Sultanganj News: सुलतानगंज में खुदरा उर्वरक विक्रेताओं और थोक विक्रेताओं के बीच जारी खींचतान अब आर-पार की लड़ाई में बदल गई है. थोक विक्रेताओं की मनमानी और जबरन दूसरे कृषि उत्पाद थमाए जाने से नाराज खुदरा विक्रेताओं ने एक सुर में मोर्चा खोल दिया है और साफ कह दिया है कि जब तक उन्हें निर्धारित दर और सही व्यवस्था नहीं मिलेगी, वे गोदामों से खाद का उठाव पूरी तरह बंद रखेंगे.
एमओपी और डीएपी के साथ जबरन बेचे जा रहे नैनो यूरिया व जिंक
सुलतानगंज के खुदरा उर्वरक विक्रेता संघ की विशेष बैठक में थोक विक्रेताओं के रवैये पर कड़ा एतराज जताया गया. विक्रेताओं का आरोप है कि थोक कारोबारी न केवल डीएपी, यूरिया, एमओपी और एनपीके जैसे मुख्य उर्वरकों को निर्धारित सरकारी मूल्य से अधिक कीमत पर बेच रहे हैं, बल्कि उनके साथ जबरन दूसरे उत्पाद टैग कर रहे हैं. दुकानदारों का कहना है कि जब वे मुख्य खाद खरीदने जाते हैं तो उन्हें जिंक, कैल्शियम, माइक्रो राइजर, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे सहायक उत्पाद भी साथ में लेने के लिए मजबूर किया जाता है. अगर कोई विक्रेता इन सहायक उत्पादों को लेने से मना करता है, तो उसे मुख्य खाद देने से इंकार कर दिया जाता है.
प्रति बोरी 50 से 55 रुपये का अतिरिक्त बोझ, सरकारी रेट पर बेचना हुआ नामुमकिन
खुदरा विक्रेताओं ने गणित समझाते हुए बताया कि थोक स्तर पर अधिक कीमत और अनचाहे उत्पादों का बोझ झेलने के बाद जब वे खाद उठाकर अपनी दुकानों तक लाते हैं, तो ट्रांसपोर्टेशन और भाड़े में ही प्रति बोरी करीब 50 से 55 रुपये की अतिरिक्त लागत आ जाती है. ऐसी स्थिति में जब सरकारी दर पर किसानों को खाद बेचने का दबाव होता है, तो खुदरा विक्रेताओं को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. थोक विक्रेताओं की इस मनमानी के कारण खुदरा कारोबारी दोहरे संकट में फंस गए हैं, जहां एक तरफ उनकी लागत बढ़ रही है और दूसरी तरफ किसानों के सवालों का जवाब देना मुश्किल हो रहा है.
कृषि पदाधिकारी को सौंपा 29 विक्रेताओं का हस्ताक्षरयुक्त आवेदन
समस्या के समाधान के लिए खुदरा उर्वरक विक्रेताओं ने एकजुट होकर प्रखंड कृषि पदाधिकारी का दरवाजा खटखटाया है. संघ की ओर से 29 खुदरा उर्वरक विक्रेताओं के हस्ताक्षर वाला एक औपचारिक आवेदन कृषि विभाग को सौंपा गया है. आवेदन में विक्रेताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक थोक विक्रेताओं द्वारा उचित मूल्य पर उर्वरक की उपलब्धता और एफओआर (फ्री ऑन रोड/रेल यानी दुकान तक पहुंचाने की व्यवस्था) सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक वे उर्वरक का उठाव नहीं करेंगे. आवेदन सौंपने वाले प्रमुख विक्रेताओं में अनुज देव सिंह, सोनी कुमारी, भवेश कुमार, अमित कुमार राय, राकेश कुमार, आलोक कुमार, अश्विनी कुमार चौधरी, नंदकिशोर, दिलीप कुमार, सतीश कुमार, सावन कुमार, अमित आनंद, शंभू कुमार, विनोद कुमार चौरसिया, बृजेश कुमार मिश्रा और अनिल शाह शामिल हैं.
Sultanganj News: किसानों के हित में व्यावहारिक व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही की मांग
विक्रेताओं ने अपनी बात रखते हुए साफ किया कि वे किसानों को खाद की आपूर्ति बाधित नहीं करना चाहते और न ही खाद संकट पैदा करना उनका मकसद है. उनका कहना है कि थोक विक्रेता, खुदरा विक्रेता और किसान तीनों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक पारदर्शी और व्यावहारिक वितरण व्यवस्था लागू की जानी चाहिए. विक्रेताओं ने कृषि विभाग से जल्द से जल्द हस्तक्षेप कर थोक विक्रेताओं की मनमानी पर रोक लगाने की मांग की है. अब देखने वाली बात होगी कि कृषि विभाग इस विवाद का क्या समाधान निकालता है, क्योंकि अगर जल्द ही कोई रास्ता नहीं निकला तो सुलतानगंज और आसपास के हजारों किसानों को खाद के लिए दर-दर भटकना पड़ सकता है.
