवाल यही है कि यदि लाखों रुपये की सरकारी सामग्री उचित भंडारण के अभाव में खराब हो रही है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी.

स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ प्रबंधन में सिर्फ आपदा के समय सक्रिय होना पर्याप्त नहीं है. पहले से तैयार संसाधनों को सुरक्षित रखना और उनका समय पर उपयोग सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है. ऐसे में बोरियों के भंडारण और खराब होने के मामले की समीक्षा के साथ जिम्मेदारी तय करने की जरूरत बतायी जा रही है.

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By Vipin Thakur

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