मुख्य बातें:
भागलपुर से रिपोर्ट
De Addiction Centre: भागलपुर जिला मुख्यालय स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण सदर अस्पताल के नशामुक्ति केंद्र में इन दिनों नशे की घातक लत से जूझ रहे मरीजों की आमद लगातार बढ़ रही है. केंद्र के आधिकारिक आंकड़े बेहद चौंकाने वाले और चिंताजनक हैं. आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि जिले में शराब के सेवन के साथ-साथ स्मैक, अफीम और अन्य रासायनिक सूखे नशों की गिरफ्त में आने वाले युवाओं और लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है.
तीन श्रेणियों में विभक्त कर हो रहा है मरीजों का इलाज
- श्रेणी 1: सिर्फ काउंसलिंग से सुधार (256 मरीज)केंद्र में ऐसे 256 मरीज पंजीकृत किए गए जो सामान्य रूप से शराब पीने के आदी थे. इन्हें अस्पताल के मनोचिकित्सकों और काउंसलर्स द्वारा नियमित रूप से परामर्श (Therapy) देकर नशे की लत से पूरी तरह बाहर निकाल लिया गया है. इन मरीजों को किसी भी प्रकार की भारी दवा देने की आवश्यकता नहीं पड़ी.
- श्रेणी 2: दवा और काउंसलिंग का संयुक्त उपचार (246 मरीज)अत्यधिक और अनियंत्रित रूप से शराब का सेवन करने वाले 246 मरीज इस श्रेणी में उपचाराधीन हैं. चूंकि इनकी शारीरिक निर्भरता अल्कोहल पर ज्यादा हो चुकी थी, इसलिए डॉक्टरों द्वारा इन्हें विथड्रॉल सिंड्रोम से बचाने के लिए जरूरी दवाओं के साथ-साथ लगातार काउंसलिंग की जा रही है, ताकि वे दोबारा इस दलदल में न फंसें.
- श्रेणी 3: स्मैक व सूखे नशे के शिकार (181 मरीज)केंद्र में सबसे गंभीर और संवेदनशील स्थिति स्मैक (Smack) और अन्य घातक सूखे नशों के आदी मरीजों की है. वर्तमान में ऐसे 181 मरीज केंद्र में भर्ती हैं. इन मरीजों के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर गहरा असर होने के कारण इन्हें विशेष एंटी-क्रैविंग दवाओं, डिटॉक्सिफिकेशन थेरेपी और कड़ी निगरानी में रखकर ठीक किया जा रहा है.
De Addiction Centre: परिवार का सहयोग और समय पर इलाज है सबसे बड़ा हथियार
नशामुक्ति केंद्र के वरिष्ठ चिकित्सा पदाधिकारी ने इस सामाजिक बुराई और इसके वैज्ञानिक समाधान को लेकर अपनी बात रखी. हमारे नशामुक्ति केंद्र में आने वाले हर मरीज की मानसिक स्थिति का गहन अध्ययन कर उनकी मॉनिटरिंग की जाती है. नशा कोई अपराध नहीं बल्कि एक मानसिक और शारीरिक बीमारी है, जिसे सही समय पर इलाज और उचित काउंसलिंग से पूरी तरह ठीक किया जा सकता है. अस्पताल की दवाओं से ज्यादा ऐसे मरीजों को उनके परिवार और समाज के भावनात्मक सहयोग की जरूरत होती है. हमारे प्रयास और पारिवारिक सपोर्ट से अधिकांश गंभीर मरीज अब नशा छोड़ सामान्य जीवन की मुख्यधारा में लौट रहे हैं.
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में नशे के खिलाफ बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाने की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है, ताकि लोग शुरुआती लक्षणों को पहचानकर सीधे सदर अस्पताल के इस केंद्र से निःशुल्क मदद ले सकें.
