कंट्रोल एंड कमांड के नाराज ऑपरेटरों ने प्रमंडलीय आयुक्त को सौंपा ज्ञापन, की कार्रवाई की मांग

कंट्रोल एंड कमांड सेंटर में काम करने वाले ऑपरेटरों की वेतन वृद्धि की मांग पूरी तो हुई नहीं, बदले में उन्हें अपने अधिकारियों की बेरुखी का सामना करना पड़ा.

ऑपरेटरों ने शापूरजी पालोनजी के प्रोजेक्ट मैनेजर पर लगाये कई आरोपवरीय संवाददाता, भागलपुर

कंट्रोल एंड कमांड सेंटर में काम करने वाले ऑपरेटरों की वेतन वृद्धि की मांग पूरी तो हुई नहीं, बदले में उन्हें अपने अधिकारियों की बेरुखी का सामना करना पड़ा. इसके मद्देनजर ऑपरेटरों ने मंगलवार को प्रमंडलीय आयुक्त काे ज्ञापन सौंपा. ऑपरोटरों ने आरोप लगाया है कि कार्य अवधि के दौरान शापूरजी पालोनजी के प्रोजेक्ट मैनेजर आकाश कुमार से वेतन के संबंध में बातचीत के दौरान अभद्र व्यवहार कर निकाल दिया गया है, जबकि उनसे आश्वासन मिला था कि ट्रेनिंग समाप्त होने के बाद वेतन वृद्ध कर दी जायेगी. तत्काल 10,686 रुपये दिये जायेंगे. इस शर्त पर अपना-अपना योगदान कंपनी में दिया था और छह माह से ऑपरेटर पद पर कार्यरत हैं. कंपनी द्वारा टीम लीडर का वेतन करीब तीन माह पूर्व बढ़ा दिया गया है, तो हमलोगों में भी आस जगी कि वेतन बढ़ जायेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. करीब 10 दिन पूर्व हमलोगों ने अपने टीम लीडर से वेतन के संबंध में बातचीत की, तो उन्होंने सीधे प्रोजेक्ट मैनेजर से बात करने की कहकर पल्ला झाड़ लिया. उन सभी ने आरोप लगाया कि वेतन वृद्धि के संबंध में जब बीते सोमवार को बात करने गये, तो वो उग्र हो गये और अभद्र व्यवहार करते हुए कंपनी से निकल जाने को कहा. इस दौरान उन्होंने अपने रिश्ते व पहचान के लड़के को सम्मानपूर्वक व्यवहार करते हुए अपने काम पर रहने को कहा. यह भी आरोप लगाया कि छोटी-छोटी बात पर मानसिक प्रताड़ना देते हैं, खौफ दिखाते हैं. सभी ने मामले की जांच पड़ताल कर उज्ज्वल भविष्य बनाने की मांग की है. प्रोजेक्ट मैनेजर की ओर से बताया जा रहा है कि जो काम करने के योग्य नहीं है, वही खिलाफ में है. प्रोविजनल पीरियड में वेतन बढ़ोतरी नहीं होती है.

धक्का-मुक्की का तेजी से वायरल हो रहा वीडियो

वेतन वृद्धि की मांग के दौरान कंट्रोल एंड कमांड सेंटर में ऑपरेटरों के साथ धक्का-मुक्की का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इसमें स्पष्ट दिख रहा है कि किस तरह से समझाने के नाम पर ऑपरेटरों पर दबाव डाला जा रहा है. फिर किस तरह से धक्का-मुक्की होने लगती है. इस संबंध में स्मार्ट सिटी कंपनी के सीजीएम संदीप कुमार की ओर से कोई जवाब नहीं मिला. पीआरओ पंकज कुमार ने भी पूछने पर कोई जवाब नहीं दिया.

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By Prabhat Khabar News Desk

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bhagalpur news. प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे व साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो - लोकभवन ने विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने दिया निर्देश- लोकभवन ने पत्र में कहा, निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायेवरीय संवाददाता, भागलपुरपीजी व कॉलेज में प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो. इसे लेकर लोकभवन के विशेष कार्य अधिकारी न्यायिक कल्पना श्रीवास्तव ने टीएमबीयू सहित सूबे के अन्य विश्वविद्यालयों में पत्र भेजा है. पत्र में विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है. विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार को लेकर सचिवालय ने विवि प्रशासन को सख्त रुख अपनाने के लिए कहा है. शिक्षकों के कार्यभार को लेकर जारी निर्देश में स्पष्ट कहा कि निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायी जाये.लोकभवन से जारी पत्र में कहा कि पूर्णकालिक कार्यरत सभी शिक्षकों को सेमेस्टर के दौरान प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनका साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो.शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह लागू रहेगापत्र में स्पष्ट रूप से कहा कि न्यूनतम कार्यभार एक शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह यानी 180 कार्य दिवसों तक लागू रहेगा. साप्ताहिक 40 घंटे के कार्यभार को छह कार्य दिवसों में समान रूप से विभाजित करने का निर्देश दिया है. कहा कि यूजीसी के प्रावधानों में भी कार्यभार से संबंधित इसी तरह के मानदंड निर्धारित हैं. जिन्हें कानूनी मान्यता प्राप्त है. उनका पालन अनिवार्य है. उन मानकों को सख्ती से लागू कर बेहतर शैक्षणिक परिणाम सुनिश्चित करें.लोकभवन को मिली शिक्षकों के गायब रहने की शिकायतलोकभवन को शिक्षकों के गायब रहने की शिकायत मिल रही है. अंदरखाने की मानें, तो कुछ छात्र संगठन व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कॉलेज व पीजी विभागों में निर्धारित समय से पहले ही गायब रहने की शिकायत लोकभवन से की है. इसे लेकर कुलाधिपति सख्त होते दिख रहे है. ऐसे में कॉलेजों व पीजी विभाग का औचक निरीक्षण भी किया जा सकता है.ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी की नहीं होती है क्लासकॉलेज में ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी विषय की क्लास नहीं होती है. एक दिन पहले छात्र राजद के कार्यकर्ताओं ने एक कॉलेज के प्राचार्य से वार्ता के दौरान कहा था कि एमजेसी (ऑनर्स) विषय की क्लास होती है, लेकिन एमआइसी (सब्सिडियरी) विषय की क्लास नहीं होती है. छात्र संगठन का आरोप था कि एईसी, वीएसी व एसीसी की भी क्लास भी नहीं होती है.लोकभवन के निर्देश का हो रहा पालन - शिक्षक संगठनशिक्षक संगठन भुस्टा के महासचिव प्रो जगधर मंडल ले कहा कि लोकभवन के निर्देश का पालन हो रहा है. यूजीसी के नियमानुसार कॉलेज व पीजी विभागों में पांच घंटे तक शिक्षकों रहते हैं. सारा कार्य करते हैं. यह कोई नई बात नहीं है. शिक्षक लोकभवन के साथ है.

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