आगामी पर्व-त्योहारों के सीजन की शुरुआत से ठीक पहले भागलपुर में उपभोक्ताओं पर महंगाई की तगड़ी मार पड़ी है. मांग में बढ़ोतरी और आपूर्ति पर दबाव के कारण चीनी और खाद्य तेलों की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है. एक महीने के भीतर खुदरा बाजार में चीनी और तेल के दामों में ₹12 से ₹15 प्रति किलोग्राम तक की बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम गृहिणियों के रसोई का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है.
गृहिणियों से लेकर होटल-रेस्टोरेंट संचालकों की बढ़ी परेशानी
खाद्य तेलों की धार तेज होने और चीनी की मिठास महंगी होने का असर पूरे बाजार पर दिखने लगा है:
- घर चलाना हुआ कठिन: रिफाइंड पाम तेल, सरसों तेल और चीनी की कीमतों में 5 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होने से आम परिवारों के लिए घर का खर्च संभालना मुश्किल हो रहा है.
- स्ट्रीट फूड और मिठाइयां महंगी: लागत बढ़ने के कारण होटल, रेस्टोरेंट, हलवाई और समोसा-कचौड़ी जैसे स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के मुनाफे पर असर पड़ा है, जिससे आने वाले दिनों में तैयार खाद्य सामग्रियां भी महंगी हो सकती हैं.
चीनी और खाद्य तेलों के नए व पुराने दामों का हाल
थोक और खुदरा बाजार में कीमतों में आया अंतर इस प्रकार है:
- सरसों तेल (मंगल - 15 लीटर टीन): एक माह पहले ₹2,460 में मिलने वाला डिब्बा ₹2,700 से ₹2,800 होता हुआ अब ₹2,930 पर पहुंच गया है.
- सरसों तेल (कलश - 15 लीटर टीन): वर्तमान में ₹2,950 की दर पर बिक रहा है.
- रिफाइंड पाम तेल (13 लीटर): ₹2,300 से बढ़कर अब ₹2,480 हो गया है.
- चीनी (थोक भाव): ₹2,300 प्रति 50 किलो की बोरी पहले बढ़कर ₹2,440 हुई और अब ₹2,600 से ऊपर पहुंच गई है (वर्तमान में ₹5,250 प्रति क्विंटल).
- खुदरा बाजार (दुकानदार संतोष कुमार के अनुसार):
क्यों बढ़ रहे हैं दाम? जानिए क्या कहते हैं कारोबारी
इस्टर्न बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पदाधिकारी सह तेल व चीनी कारोबारी रुपेश बैद ने महंगाई के तीन प्रमुख कारण बताए:
- कमजोर मानसून व भू-राजनीतिक तनाव: बारिश में कमी से गन्ने व तिलहन की फसल प्रभावित हुई है. वहीं खाड़ी और प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों में युद्ध/तनाव के कारण पाम और अन्य खाद्य तेलों के आयात पर विपरीत असर पड़ा है.
- एथेनॉल निर्माण में इस्तेमाल: गन्ने के रस और सिरप का एक बड़ा हिस्सा एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल होने से चीनी की घरेलू बाजार में उपलब्धता घट गई है.
- त्योहारी मांग व जमाखोरी: त्योहारों के करीब आते ही मांग बढ़ने और स्थानीय स्तर पर जमाखोरी के चलते भी कीमतों में अस्थायी तेजी आई है.
